Success Story: 14 बार कॉलेज लेक्चरर परीक्षा में रहे असफल, फिर भी नहीं मानी हार -आबूरोड के दुर्गेश ने फिर हासिल की प्रदेश में 8वीं रैंक..
राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड निवासी दुर्गेशकुमार खारवाल ने 14 असफलताओं के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और कॉलेज लेक्चरर परीक्षा 2023 में प्रदेश में 8वीं रैंक हासिल कर एक मिसाल पेश की है। सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर और सेल्फ स्टडी के दम पर मिली इस सफलता से परिवार और पूरे जिले में खुशी की लहर है।
14 असफलताओं के बाद भी जारी रखा संघर्ष
जीवन में असफलताएं कई बार मिलती हैं, लेकिन जो व्यक्ति उनसे घबराए बिना लगातार प्रयास करता रहता है, सफलता अंततः उसी के कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सिरोही जिले के आबूरोड शहर के केसरगंज निवासी दुर्गेशकुमार खारवाल ने।
कॉलेज लेक्चरर परीक्षा 2023 के हाल ही में जारी परिणामों में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में 8वीं रैंक हासिल की।
इससे पहले उन्होंने स्कूल शिक्षक सहित विभिन्न सरकारी भर्तियों की 14 परीक्षाएं दीं, लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी। बार-बार चयन न होने के बावजूद उन्होंने निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया और लगातार तैयारी जारी रखी। आखिरकार दूसरे प्रयास में ही कॉलेज लेक्चरर परीक्षा में उनका चयन हो गया। परिणाम आते ही परिवार और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल बन गया।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई, फिर सेल्फ स्टडी से सफलता
मीडिया से बातचीत में दुर्गेश कुमार ने बताया कि वे एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा आबूरोड के सरकारी विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी से एमकॉम और बीएड की डिग्री प्राप्त की।
वर्ष 2016 में नेट परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने सेल्फ स्टडी के माध्यम से स्कूल शिक्षक, पटवारी, ग्राम सेवक, जूनियर अकाउंटेंट सहित कई सरकारी भर्तियों की तैयारी की, लेकिन 14 बार असफलता मिली।
वर्ष 2020 में स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा में वे मात्र 1 अंक से वेटिंग लिस्ट में रह गए थे। इसके बाद उन्होंने अंतिम बार पूरी प्रतिबद्धता के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी करने का निश्चय किया। वर्ष 2023 में निकली कॉलेज लेक्चरर भर्ती परीक्षा में उन्होंने कॉमर्स (एबीएसटी) विषय से परीक्षा दी और हाल ही में घोषित परिणाम में प्रदेश मेरिट में 8वीं रैंक प्राप्त की।
छात्रों को दिया खास संदेश
सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को मार्गदर्शन देते हुए दुर्गेश ने कहा कि अभ्यर्थियों को वन वीक सीरीज या केवल टेस्ट सीरीज पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने सलाह दी कि:
विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम की मूल पुस्तकों से तैयारी करें।
रेफरेंस बुक्स का अध्ययन करें।
शिक्षकों से अपने डाउट क्लियर करें।
चयनित अभ्यर्थियों से मार्गदर्शन लें।
दुर्गेश ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर परिश्रम, आत्म-अनुशासन और परिवार के अटूट सहयोग को दिया। उनकी यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं।
(सुमन सुरखाब)



