ये किस्सा उन दिनों का है जब 70 के दशक में अभिनेता मनोज कुमार फिल्म ‘शोर’ बनाने जा रहे थे इस फिल्म की कहानी के हिसाब से इसमें दो नायिकाओं की जरूरत थी.
एक रोल मनोज कुमार की पत्नी का था और दूसरा रोल उनकी प्रेमिका और सहायक अभिनेत्री का था. सहायक अभिनेत्री का रोल काफी पावरपुल था इस रोल के लिए मनोज कुमार ने एक्ट्रेस जया भादुड़ी को साइन कर चुके थे पर फिल्म में मनोज कुमार की पत्नी का रोल करने के लिए कोई एक्ट्रेस तैयार ही नहीं हो रही थी मनोज कुमार ने इसके लिए शर्मिला टैगोर से भी बात की उन्होने भी मना कर दिया.
मनोज कुमार ये समझ नहीं पा रहे थे फिल्म के पहले हाफ के इस जरुरी किरदार (उनकी पत्नी वाला) के लिए वो किस नायिका को साइन करे ? क्योंकि ये रोल फिल्म के लिहाज़ से भी काफी महत्वपूर्ण था अब ऐसे वक्त में किसी मित्र ने मनोज कुमार की पत्नी के रोल के लिए अभिनेत्री ‘नंदा ‘का नाम सुझाया. मनोज कुमार अनमने ढंग से बोले –
”नंदा जी एक बड़ी हीरोइन है वो ऐसी किसी फिल्म में काम क्यों करेंगी जिसमे वो इंटरवल से पहले ही मर जाने वाली हैं. वैसे भी इस फिल्म में उनके समक्ष दूसरी अभिनेत्री जया के लिए कहानी में ज्यादा स्कोप है. मुझे तो लगता है कि इस रोल के लिए किसी नई अभिनेत्री को ही लेना पड़ेगा.” लेकिन अपने मित्र के बार बार कहने पर मनोज कुमार आखिर नंदा से बात करने को सहमत हो गये और उनको फोन करके मिलने का वक्त माँगा ताकि वो उन्हें कहानी और रोल के बारे में अच्छी तरह समझा सके.
नंदा ने मनोज जी को अपने घर फिल्म की कहानी सुनने के लिए बुला लिया और मनोज कुमार बिना समय नष्ट किये सीधे नंदा जी के घर पहुंच गए. यहां मनोज कुमार ने नंदा को इस फिल्म से जुड़ी पहले की सारी कहानी भी ईमानदारी से बता दी कि किस-किस हीरोइन ने पहले इस रोल को करने से मना कर दिया है.
मनोज कुमार ने ये भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी फिल्म में उनका नायक की पत्नी का छोटा सा रोल है जो एक एक्सीडेंट में मर जाती है. इसमें प्रमुख नायिका एक तरह से जया जी ही है. अब आप बताइये कि क्या आप ये रोल करना पसंद करेंगी? नंदा जी ने कुछ देर सोचने के बाद कहा.” वो उनकी फिल्म में ये रोल जरूर करेंगी ‘मगर इस शर्त के साथ कि वो ये रोल वो बिना कोई फ़ीस लिए करेंगी ”.
”अरे, ये क्या कह रही हैं आप” -मनोज कुमार हैरान थे. उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि नंदा जैसी बड़ी अभिनेत्री ये छोटा सा रोल करने को सहमत हो जायेंगी लेकिन यहाँ तो वो इस रोल को बिना पैसो के ही करने को तैयार हो गईं. मनोज कुमार बहुत खुश हुए.
नंदा और जया भादुड़ी को लेकर इस फिल्म की शूटिंग शुरू हुई और फिर 1972 में ये फिल्म सिनेमा परदे पर रिलीज हुई. नंदा जी ने अपना काम बेहद ईमानदारी से किया था. फिल्म ‘शोर’ के इस छोटे रोल में वो दर्शको की सारी सहानुभूति बटोर ले गईं. और तो और फिल्म में उनके हिस्से ‘एक प्यार का नगमा’ जैसा सुपरहिट गाना भी आया. फिल्म भी शानदार तरीके से बनी थी. सत्यजीत का फिल्म में नंदा के मूक बधिर बेटे बने थे.
मनोज कुमार नंदा का ये एहसान कभी भुला नहीं पाए. उन्होंने नंदा से वादा किया कि कभी किसी रूप में वो उनका ये ऐहसान चुका देंगे पर ऐसा हो नहीं पाया. वो समय फिर कभी आया ही नहीं. इस बात का मलाल मनोज कुमार को आज भी है अपने अलग कथानक के कारण भले ही इस फिल्म को सीमित दर्शक मिले परंतु ‘शोर ‘मनोज कुमार की बेहरीन फिल्मो में से एक मानी जाती है. लक्ष्मी कांत प्यारेलाल का अमर संगीत इस फिल्म की जान है. और आज भी यदि आप ‘इक प्यार का नगमा है’ गीत सुनेंगे तो वह आपके हृदय को स्पर्श करेगा.
(अज्ञात वीर)



