Oil Crisis: हालांकि लंबी शिपिंग दूरी के कारण आपूर्ति में कुछ समय लग सकता है, किन्तु भारत ने दो मित्र देशों से बात की है और अब तेल का आयात उनसे किया जायेगा..
भारत में प्राकृतिक गैस और एलपीजी की मौजूदा कमी को लेकर सरकार ने आश्वासन दिया है कि यह संकट अल्पकालिक है और जल्द ही नए स्रोतों से आयात शुरू होने पर स्थिति सामान्य हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और नॉर्वे से गैस आयात अब आर्थिक रूप से संभव हो गया है, हालांकि लंबी शिपिंग दूरी के कारण आपूर्ति में कुछ समय लग सकता है।
घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में 10% की वृद्धि की गई है। सरकार ने उद्योगों की तुलना में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। 5 मार्च को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सभी रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम उपयोग एलपीजी उत्पादन के लिए करें।
आयात के विकल्प और मूल्य
अधिकारियों के अनुसार, भारत अब तक क़तर से गैस आयात करता रहा है, जिसकी कीमत 6–8 डॉलर प्रति MMBtu (मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) थी। लेकिन मौजूदा हालात में कीमत 15 डॉलर प्रति MMBtu तक पहुँच गई है। जब कीमत 10 डॉलर से ऊपर जाती है, तब नॉर्वे और अमेरिका से गैस आयात करना भी व्यावहारिक हो जाता है, भले ही दूरी अधिक हो।
शिपिंग उद्योग के अनुमान के अनुसार, अमेरिका या नॉर्वे से गैस लाने में लगभग दो महीने का समय लगता है। इसका मतलब है कि आदेश देने और डिलीवरी मिलने के बीच एक अंतराल रहेगा।
छोटे समय की समस्या – लंंबे समय का समाधान
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि एलपीजी और एलएनजी दोनों की आपूर्ति को विविधीकृत किया गया है और नए कार्गो पहले से ही आ रहे हैं। हालांकि कुछ भौगोलिक क्षेत्रों से आपूर्ति में समय लगता है, लेकिन दीर्घकालिक समस्या नहीं होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि “गैस की कमी स्थायी नहीं है, लेकिन कुछ समय तक कठिनाई रहेगी।”
घरेलू उपभोक्ता सबसे पहले
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सबसे बड़ी प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं, जैसे होटल और रेस्तरां, को लेकर भी चिंता जताई गई है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तीन तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के कार्यकारी निदेशकों की एक समिति बनाई है। यह समिति रेस्तरां मालिकों और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की मांगों की समीक्षा करेगी और जहाँ संभव होगा, उन्हें राहत प्रदान करेगी।
बिज़नेस की दुनिया में चुनौतियाँ
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी ने होटल और रेस्तरां उद्योग को प्रभावित किया है। कई प्रतिष्ठानों ने शिकायत की है कि गैस की कमी से उनके संचालन पर असर पड़ रहा है।
सरकारी समिति ने कहा है कि वह रेस्तरां मालिकों से संपर्क में है और सभी वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर मामले का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा।
लंबे समय की बात
भारत में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार नए विकल्प तलाश रही है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात स्रोतों को विविधीकृत करना इस रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका और नॉर्वे से आयात शुरू होने पर भारत की निर्भरता क़तर पर कम होगी और आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट भारत को ऊर्जा नीति में दीर्घकालिक सुधार करने का अवसर भी देगा। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, वैकल्पिक स्रोतों का विकास करना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना भविष्य में ऐसे संकटों से बचने में मदद करेगा।
भारत में गैस की मौजूदा कमी अस्थायी है। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाया है और नए आयात स्रोतों को सक्रिय किया है। हालांकि लंबी दूरी से आयात में समय लगेगा, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और वाणिज्यिक क्षेत्र को भी राहत देने की कोशिश होगी।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह कदम न केवल मौजूदा संकट को हल करेगा बल्कि भविष्य में स्थिर और विविधीकृत आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा।
(त्रिपाठी पारिजात)



