Saturday, August 30, 2025
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Aruna Irani और प्राण साहब की यादगार कहानी

Aruna Irani ने बताई ये घटना किस तरह उन्हें दिखा असली चेहरा मशहूर खलनायक प्राण का उस रात होटल में..

Aruna Irani ने बताई ये घटना किस तरह उन्हें दिखा असली चेहरा मशहूर खलनायक प्राण का उस रात होटल में..

फिल्मी दुनिया में कई किस्से ऐसे हैं जो कलाकारों की असली शख्सियत को सामने लाते हैं। एक ऐसा ही किस्सा मशहूर अभिनेत्री अरुणा ईरानी और महान अभिनेता प्राण साहब से जुड़ा है, जिसे अरुणा जी ने खुद कई बार अपने इंटरव्यू में साझा किया है।

उस समय अरुणा ईरानी बहुत कम उम्र की और बिलकुल नई-नई थीं। उन्हें फिल्म जौहर महमूद इन हॉन्ग कॉन्ग की शूटिंग के लिए हॉन्ग कॉन्ग जाना पड़ा। शूटिंग पूरी करने के बाद जिस दिन वो भारत लौट रही थीं, उसी दिन संयोग से प्राण साहब भी वहीं से लौट रहे थे। प्राण साहब भी इसी फिल्म में काम कर रहे थे और उनका काम भी पूरा हो चुका था।

उस दौर में प्राण साहब अपनी खलनायकी भरी भूमिकाओं के लिए बहुत मशहूर थे। उनकी स्क्रीन इमेज इतनी डरावनी बन चुकी थी कि लोग उन्हें असल ज़िंदगी में भी खलनायक समझ बैठते थे। अरुणा ईरानी भी उन दिनों इतनी मासूम थीं कि उन्हें भी प्राण साहब से डर लगता था।

दोनों एक ही फ्लाइट से भारत लौट रहे थे। अरुणा ईरानी मन ही मन बहुत घबराई हुई थीं। उन्हें डर था कि कहीं प्राण साहब उनका फायदा न उठाने लगें।

फ्लाइट का छूट जाना और डर की घड़ी

उस ज़माने में हॉन्ग कॉन्ग से आने वाली फ्लाइटें सीधे मुंबई नहीं आती थीं। पहले कलकत्ता (अब कोलकाता) में उतरती थीं और फिर वहां से मुंबई जाने के लिए अलग फ्लाइट लेनी पड़ती थी।

लेकिन उस दिन जिस फ्लाइट से अरुणा ईरानी और प्राण साहब लौट रहे थे, वह लेट हो गई। इसके कारण मुंबई जाने वाली उनकी अगली फ्लाइट छूट गई। अब उनके पास कोई विकल्प नहीं था और अगली फ्लाइट अगले दिन सुबह ही थी।

प्राण साहब ने अरुणा ईरानी से कहा — “अब तो हमें होटल में ही रात बितानी होगी।”

यह सुनकर अरुणा ईरानी और डर गईं। उनके मन में तरह-तरह के ख़याल आने लगे। लेकिन उनके पास कोई और रास्ता भी नहीं था। मजबूरी में उन्हें प्राण साहब के साथ होटल जाना पड़ा।

होटल का वह पल और प्राण साहब की असलियत

होटल पहुंचकर प्राण साहब ने दो कमरे बुक करवाए — एक अपने लिए और एक अरुणा ईरानी के लिए। यह देखकर अरुणा ईरानी को बहुत अफसोस हुआ कि उन्होंने मन ही मन प्राण साहब को गलत समझा था।

असल में, प्राण साहब बहुत सज्जन और भले इंसान थे। कमरे में जाते समय उन्होंने अरुणा जी से कहा —
“अगर तुम्हें रात में कोई परेशानी हो तो मेरा दरवाज़ा खटखटा देना, मैं पास ही हूं।” यह कहकर प्राण साहब अपने कमरे में चले गए और अरुणा जी अपने कमरे में। अगले दिन सुबह दोनों ने साथ में फ्लाइट ली और मुंबई लौट आए।

बाद में अरुणा ईरानी ने अपने कई इंटरव्यूज़ में यह किस्सा सुनाया और हर बार अफसोस जताया कि उन्होंने प्राण साहब को लेकर गलत धारणा बना ली थी। असल ज़िंदगी में वो बेहद जेंटलमैन थे, अपनी स्क्रीन इमेज से बिलकुल अलग।

अरुणा ईरानी का जीवन और परिवार

कल अरुणा ईरानी ने अपना जन्मदिन मनाया है। 18 अगस्त 1946 को जन्मी अरुणा जी अब 79 साल की हो चुकी हैं। अपने भाई-बहनों में वो सबसे बड़ी हैं। उनके परिवार के कई सदस्य फिल्मी दुनिया से जुड़े हुए हैं।

उनके भाई इंद्र कुमार मशहूर डायरेक्टर हैं, जिन्होंने दिल और बेटा जैसी सुपरहिट फ़िल्में बनाई हैं। भाई आदि ईरानी भी अभिनेता हैं और फ़िल्म बेटा में उन्होंने अरुणा जी के बेटे का किरदार निभाया था।

भाई फ़िरोज़ ईरानी कई हिंदी फिल्मों में दिखे, लेकिन गुजराती सिनेमा में उन्हें ज़्यादा पहचान मिली। इसके अलावा भाई बलराज ईरानी और रतन ईरानी भी छोटे स्तर के अभिनेता रहे हैं।

IMDb के अनुसार, उनकी बहन चेतना ईरानी ने सिर्फ एक फिल्म (गरम मसाला – 1972) में काम किया और उसमें उन्होंने अपना नाम बदलकर मिनी महमूद रख लिया था। एक और बहन सुरेखा ईरानी भी हैं, लेकिन उनके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

कुल मिला कर कहा जा सकता है कि

अरुणा ईरानी का यह किस्सा हमें यह सिखाता है कि कभी-कभी स्क्रीन की छवि और असली जीवन में बहुत अंतर होता है। प्राण साहब, जिन्हें पूरी दुनिया खलनायक मानती थी, असल में एक सज्जन और नेकदिल इंसान हैं.

(प्रस्तुति -अर्चना शेरी)

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