पटना २२फरवरी। विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना एवं सर्वत्र संस्कृतं की ओर से आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अन्तर्गत रामकृष्ण परमहंस स्मृति अन्तर्जालीय अन्तर्राष्ट्रीय दशदिवसात्मक संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर का समापन समारोह संस्कृतमय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
यह निरन्तर ४१ वां शिविर का समापन समारोह था, जिसमें सभी वक्ताओं तथा शिविर के सभी सदस्यों ने संस्कृत भाषा में अपने विचार व्यक्त किए।
अपने उद्घाटन उद्बोधन में अभियान के प्रधान संरक्षक एवं सदस्य (प्रशासनिक)लोक सेवा न्यायाधिकरण उत्तर प्रदेश डा अनिल कुमार सिंह ने कहा कि विश्व प्रथम संत थे, जिन्होंने आत्मानुभव से ईश्वर का साक्षात्कारकर अपने जिज्ञासु शिष्य विवेकानंद को भी साक्षात्कार कराये।
यदि साधना सम्यक् हो, तो भगवत् प्राप्ति संभव है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो सूर्य कांत त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भाषा नैतिक मूल्यों की संवाहिका है। संस्कृत भाषा के अध्ययन से विश्व की सम्पूर्ण समस्या समाप्त हो सकती है।
मुख्य वक्ता प्रो रागिनी वर्मा (राष्ट्रीय संयोजिका, अभियान) ने कहा कि विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य किया जाए।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि संस्कृत भाषा मानवता का संदेश देती है। इस भाषा में विचारों को व्यक्त करना गर्व का विषय है।
इस अवसर पर विशिष्टातिथि डॉ अनिल कुमार चौबे,महंथ केशव संस्कृत महाविद्यालय की डा नीरा कुमारी,एम एल टी महाविद्यालय सहरसा की संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ दीप्ति कुमारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उग्र नारायण झा , राष्ट्रीय उपाध्यक्षा डॉ लीना चौहान, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय पटना की संस्कृत शिक्षिका डॉ रागनी कुमारी, बांकीपुर बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के संस्कृत शिक्षक मुरलीधर शुक्ल, डॉ विश्वजीत रुद्रपाल,असम, वन्दना पटेरिया मध्य प्रदेश,तारा विश्वकर्मा मध्य प्रदेश, हर्षिता कुमारी, कुमारी गरिमा मिश्रा, विकास कुमार, डॉ मुकेश पण्डित,(बिहार),बीजेन्द्र सिंह दिल्ली आदि वक्ताओं ने भी रामकृष्ण परमहंस के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला एवम् उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर रामकृष्ण परमहंस संस्कृत सम्भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें डॉ दीप्ति कुमारी एवं कुमारी गरिमा मिश्रा को प्रथम पुरस्कार, डॉ विश्वजीत रुद्रपाल एवं डॉ रागनी कुमारी को द्वितीय पुरस्कार,वन्दना पटेरिया,तारा विश्वकर्मा, मुरलीधर शुक्ला को तृतीय पुरस्कार तथा बीजेन्द्र सिंह, हर्षिता कुमारी, डॉ मुकेश पण्डित, विकास कुमार को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार उग्र नारायण झा तथा आगत अतिथियों का स्वागत डा लीना चौहान ने किया।



