Hang Till Death: चित्रकूट बाल यौन शोषण कांड की सुनवाई कर रही बांदा POCSO अदालत ने जेई पति-पत्नी को पांसी की सजा सुनाई है ..
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से जुड़े एक बेहद भयावह बाल यौन शोषण मामले में बांदा की विशेष POCSO अदालत ने सरकारी विभाग में तैनात एक जेई और उसकी पत्नी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत जघन्य है और दोषियों को “मृत्यु तक फांसी पर लटकाए रखा जाए।” लगभग पांच वर्षों तक चली जांच और सुनवाई के बाद यह फैसला आया, जिससे उन 34 मासूम पीड़ितों को न्याय मिला, जिनके साथ अमानवीय कृत्य किए गए थे।
सरकारी अधिकारी निकला मासूमों का शोषक
दोषी रामभवन, जो सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर कार्यरत था, चित्रकूट में तैनात था। उसकी पत्नी दुर्गावती गृहिणी थी। जांच में सामने आया कि दोनों मिलकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। पीड़ित बच्चों की उम्र 5 से 16 वर्ष के बीच बताई गई। आरोप है कि दंपति नाबालिगों के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न करते थे तथा लैपटॉप कैमरे से अश्लील वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड करते थे।
डार्क वेब के जरिए 47 देशों तक पहुंची सामग्री
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह आपराधिक सामग्री डार्क वेब के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाई जाती थी। अदालत में पेश विवरण के मुताबिक, इन वीडियो और तस्वीरों को चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचा गया। एक पेन ड्राइव से 34 बच्चों के वीडियो और 679 तस्वीरें बरामद होने की जानकारी दी गई।
CBI की कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद 31 अक्टूबर 2020 को केंद्रीय जांच शुरू हुई और 18 नवंबर 2020 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान घरों पर छापेमारी में लगभग 8 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेबकैम, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस और बच्चों को लुभाने के लिए इस्तेमाल किए गए खिलौने बरामद हुए। ईमेल और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच में यह भी संकेत मिले कि आरोपी कई भारतीय और विदेशी संपर्कों से जुड़े थे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व वेबसाइटों के जरिए बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री तैयार कर साझा कर रहे थे।
700 पन्नों की चार्जशीट, 74 गवाह
गिरफ्तारी के 88 दिन बाद जांच एजेंसी ने बांदा अदालत में लगभग 700 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की। इसमें मेडिकल रिपोर्ट, पीड़ित बच्चों के बयान और डिजिटल साक्ष्य शामिल थे। सुनवाई के दौरान 4 से 42 वर्ष आयु वर्ग के 74 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी संबंधित व्यक्तियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विधिवत जोड़ा गया।
अदालत का फैसला और मुआवजा
18 फरवरी को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया और शुक्रवार को सजा सुनाते हुए मृत्युदंड का आदेश दिया। अदालत ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश भी की। जिन बच्चों के साथ अत्याचार हुआ, उनका उपचार दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) में कराया गया।
मामले का महत्व
यह मामला न केवल अपराध की भयावहता के कारण, बल्कि इस वजह से भी महत्वपूर्ण है कि एक शिक्षित सरकारी अधिकारी और उसकी पत्नी पर इतने संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले अपराध का आरोप सिद्ध हुआ। अदालत का कड़ा रुख बाल संरक्षण कानूनों के सख्त अनुपालन और डिजिटल अपराधों के खिलाफ सख्ती का स्पष्ट संदेश देता है।



