OMG: पिछले साल एक खबर दुनिया की मीडिया ने आगे क्यों नहीं बढ़ाई जो अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रंप ने शेयर की थी – बात समझ न आई?
आज से आठ महीने पहले की बात है ये। जून 2025 मेें किया गया था इस तरह का दावा और मजे की बात इस चौंकाने वाले षडयन्त्र या अफवाह – जो भी था, उसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने फॉलोवर्स के साथ साझा भी किया था। अमेरिका के राष्ट्रपति को ऐसा करना पड़ा इसकी क्या वजह हो सकती है?
सोचने वाली बात ये है कि ये सच हो या अफवाह, आखिर इसको सामने क्यों लाया गया? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में हैं। मई 31, 2025 की शनिवारी रात को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक बेहद अजीबोगरीब और आधारहीन दावा शेयर किया था। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को साल 2020 में ही ‘फांसी’ दी जा चुकी है और तब से उनकी जगह ‘क्लोन’ या ‘रोबोट’ काम कर रहे हैं।
बिना किसी सबूत के शेयर किया पोस्ट यह मूल पोस्ट ‘ट्रुथ सोशल’ के एक गुमनाम यूजर द्वारा किया गया था, जिसके द्वारा सामने लाये जाने वाले दावों को अक्सर बेतुके दावे कह कर खारिज किया जाता रहा है।
इस व्यक्ति की उस पोस्ट में कहा गया था कि असली जो बाइडेन की जगह “क्लोन, डबल्स” और “बिना आत्मा वाले रोबोटिक इंसानों” ने ले ली है। ट्रंप उसकी इस पोस्ट से प्रभावित हुए या उनको सच पता था – ये सच किसी को आज तक पता नहीं है। लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प ने उस पोस्ट के पब्लिश होने के तुरंत बाद उसके लिंक को अपने लगभग 1 करोड़ फॉलोअर्स के साथ साझा किया। पता नहीं क्यों उन्होंने शेयर की गई अपनी इस हैरान करने वाली पोस्ट के साथ कोई स्पष्टीकरण या संदर्भ नहीं दिया।
सारी दुनिया की मीडिया अमेरिका के राष्ट्रपति की इतनी बड़ी साजिश की तरफ इशारा करने वाली पोस्ट पर खामोश क्यों रही ?- ये बात भी समझ नहीं आई।व्हाइट हाउस ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है कि ट्रंप ने यह पोस्ट क्यों साझा किया और क्या वह वास्तव में इस बात को सच मानता है।

भ्रामक सूचनाओं को लेकर अमेरिकी राजनीति में एक लंबा और पुराना इतिहास रहा है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने बिना प्रमाण वाली ‘कॉन्स्पिरेंसी थ्योरी’ साझा की हो। इससे पहले भी वह कई बार भ्रामक दावे कर चुके हैं। उदाहरण के लिये –
वह लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने 2020 का चुनाव जीता था, जिसके बाद उनके समर्थकों ने 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल पर हमला किया था।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के जन्मस्थान को लेकर भी सवाल उठाए थे।
2024 के चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने दावा किया था कि हैती के अप्रवासी लोगों के पालतू जानवरों को खा रहे हैं। ये सभी दावे जांच में पूरी तरह गलत साबित हुए हैं।
प्रशासन के अन्य सदस्यों के भी रहे हैं विवादित बयान
सिर्फ ट्रंप ही नहीं ऐसे अजीब बयान देते रहे हैं, उनके प्रशासन के कई उच्च अधिकारी भी ऐसी थ्योरी फैलाते रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर कई बार वैक्सीन को लेकर ऐसे दावे कर चुके हैं जो वैज्ञानिक रूप से गलत साबित हुए हैं। वहीं, एफबीआई के शीर्ष अधिकारियों ने भी दावा किया था कि “डीप स्टेट” ने ट्रंप के खिलाफ एजेंसी का गलत इस्तेमाल किया है।
जो बाइडेन का स्वास्थ्य और विवाद मई 2025 के महीने ही यह जानकारी सामने आई थी कि जो बाइडेन प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे हैं। इस खुलासे के बाद उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता पर सवाल उठने लगे थे। ट्रंप के करीबियों का आरोप है कि बाइडेन ने अपनी बीमारी देश से छिपाई, जबकि बाइडेन के प्रवक्ता का कहना है कि उन्हें पिछले महीने ही इस बीमारी का पता चला।
तब ऐसा लगा जैसे ट्रंप ने बाइडेन पर हमले तेज कर दिए। ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य बाइडेन द्वारा ‘ऑटोपेन’ (हस्ताक्षर करने वाली मशीन) के इस्तेमाल पर भी सवाल उठा रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि बाइडेन द्वारा राष्ट्रपति के रूप में किए गए कुछ ‘क्षमादान’ (Pardons) वैध नहीं हैं क्योंकि उन पर असली पेन से साइन नहीं किए गए। हालांकि, रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि व्हाइट हाउस दशकों से हस्ताक्षरों के लिए ऑटोपेन का इस्तेमाल करता आ रहा है।
पिछले साल मई-जून के दौरान भले ही ट्रंप इन हमलों को तेज कर रहे थे, लेकिन इसके अगले ही दिन बाइडेन ने पत्रकारों से मजाक करते हुए कहा कि वह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं और अपनी मानसिक स्थिति को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर उन्हें हंसी आ रही है।
अब आज के वक्त पर आ जाते हैं
आज से पांच दिन पहले फरवरी 6, 2026 की तारीख को जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के हालिया खुलासे में एक ऐसा दस्तावेज़ सामने आया है, जिसमें एक बिना प्रमाण वाला दावा किया गया है। इस दावे में आरोप लगाया गया है कि जो बाइडेन को साल 2019 में गोली मार दी गई थी और उनकी जगह एक मास्क पहने हुए ‘बॉडी डबल’ (नकली व्यक्ति) को बिठा दिया गया था।
यह दावा किसी तीसरे पक्ष द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ में मिलता है, जो क्लोन और फांसी से जुड़ी ‘कॉन्स्पिरेंसी थ्योरी’ को बढ़ावा देता है। अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने इस सामग्री की पुष्टि नहीं की है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि इस रिलीज़ में बिना छानी गई रिकॉर्ड्स और सूचनाएं (tips) शामिल हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का मतलब यह कतई नहीं है कि वे इन दावों की सत्यता की पुष्टि करते हैं। समझ में आने वाली बात है ये कि ट्रम्प के राष्ट्रपति होने के इस दौर में अमेरिका की कोई सरकारी एजेन्सी या विभाग कैसे कह सकता है कि इस तरह के किसी दावे में दम हो सकती है या वे इस दावे की सत्यता पर विश्वास करते हैं।
पर एपस्टीन फाइल्स में पचासों जगह ट्रम्प की फोटो एपस्टीन के साथ नजर आई हैं ऐसे में लगता है कि ट्रंप द्वारा शेयर की गई पोस्ट के भीतर कही गई जानकारी शायद उनके पास पहले से ही थी। यदि ऐसा है तो क्या ये बात सच है?
(त्रिपाठी पारिजात)



