Speak Sanskrit: देवभाषा संस्कृत के पठन-पाठन के प्रयासों के साथ अब संस्कृत शिक्षण की कार्यशाला भी प्रारंभ की गई है बिहार संस्कृत संजीवन समाज पटना एवं आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के मंच से..
बिहार संस्कृत संजीवन समाज पटना एवं आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अंतर्गत भगवती महासरस्वती को समर्पित दशदिवसात्मक अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्कृत संभाषण शिविर का शुभारम्भ हुआ, जो 21 जनवरी तक नियमित संचालित रहकर सर्वत्र संस्कृत के संकल्प को साकार करेगा.
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अध्यक्ष एवं बिहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव डॉ. मुकेश कुमार ओझा ने संस्कृत को सनातन संस्कृति का पर्याय और वसंत पंचमी को लोकमंगल का ज्ञान का पर्व बताया. उन्होंने कहा कि सरस्वती ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं और धन-वैभव से ऊपर ज्ञान का सर्वोच्च स्थान है. इसलिए मानव अपनी पूर्णता के लिए माँ सरस्वती की प्रार्थना करता है.
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार ओझा ने कहा संस्कृत विश्व भाषा के रूप में प्रतिष्ठित रही. इसका प्रमाण आदिकाल में संस्कृत में रचे मानव कल्याण से जुडे वेद, उपनिषद, पुराण आदि सदग्रन्थ हैं, जो ज्ञान का भण्डार हैं, और उनके गूढार्थ के लिए संस्कृत का पठन-पाठन आवश्यक है.
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के प्रधान संरक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह, सदस्य (प्रशासनिक)- उत्तर प्रदेश राज्य लोकसेवा न्यायाधिकरण ने संस्कृत प्रशिसंभाषणक्षण एवं शिविर का उद्घाटन करते हुए सरस्वती को ज्ञान की देवी बताया.
डॉक्टर सिंह ने कहा, त्यौहार प्रधान सनातन संस्कृति में वसन्त पंचमी माँ सरस्वती की आराधना का पर्व है, जो विद्या, ज्ञान एवं कला की देवी मां वीणावादिनी की समर्पित है. उन्होंने कहा कि प्रकृति की नवीनता से जुडा होने वसन्त खुशहाली और प्रगति का पर्व भी है.
कार्यक्रम में प्रधान संरक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन ज्ञान परम्परा संस्कृत से ओतप्रोत है, जिसे जानने-समझने के लिए सर्वत्र संस्कृत के संकल्प को साकार करना जरूरी है.
मुख्य अतिथि-प्रो रागिनी वर्मा ने संस्कृत प्रशिक्षण एवं संभाषण शिविर की निरंतरता को माँ सरस्वती की आराधना और ज्ञान के प्रसार में सहायक बताया. उन्होंने कहा, आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के शिविरों द्वारा सरस्वती पूजा आराधना की सतत प्रार्थना जारी है.
मुख्य वक्ता डा. जंगबहादुरगंज पाण्डेय ने सरस्वती पूजा और वसंत पर्व पर प्रकाश डाला. विशिष्ट अतिथि -डा अनिल कुमार चौबे ने संस्कृत गीत से माँ सरस्वती की आराधना की. डॉ दीप्ति कुमारी, उग्र नारायण झा, डॉ. सुशील कुमार, अदिति चोला, मुरलीधर शुक्ल, तारा विश्वकर्मा, डॉ. रागिनी कुमारी, डॉ. अंशु शुक्ला, डॉ. मधु कुमारी, सुजाता घोष, राहुल कुमार, महेश मिश्र, श्रद्धा कुमारी सहित संस्कृत साधकों ने विचार व्यक्त किये.
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीरा कुमारी ने और ऐक्य मंत्र तारा विश्वकर्मा ने प्रस्तुत किया.



