Wednesday, March 11, 2026
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Iran US War -11वाँ दिन: ईरान और भी घातक हुआ मिडिल ईस्ट पर – जंग में फंसाया अमेरिका को

Iran US War -11वाँ दिन:  सैन्य घटनाक्रम ट्रम्प के लिये बहुत फायदे का नहीं रहा.. हॉर्मुज स्ट्रेट पर ईरान से बोले - हटा लो बारुदी सुरंगे वरना अन्जाम बुरा होगा..

Iran US War -11वाँ दिन:  सैन्य घटनाक्रम पर नजर डालें तो फंसते हुए नजर आये ट्रम्प.. हॉर्मुज स्ट्रेट पर गहराया तनाव..

ईरान-अमेरिका युद्ध: हॉर्मुज पर बारूदी सुरंगें, 11वें दिन समुद्र बना रणभूमि

युद्ध के 11वें दिन हालात बेहद गंभीर हो गए। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाकर अमेरिका को सीधी चुनौती दी। यह वही जलमार्ग है जहां से दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई होती है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने बताया कि ईरान ने अभी तक कुछ दर्जन सुरंगें ही बिछाई हैं, लेकिन उसके पास 80–90% क्षमता अभी भी बची है। इसका मतलब है कि अगर ईरान चाहे तो सैकड़ों और सुरंगें इस जलमार्ग में डाल सकता है।

अमेरिका ने चेतावनी दी कि अगर सुरंगें नहीं हटाईं गईं तो ईरान को अभूतपूर्व परिणाम भुगतने होंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान को तुरंत यह कदम वापस लेना चाहिए, अन्यथा उसे ऐसे नतीजे देखने पड़ेंगे जो पहले कभी नहीं देखे गए। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने 16 ईरानी जहाज नष्ट कर दिए हैं जो माइन बिछाने में लगे थे।

हॉर्मुज से गुजरने वाला जहाज यातायात लगभग ठप हो गया है। ईरान ने साफ कहा कि जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरेगा, उस पर हमला होगा। इस चेतावनी ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को डरा दिया है। कई कंपनियों ने अपने जहाजों को फिलहाल इस मार्ग से हटाकर वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है।

ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने समुद्र में खतरा पैदा करने के लिए एक जटिल नेटवर्क तैयार किया है। इसमें छोटी तेज़ नावें, विस्फोटकों से भरी नावें और तटीय मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। इनकी मदद से यह संकरा सा समुद्री रास्ता बहुत जल्दी रणक्षेत्र में बदल सकता है।

इस घटनाक्रम से साफ है कि युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों और हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्र भी रणभूमि बन चुका है। अमेरिका ने अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा दी है, लेकिन ईरान की रणनीति ने उसे उलझा दिया है।

ऊर्जा संकट और वैश्विक असर

ईरान की धमकी: तेल सप्लाई रोकी, कीमतें आसमान पर, दुनिया में ऊर्जा संकट

ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने घोषणा की कि अगर हमले जारी रहे तो “एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाएगा।” इस बयान के बाद तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। अमेरिका ने जवाब दिया कि अगर टैंकर ट्रैफिक रोका गया तो ईरान को बीस गुना ताकत से जवाब मिलेगा।

इस बीच, लेबनान में हिज़बुल्ला के ठिकानों पर बमबारी हुई। तेहरान में लाखों लोग नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के समर्थन में सड़कों पर उतर आए। अमेरिका ने ईरान के मिसाइल निर्माण केंद्रों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर दिखने लगा है। गैस, उर्वरक, सेमीकंडक्टर और अन्य उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह संकट और गंभीर है। भारत अपनी खपत का लगभग 85% तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक संकट की स्थिति में भारत को अपने रणनीतिक भंडार का सहारा लेना पड़ सकता है।

युद्ध का असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं है। कई देशों में महंगाई बढ़ने लगी है। यूरोप में गैस की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। एशियाई देशों में बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया ने अपने रणनीतिक भंडार खोलने की तैयारी शुरू कर दी है।

यह संकट दिखाता है कि ऊर्जा सुरक्षा आज भी दुनिया की सबसे बड़ी कमजोरी है।

कूटनीति, रणनीति और भविष्य

ईरान-अमेरिका युद्ध: ट्रंप बोले जल्द खत्म होगा, लेकिन तेहरान ने झुकने से किया इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि युद्ध “बहुत जल्दी खत्म हो सकता है।” लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वह नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से खुश नहीं हैं। क्षेत्रीय नेताओं ने आपातकालीन कूटनीतिक वार्ताएं शुरू की हैं।

तेहरान और खाड़ी क्षेत्र में रातभर भारी बमबारी हुई। अमेरिका ने ईरान के मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने की रणनीति अपनाई है। सऊदी अरब और UAE ने अपने तेल टर्मिनलों की सुरक्षा बढ़ा दी है। भारत ने अपने रणनीतिक तेल भंडार की समीक्षा शुरू कर दी है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर युद्ध लंबा चला तो तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल सकती है।

कूटनीतिक स्तर पर रूस और चीन ने ईरान का समर्थन किया है। वहीं यूरोप ने अमेरिका से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्धविराम की मांग की है।

ईरान ने साफ कहा है कि वह झुकने वाला नहीं है। मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा और किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।

यह स्पष्ट है कि युद्ध का भविष्य कूटनीति और सैन्य रणनीति दोनों पर निर्भर करेगा। अगर बातचीत सफल होती है तो संकट टल सकता है, लेकिन अगर टकराव जारी रहा तो यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है।

युद्ध जारी है..

(त्रिपाठी पारिजात)

 

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