Ishan Kishan की कहानी संजू सैमसन जैसी है या कहें तो उससे भी कठोर..लेकिन जैसी वापसी सैमसन ने की वैसी ही ईशान ने भी और दोनो ने मिलकर जिताया विश्वकप टी20 का ..
सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है,
शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं।
है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में
खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़।
मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।
पंक्तियां ईशान किशन को समर्पित हैं
क्रिकेट में कुछ खिलाड़ियों की कहानी सिर्फ स्कोरबोर्ड पर लिखे रन से नहीं बनती। उनके संघर्ष, टीम में अंदर-बाहर की यात्रा और हर मौके पर खुद को फिर से साबित करने की जिद उस कहानी को आकार देती है। Ishan Kishan उन्हीं खिलाड़ियों में से एक हैं। कभी टीम में जगह पक्की लगती है तो अगले ही दौरे में बाहर बैठना पड़ जाता है। कभी ओपनिंग की बहस, कभी मिडिल ऑर्डर में फिट होने की चुनौती, और कभी टीम कॉम्बिनेशन का गणित। भारतीय क्रिकेट में जगह बनाना जितना मुश्किल है, उसे लगातार बनाए रखना उससे भी ज्यादा कठिन है।
एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि इशान किशन की जगह तय नहीं हो पा रही। टीम में Rishabh Pant जैसे विकेटकीपर बल्लेबाज़ की मौजूदगी और पहले की पीढ़ी में MS Dhoni की विरासत—इन सबके बीच इशान को बार-बार अपनी भूमिका बदलनी पड़ी। लेकिन इस खिलाड़ी की सबसे बड़ी खूबी यही रही कि यह इंतज़ार करता है, शिकायत नहीं करता, और मौका मिलने पर खेल को डरकर नहीं बल्कि हमला करके खेलता है।
इस ICC Men’s T20 World Cup में भी उनकी कहानी कुछ ऐसी ही रही। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने लगभग 9 मैचों में 317 रन बनाए। औसत करीब 35 रहा और स्ट्राइक रेट लगभग 155 के आसपास—जो किसी भी टी20 बल्लेबाज़ के लिए शानदार माना जाता है। इन पारियों में 3 अर्धशतक, लगभग 33 चौके और 18 छक्के शामिल रहे। लेकिन असली बात सिर्फ रन नहीं थी, बल्कि वह रफ्तार थी जिससे ये रन आए।
टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक, Pakistan national cricket team के खिलाफ मैच में इशान किशन ने 40 गेंदों पर 77 रन बनाए। उस पारी का स्ट्राइक रेट करीब 190 रहा। भारत ने जल्दी विकेट खो दिया था, लेकिन इशान ने वही किया जो एक टी20 ओपनर का धर्म होता है—गेंदबाज़ को शुरुआत से ही दबाव में डाल दो। चौकों-छक्कों की बारिश से उन्होंने मैच का मोमेंटम भारत की तरफ मोड़ दिया।
इसके बाद Namibia national cricket team के खिलाफ 24 गेंदों में 61 रन की पारी आई। यह वह पारी थी जिसमें इशान ने सिर्फ 20 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और एक ओवर में 28 रन ठोक दिए। स्ट्राइक रेट करीब 250 के आसपास—और यही वह आक्रामक शैली है जिसके लिए इशान किशन जाने जाते हैं।
सेमीफाइनल में जब मुकाबला England cricket team से था, तब भी इशान ने टीम को तेज़ शुरुआत दी। उस मैच में उन्होंने 18 गेंदों में 39 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 216 के आसपास रहा। यह पारी स्कोरकार्ड में बहुत बड़ी नहीं दिखती, लेकिन उसी ने भारत को वह शुरुआत दी जिससे बड़ा स्कोर खड़ा करना आसान हुआ।
फाइनल में भारत का सामना New Zealand national cricket team से था और वहाँ भी इशान किशन ने वही किया जिसकी टीम को जरूरत थी। उन्होंने 25 गेंदों में 54 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 4 छक्के शामिल थे और स्ट्राइक रेट 216 के आसपास रहा। यह पारी इतनी तेज़ थी कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज़ शुरुआत से ही दबाव में आ गए।
लेकिन इशान किशन का योगदान सिर्फ बल्ले से नहीं आया। इस पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने फील्डिंग में भी शानदार ऊर्जा दिखाई। आउटफील्ड में दौड़कर कई महत्वपूर्ण कैच पकड़े, जिनमें फाइनल का एक शानदार कैच भी शामिल था जिसने मैच का रुख और स्पष्ट कर दिया। बिना विकेटकीपर के दस्तानों के आउटफील्ड में ऐसे कैच लेना आसान नहीं होता, लेकिन इशान की फुर्ती और एथलेटिक फील्डिंग टीम के लिए लगातार काम आई।
इस पूरी कहानी का एक भावनात्मक पहलू भी है। फाइनल से ठीक पहले इशान किशन की जिंदगी में एक निजी दुख आया था—उनकी कज़िन बहन और उनके पति की दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बावजूद वह मैदान में उतरे, टीम के लिए खेले और जीत के बाद ट्रॉफी को उन्हीं की स्मृति को समर्पित किया। क्रिकेट कभी-कभी खिलाड़ी से सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि असाधारण मानसिक शक्ति भी मांगता है।
टी20 क्रिकेट का स्वभाव ही अलग है। यहाँ बल्लेबाज़ से उम्मीद होती है कि वह टिककर खेलने से ज्यादा मैच का रुख बदल दे। इशान किशन उसी स्कूल के खिलाड़ी हैं—जब उनका दिन होता है तो गेंदबाज़ों के लिए मैदान छोटा पड़ जाता है।
इस विश्वकप में कई सितारे चमके—Sanju Samson की शानदार पारियां, Jasprit Bumrah की घातक गेंदबाज़ी और कई अन्य खिलाड़ियों का योगदान। लेकिन इन सबके बीच इशान किशन की कहानी अलग रही—एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी जो बार-बार टीम में जगह के लिए लड़ता है, और मौका मिलने पर यह साबित कर देता है कि वह सिर्फ खेलने के लिए नहीं, मैच जिताने के लिए बना है।
और शायद यही वजह है कि भारतीय क्रिकेट में इशान किशन की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है—असल में यह तो अभी शुरू ही हुई है।
(ज्ञान प्रताप वाजपेयी)



