Ram Ram: पढ़िये इस लेख में आपको दी जा रही है एक बेहद अनूठी और वैज्ञानिक अध्ययन से निष्कर्षित जानकारी..
जब भी हम किसी को माला फेरते या नाम जप करते हुए देखते हैं, तो आज की आधुनिक पीढ़ी इसे केवल एक धार्मिक कर्मकांड या अंधविश्वास समझ लेती है। लोग सोचते हैं कि इससे क्या होगा? लेकिन एक चिकित्सक और विज्ञान का छात्र होने के नाते, जब मैंने इसके पीछे के न्यूरो-वैज्ञानिक स्रोतों को देखा, तो मैं खुद दंग रह गया।
आज हार्वर्ड से लेकर मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट तक के वैज्ञानिक इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि बार-बार एक ही शब्द या मंत्र का उच्चारण हमारे मस्तिष्क को कैसे रीवायर (re-wire) कर सकता है। आज हम बिना किसी भ्रांति के नाम जप के पीछे छिपे शुद्ध शरीर क्रिया विज्ञान को समझेंगे। आलेख को बहुत ध्यान से पढ़ना ।
सबसे पहले समझते हैं कि जब हम लगातार नाम जप करते हैं, तो हमारे दिमाग में क्या बदलाव आता है? हमारे मस्तिष्क में एक खूबी होती है, जिसे ‘न्यूरोप्लास्टिसिटी’ (Neuroplasticity) कहते हैं। यानी, दिमाग अपनी संरचना को हमारे विचारों के अनुसार बदल सकता है। जब हम दिनभर तनाव, चिंता और नकारात्मक बातें सोचते हैं, तो हमारा मस्तिष्क बीटा वेव्स (Beta waves) में होता है, जो अत्यधिक सक्रियता और तनाव को दर्शाता है।
किन्तु मेडिकल स्टडीज में देखा गया है कि जब कोई व्यक्ति लयबद्ध तरीके से नाम जप या मंत्र का उच्चारण करता है, तो मस्तिष्क तुरंत अल्फा (Alpha) और थीटा (Theta) वेव्स में प्रवेश कर जाता है। ये वही ब्रेन वेव्स हैं, जो गहरी नींद, ध्यान और हीलिंग के समय सक्रिय होती हैं। यानी, नाम जप आपके अशांत दिमाग को सीधे हीलिंग मोड में ले जाने का एक न्यूरोलॉजिकल शॉर्टकट है।
अब आइए इसके पैथोफिजियोलॉजी (Pathophysiology) पर। हमारे दिमाग में एक हिस्सा होता है, जिसे ‘अमिगडाला’ (Amygdala) कहते हैं। इसे शरीर का फियर सेंटर या अलार्म सिस्टम भी कहा जाता है। तनाव और एंजाइटी में यह अमिगडाला ओवरएक्टिव हो जाता है।
जब आप नाम जप करते हैं, विशेषकर जब जीभ और तालू का आपस में संपर्क होता है, तो हमारे मुंह के ऊपरी हिस्से में स्थित 84 मेरिडियंस पॉइंट्स (Meridians points) उत्तेजित होते हैं। यह उत्तेजना सीधे हाइपोथैलेमस को सिग्नल भेजती है। इसके साथ ही मंत्र के उच्चारण से जो कंपन पैदा होते हैं, वे हमारी वेगस नर्व (Vagus nerve) को सक्रिय कर देते हैं।
वेगस नर्व हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic nervous system) की महारानी है। जैसे ही यह सक्रिय होती है, आपका कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन गिर जाता है, ब्लड प्रेशर सामान्य होता है और हृदय की गति संतुलित हो जाती है। विज्ञान कहता है कि यह केवल भगवान को रिझाना नहीं, बल्कि अपने नर्वस सिस्टम को शांत करना है।
योग विज्ञान के अनुसार, हमारा शरीर केवल हाड़-मांस का ढांचा नहीं है, बल्कि इसमें ऊर्जा का एक जाल है, जिसमें करोड़ों नाड़ियां हैं। जब हम किसी दिव्य नाम का जप करते हैं, तो वो ध्वनि तरंगें हमारे अनाहत चक्र और विशुद्धि चक्र को जाग्रत करती हैं।
यह ध्वनि ऊर्जा हमारे अवचेतन मन में बैठे पुराने संस्कारों और कचरे को साफ करने लगती है। ऋषियों ने इसे मंत्र कहा है— “मननात् त्रायते इति मंत्रः”। अर्थात, जो मन को बंधनों से तार दे, मुक्त कर दे, वही मंत्र है। जब विज्ञान और अध्यात्म इस बिंदु पर मिलते हैं, तो जीवन में एक अद्भुत रूपांतरण होता है। इस परम व्यवस्था के लिए प्रकृति के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहिए।
निष्कर्ष के रूप में, नाम जप केवल एक धार्मिक क्रिया ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को उत्कृष्ट बनाने का एक वैज्ञानिक और यौगिक फॉर्मूला भी है।
पाठक कृपा कर बतायें कि क्या आप भी प्रतिदिन नाम जप या किसी विशेष मंत्र का उच्चारण करते हैं? आपका अनुभव कैसा रहा है? अपना पसंदीदा मंत्र कमेंट्स में हमारे साथ जरूर साझा करें ।
विज्ञान और अध्यात्म के इस अद्भुत संगम को केवल अपने तक सीमित न रखें। तनाव और चिंता से घिरे अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ इसे शेयर करें ताकि वे भी इसका लाभ उठा सकें।
स्वस्थ रहिए, आध्यात्मिक बनिए, धन्यवाद ! जय श्री कृष्ण ।
(डॉक्टर कैलाश द्विवेदी)



