भारत हमेशा से ऋषियों, संतों और महान आध्यात्मिक व्यक्तित्वों की भूमि रहा है। इसी परंपरा में एक ऐसा नाम आता है जिसे दुनिया आज अपार श्रद्धा से याद करती है—नीम करोली बाबा। लोग उन्हें केवल संत नहीं, बल्कि करुणा, भक्ति और सरलता की जीवित प्रतिमूर्ति मानते हैं, जिनके संपर्क में आकर अनगिनत लोगों का जीवन बदल गया।
बचपन से ही अध्यात्म की ओर झुकाव
नीम करोली बाबा का जन्म लगभग 1900 के आस-पास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में लक्ष्मीनारायण शर्मा के रूप में हुआ था। बहुत छोटी उम्र से ही वे शांत, गम्भीर और आध्यात्मिक वातावरण में खोए रहते थे। परिवार के बीच रहकर भी उनके भीतर एक अलग ही आध्यात्मिक जागरूकता दिखाई देती थी।
सिर्फ 17 वर्ष की आयु में आत्मज्ञान प्राप्त करने के बाद उन्होंने सांसारिक मोह-माया को छोड़कर पूरी तरह हनुमान जी की भक्ति को अपने जीवन का आधार बना लिया। आगे चलकर यही भक्ति उन्हें असाधारण आध्यात्मिक प्रतिष्ठा तक ले गई।
कैसे पड़ा ‘नीम करोली बाबा’ नाम?
बाबा के जीवन में कई घटनाएँ ऐसी हुईं जिन्होंने लोगों के मन में उनके दिव्य स्वरूप की छाप छोड़ दी। वे उत्तर भारत में कई जगह घूमते और लोग उन्हें अलग-अलग नामों से बुलाते थे—कभी लक्ष्मण दास, कभी हांडी वाले बाबा, तो कभी तिकोनिया वाले बाबा।
एक घटना ने दिया बाबा नीम करोली नाम
लेकिन एक घटना ने उन्हें वह नाम दिया जो आज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है—नीम करोली बाबा।
एक बार वे बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठे हुए थे। टीटी ने नियम के अनुसार उन्हें ‘नीब करोली’ स्टेशन पर उतार दिया। जैसे ही बाबा उतरे, ट्रेन आगे बढ़ ही नहीं पाई। इंजन बदले गए, प्रयास हुए, लेकिन कोई परिणाम नहीं। जब लोगों ने बाबा को फिर सम्मान से ट्रेन में बैठाया, तो ट्रेन तुरंत चल पड़ी। इस रहस्यमय घटना के बाद लोग प्रेमपूर्वक उन्हें नीम करोली बाबा कहने लगे।
कैंची धाम: भक्ति और शांति का पवित्र केंद्र
1961 में जब बाबा पहली बार नैनीताल के पास कैंची धाम आए, तो उन्होंने वहां एक आश्रम बनाने का विचार किया। 1964 में आश्रम की स्थापना हुई और तब से यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। लोग मानते हैं कि यहां जो भी सच्चे मन से आता है, उसकी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। आज भी यहां एक अद्भुत शांति और ऊर्जामय वातावरण महसूस होता है।
विश्वभर में प्रसिद्ध—टेक जगत के दिग्गज भी हुए प्रभावित
नीम करोली बाबा की ख्याति सीमाओं से बहुत आगे तक फैल गई। दुनिया की जानी-मानी हस्तियाँ जैसे-
स्टीव जॉब्स
मार्क जुकरबर्ग
जूलिया रॉबर्ट्स
भी उनके जीवन और शिक्षाओं से गहराई से प्रभावित रहे। स्टीव जॉब्स ने भी भारत आकर उनके अनुयायियों से जुड़कर उनकी आध्यात्मिक दृष्टि को समझने की कोशिश की थी।
बाबा की सीख: सरलता, सेवा और प्रेम
बाबा के जीवन में अनेक घटनाएँ मिलती हैं जहाँ उन्होंने जरूरतमंदों की असाधारण रूप से मदद की—
कभी किसी को गंभीर बीमारी से मुक्ति दिलाई, कभी किसी बड़ी समस्या से बचाया, तो कभी किसी को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके अनगिनत चमत्कार, उनका प्रेम और उनका सहज स्वभाव ही लोगों को उन्हें ‘कलियुग का हनुमान’ कहने पर मजबूर करता है।
बाबा का अंतिम समय
11 सितंबर 1973 की रात बाबा के पृथ्वी पर रहने का समय समाप्त हुआ। वृंदावन आश्रम में अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन देने का प्रयास किया, लेकिन बाबा ने शांत स्वर में कहा कि उनका समय पूरा हो चुका है। तुलसी और गंगाजल ग्रहण करने के बाद, रात 1:15 बजे उन्होंने अपना पार्थिव शरीर त्याग दिया। जिस स्थान पर उन्होंने देह त्यागी, आज वहीं भक्तों के लिए एक पवित्र मंदिर है।
आज भी जीवित है बाबा की उपस्थिति
कैंची धाम में कदम रखते ही लोग आज भी एक अजीब-सी शांति, ऊर्जा और आत्मिक कंपन महसूस करते हैं। ऐसा लगता है मानो बाबा वहीं हों – अपनी स्नेह भरी मुस्कान के साथ और अपनी अनंत करुणा के साथ भक्तों को आशीर्वाद देते हुए।
नीम करोली बाबा का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक
बाबा हमें सिखाते हैं कि आध्यात्मिकता जटिल नहीं होती। यह तो प्रेम, सरलता, दया और सेवा से भरा हुआ मार्ग है। वे बताते हैं कि ईश्वर हमारे बाहर नहीं—हमारे भीतर ही मौजूद है। बस हमें अपने मन को शांत, पवित्र और प्रेम से भरना है।
नीम करोली बाबा केवल इतिहास के किसी अध्याय का हिस्सा नहीं हैं – वे एक जीवित अनुभूति, एक आत्मिक प्रकाश, और एक अदृश्य शक्ति हैं जो आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में रोज नई रोशनी जगाती है।
(त्रिपाठी पारिजात)



