Saturday, August 30, 2025
Google search engine
Homeसाहित्यLitreature:लगन तुमसे लगा बैठे(Story by Anju)

Litreature:लगन तुमसे लगा बैठे(Story by Anju)

पता है ना राधा और कृष्ण दो नहीं “राधा और कृष्ण ये दो नाम नही, दो आत्मा भी नही, एक ही अस्तित्व हैं.

लगन तुमसे लगा बैठे(कहानी)

पता है ना राधा और कृष्ण दो नहीं
“राधा और कृष्ण ये दो नाम नही, दो आत्मा भी नही, एक ही अस्तित्व हैं.

बचपन से कन्हैय्या की सेवा करती आ रही हूँ जो प्रेम भाव उनके लिये हृदय में है वही तुम्हारे लिये महसूस करती हूँ मैं, पीयूष
जानती हूँ तुम सारे जगत से प्रेम करते हो.तुम्हारे जीवन का उद्देश्य बहुत विशाल है.

तुम तथागत होना चाहते हो.. है ना?
पर क्या ये अन्याय नही?  क्यूँ सदैव तुम्हारे हृदय की विशालता के समक्ष यशोधरा और राधा का प्रेम गौण हो जाता है?
क्यूँ तुम हर जन्म में उसे और उसके निश्छल प्रेम को काली अँधेरी रात में त्याग कर चुपचाप निकल जाते हो ?

मैं नही जानती किसी द्वारिकाधीश को जिसकी सोलह हज़ार एक सौ आठ रानियाँ हैं| मैं उस कृष्ण को जानती हूँ जो सिर्फ और सिर्फ राधा का है..अपनी प्रिया का है!

क्या किसी जन्म में तुम द्वारिकाधीश न हो कर सिर्फ राधा के कृष्ण बन कर नही रह सकते?

पूछ सकती हूँ तुमसे कि मेरे भाग्य में इतना विरह और दुख क्यूँ लिख दिया तुमने कृष्णा? किसी का हृदय तोड़ कर सत्य के पथ पर कैसे चला जा सकता है?

क्यूँ तुम हर जन्म में बुद्ध बनकर जीना चाहते हो?माना कि जगत कल्याण का संकल्प आसान नही और उस पर चलना उससे भी कठिन है पर सिर्फ एक बार प्रेम पथ का अनुसरण करके देखो तो ज्ञात होगा तुम्हें कि कितना मुश्किल है इस पर चलना और जीवन भर समर्पित रहना.

जबकि ये पता हो कि दूसरी तरफ कोई संवेदना शेष नही रह गई है.ये जानते हुए भी प्रेम भाव के पुष्प जीवन पर्यंत अर्पित करने वाला हृदय क्या तुम्हारे प्रेम का एकल अधिकारी नही हो सकता?

क्यूँ तुम हर जन्म में प्रेम की बाँसुरी बजाकर मदहोश कर देते हो और तत्पश्चात बिलखता छोड़ कर आगे बढ़ जाते हो?

क्या यही प्रेम है? कहाँ और कौन से वेद और पुराणों में ये लिखा है कि प्रेम की पूर्णता सिर्फ विरह में है? क्या मिल कर प्रेम को पूर्ण नही किया जा सकता?

क्यूँ हर जन्म में ऐसा करते हो पीयूष तुम? यदि मैं ऐसा सदैव तुम्हारे साथ करती तो कैसा लगता तुम्हें?

मुझे शिव-पार्वती का प्रेम भी ज्ञात है.पार्वती उन्हें पा लेना चाहती थीं.उद्दाम प्रेम का नाम दिया तुमने उनके प्रेम को तो क्या बुरा है उद्दाम प्रेम?

प्रेम में सिर्फ त्याग ही नही होना चाहिये समर्पण भी ज़रूरी है तभी शिव ने पार्वती से विवाह किया था और सिर्फ उसके होकर रहे.

क्या व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान प्रेम का परित्याग ही है? क्यूँ हर जन्म में मेरी इतनी परिक्षा ले रहे हो कृष्णा? क्या मेरी तड़प और आँसू देखकर तुम्हारा पाषाण हृदय नही पिघलता बोलो पीयूष? क्या प्रिया को हर जन्म में तुम्हें पा कर भी खो देना होगा?

तुमने बहुत अवतार लिये और जगत-कल्याण किया है.क्या एक जन्म अपनी राधा…अपनी प्रिया के साथ नही गुज़ार सकते तुम पीयूष? क्या तुम्हें मेरा प्रेम दिखाई नही देता पीयूष?

आखिर क्यूँ रौंद दिया अपने ही श्री चरणों से मेरे कोमल हृदयरूपी प्रेम पुष्प को…बोलो? अब कुछ कहते क्यूँ नही? क्या मेरे प्रेम का कर्ज़ तुम कभी उतार पाओगे जो जनम-जनम से चढ़ा है तुम पर पीयूष.

इस बार तुम ऐसा नही कर सकते.मेरे हिस्से का प्रेम तुम्हें इस बार देना ही होगा.
ईश्वर भी कहते हैं कि प्यार भरा दिल कभी नही तोड़ना चाहिये.

क्या अब भी अपनी राधा…. अपनी प्रिया को अकेला छोड़ जाओगे पीयूष एक और जन्म तड़पने के लिये……बोलो…….बोलो
ना पीयूष…पीयूष…”

कट….कट….कट…..एक्सीलेंट शॉट प्रिया जी….क्या कमाल की परफॉर्मेंस दी है आपने!!इतना लम्बा डायलॉग एक ही बार में कह डाला वो भी इतनी भावनाओं के साथ ..कमाल है पर कुछ जगह आपने कृष्णा की जगह पीयूष का सम्बोधन कर दिया.मैं समझता हूँ ऐसी छोटी-मोटी मिस्टेक तो हो जाती हैं. डबिंग के वक्त इस मिस्टेक को सुधार लिया जायेगा.

पीयूष जी आपके चेहरे के हाव-भाव गज़ब के थे प्रिया जी की डायलॉग डिलीवरी के दौरान. बहुत सुंदर अभिनय रहा आपका पीयूष जी.

पीयूष धीरे-से मुस्कुराया|
चलो चलो आज पैकअप का टाईम हो गया…कल सुबह पाँच बजे फिल्म का अंतिम दृश्य का शॉट लेगें.

पीयूष सिगरेट के कश लेते हुए प्रिया की तरफ देख रहा था| प्रिया की आँखों में एक सवाल था “क्या साथ यहीं तक था पीयूष? क्या इस जन्म में भी अकेला छोड़ दोगे मुझे? बोलो पीयूष …बोलो ना…..”मैं तुम्हें ऐसा नही करने दूँगी इस बार भी हर बार की तरह…तुम्हें मेरे प्रेम का कर्ज़ इस बार चुकाना ही होगा……

पीयूष की आँखें प्रिया के मासूम चेहरे पर ठहर गई थीं…..
बैक ग्राउंड में गीत बज रहा था -“साँवरिया तोसे नैना लागे कुछ नही भाये मोहे दरस बिना तोरे”..

.(अंजू डोकानिया)

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments