Monday, March 9, 2026
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UPSC 2025: बुलंदशहर की शिखा सिंह – चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की बेटी बनी IAS अधिकारी – हासिल की 113वीं रैंक

UPSC 2025:  आप भी सफलता का बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं जिस तरह यूपी के छोटे शहर के एक छोटे से घर की बेटी ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा उत्तीर्ण करके अपने नाम के साथ आईएएस अधिकारी का तमगा जोड़ लि

UPSC 2025:  आप भी सफलता का बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं जिस तरह यूपी के छोटे शहर के एक छोटे से घर की बेटी ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा उत्तीर्ण करके अपने नाम के साथ आईएएस अधिकारी का तमगा जोड़ लिया है..

बुलंदशहर जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो यह साबित करती है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंज़िल मुश्किल नहीं होती। सियाना तहसील क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रेमचंद की बेटी शिखा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 113वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है।

परिवार का संघर्ष और सहयोग

शिखा के पिता स्कूल में दफ्तरी हैं, जबकि उनकी मां देवकी पढ़ी-लिखी नहीं हैं। इसके बावजूद माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और बच्चों को घर के कामों से दूर रखा ताकि उनका ध्यान केवल पढ़ाई पर रहे।
सरकारी स्कूल से IAS तक का सफर

शिखा की शुरुआती पढ़ाई और 12वीं तक की शिक्षा सरकारी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने डिग्री कॉलेज से B.Sc (Biology) की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद उनका रुझान UPSC की ओर हुआ। जब उन्होंने दिल्ली जाकर कोचिंग करने की इच्छा जताई, तो पिता ने बिना किसी संकोच के उनका दाखिला दिल्ली की कोचिंग में करा दिया।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता

पहले प्रयास में शिखा इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन चयन नहीं हो सका। उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और दूसरे प्रयास में उन्हें सुधारा। परिणामस्वरूप, UPSC 2025 में उन्होंने 113वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया।

पढ़ा-लिखा परिवार

शिखा चार बहनों और एक भाई के परिवार से आती हैं। उनके बड़े भाई वेलनेस कोच हैं। दो बड़ी बहनें बिहार और बहराइच में शिक्षक हैं। छोटी बहन भी UPSC की तैयारी कर रही है। इस तरह परिवार में शिक्षा को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

बुलंदशहर में खुशी की लहर

जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, बुलंदशहर में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदार और पड़ोसी प्रेमचंद के परिवार को बधाई देने पहुंचे। शिखा फिलहाल दिल्ली में हैं और कुछ दिनों में बुलंदशहर लौटेंगी, जहां समाज के लोग उनके भव्य स्वागत की तैयारी कर रहे हैं।

सफलता की यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।

(अर्चना शैरी )

 

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