अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध अब जब अपने 13वें दिन से हो कर गुजर रहा है, हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और संघर्ष का असर अब समुद्री मार्गों, तेल आपूर्ति और मानवीय संकट पर साफ दिखाई देने लगा है।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता का संदेश
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी ने अपना पहला लिखित संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने अमेरिका और इजरायल से “मुआवज़ा” देने की मांग की है और चेतावनी दी है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद रहेगा ताकि दबाव बनाया जा सके। यह जलमार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम है क्योंकि यहीं से वैश्विक तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिका की सैन्य स्थिति
पश्चिमी इराक में एक अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें कम से कम पांच क्रू सदस्य सवार थे। सेना ने कहा कि यह घटना न तो दुश्मन की गोलीबारी से हुई और न ही मित्र सेना की फायरिंग से। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने सैनिक घायल या मृत हुए।
तेल और गैस पर हमले
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी ऊर्जा ढांचे और बंदरगाहों पर हमला हुआ तो पूरा क्षेत्र “आग” में झोंक दिया जाएगा। बहरीन ने कहा कि ईरानी हमलों ने देश के उत्तरी हिस्से में ईंधन टैंकों को निशाना बनाया।
ग्रीनपीस ने बताया कि फारस की खाड़ी में 85 बड़े तेल टैंकर फंसे हुए हैं। यदि इन पर हमला हुआ तो यह “पर्यावरणीय टाइम बम” साबित हो सकता है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव
संयुक्त अरब अमीरात के तट पर एक कंटेनर जहाज पर “अज्ञात प्रोजेक्टाइल” से हमला हुआ। इससे एक दिन पहले तीन जहाजों पर भी इसी तरह के हमले हुए थे। यह जलमार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत ले जाता है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने इसे बंद रखने की बात कही, जबकि ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने कहा कि देश इसे बंद नहीं करेगा।
इजरायल और हिज़्बुल्लाह
इजरायल ने ईरान समर्थित लेबनानी संगठन हिज़्बुल्लाह पर हमले तेज कर दिए हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री ने सेना को लेबनान में अभियान बढ़ाने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनानी सरकार से हिज़्बुल्लाह को निशस्त्र करने की मांग की और कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो इजरायल “अपने तरीके” से करेगा।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 मार्च से अब तक कम से कम 687 लोग मारे गए हैं, जिनमें 98 बच्चे शामिल हैं।
ईरान में हमले जारी
इजरायली ड्रोन हमलों ने तेहरान में IRGC और बसीज चेकपॉइंट्स को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इसमें कम से कम 10 “सुरक्षा रक्षक” मारे गए।
इराक में तनाव
इराक के एरबिल में एक सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमले में छह फ्रांसीसी सैनिक घायल हुए। बाद में ईरान समर्थित मिलिशिया अशाब अल-कहफ ने बयान जारी कर फ्रांसीसी हितों को निशाना बनाने की धमकी दी।
विस्थापन का संकट
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में 32 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। इनमें से अधिकांश तेहरान और अन्य शहरी इलाकों से उत्तर और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर भाग रहे हैं। लेबनान में भी 8 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।
खाड़ी देशों पर हमले
कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ जिससे ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ। दुबई में भी एक ड्रोन लक्ज़री इलाके क्रीक हार्बर के पास इमारत पर गिरा। अन्य खाड़ी देशों ने भी ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी।
तेल आपूर्ति संकट
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में “सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा” पैदा कर रहा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह अब “बहुत कम” रह गया है। इस महीने आपूर्ति में 80 लाख बैरल प्रति दिन की गिरावट का अनुमान है।
तेल कीमतें
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो 2022 के बाद पहली बार है। शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई है।
स्कूल पर हमला
अमेरिकी सेना ने गलती से ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बना दिया। प्रारंभिक जांच में कहा गया कि यह हमला पुराने सैन्य आंकड़ों के कारण हुआ। ईरानी मीडिया के अनुसार, इसमें कम से कम 168 बच्चे और 14 शिक्षक मारे गए।
यह घटना युद्ध की सबसे भयावह त्रासदियों में से एक मानी जा रही है।
13वें दिन का यह युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा संकट, मानवीय त्रासदी और पर्यावरणीय खतरे का रूप ले चुका है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता के संदेश से तनाव और बढ़ गया है। तेल आपूर्ति बाधित होने से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान की रणनीति ने युद्ध को और जटिल बना दिया है।
(त्रिपाठी पारिजात)



