पटना १९ फरवरी। विहार संस्कृत संजीवन समाज एवं सर्वत्र संस्कृतम् की ओर से आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अन्तर्गत अन्तर्जालीय रामकृष्ण परमहंस स्मृति संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर में रामकृष्ण परमहंस की जयंती समारोह का का आयोजन किया गया।
अभियान के प्रधान संरक्षक एवं सदस्य (प्रशासनिक) राज्य लोक सेवा अधिकरण उत्तर प्रदेश डा अनिल कुमार सिंह ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस आध्यात्मिक शक्ति को व्यवहार रुप देने वाले प्रथम संत थे।वे मां काली से निरन्तर संवाद करते थे। उन्होंने अपने जिज्ञासु शिष्य स्वामी विवेकानंद को भी ईश्वर से साक्षात्कार कराये।
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस मानव सेवा ही शिव सेवा मानते थे।वे अद्वैतवाद सिद्धांत के प्रबल समर्थक थे।
विशिष्ट अतिथि डॉ अनिल कुमार चौबे एवं डॉ अवन्तिका कुमारी ने कहा कि वे सनातन धर्म के पुरोधा थे।
डॉ दीप्ति कुमारी ने कहा कि उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्षा डॉ लीना चौहान,तारा विश्वकर्मा,बीजेन्द्र सिंह, डॉ नीरा कुमारी, डॉ रागनी कुमारी, मुरलीधर शुक्ल, विश्वजीत रुद्रपाल, विकास कुमार, गरिमा मिश्रा, हर्षिता शर्मा, वन्दना पटेरिया, विमलेश पाण्डेय आदि ने भी रामकृष्ण परमहंस के विषय में जानकारी दी।
विद्वान वक्ताओं ने सुधि श्रोताओं से परमपूज्य संत श्री रामकृष्ण परमहन्स के मार्गदर्शन में जीवन व्यतीत करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के समाहार के अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन डॉ लीना चौहान एवं ऐक्य मन्त्र डॉ नीरा कुमारी ने प्रस्तुत किया।



