Wednesday, February 4, 2026
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Higher Education: महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल के रूप में  विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक (VBSAB) की सोच

Higher Education: विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक: उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम..

Higher Education: विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक (VBSAB): उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम..

पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने यह समझा है कि देश के भविष्य को मजबूत बनाने में उच्च शिक्षा की भूमिका बेहद अहम है। आज के बदलते समय और समाज की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाना जरूरी हो गया है। इसी सोच के तहत विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक (VBSAB) को एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल के रूप में पेश किया गया है।

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करना है। इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की मान्यता, नियमन और प्रत्यायन (Accreditation) की प्रक्रिया में बड़े सुधार प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता सुधरे और ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक अच्छी शिक्षा पहुंच सके।

स्वीकृति प्रक्रिया को आसान बनाना

वर्तमान समय में नए कॉलेज या विश्वविद्यालय खोलने के लिए स्वीकृति लेना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। कई बार संस्थानों को लंबी सरकारी प्रक्रियाओं और कागजी अड़चनों का सामना करना पड़ता है, जिससे शिक्षा के नए प्रयोग और नवाचार रुक जाते हैं।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक इस स्थिति को बदलने की कोशिश करता है। इसके तहत एक सरल, तेज और पारदर्शी स्वीकृति प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है, जिससे नए और मौजूदा संस्थानों को समय पर निर्णय मिल सके।

इस विधेयक में शिक्षाविदों, शिक्षा प्रशासकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों की समितियां बनाने की बात कही गई है, जो संस्थानों का मूल्यांकन करेंगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय न सिर्फ अकादमिक रूप से मजबूत हों, बल्कि छात्रों को रोजगार से जुड़ी जरूरी स्किल्स भी सिखाएं। यह व्यवस्था शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद करेगी।

नियमन को अधिक प्रभावी बनाना

उच्च शिक्षा के मौजूदा नियामक ढांचे पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वह ज्यादा जटिल और कम प्रभावी है। नए विधेयक में इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया गया है।

वीबीएसएबी के तहत एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है, जो देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों की निगरानी करेगा। यह प्राधिकरण शिक्षा की गुणवत्ता, मानकों के पालन और संस्थानों की कार्यप्रणाली पर नजर रखेगा।

सबसे खास बात यह है कि इस नए ढांचे में संस्थानों को पर्याप्त स्वायत्तता देने पर जोर दिया गया है, ताकि वे बिना अनावश्यक सरकारी हस्तक्षेप के नवाचार कर सकें और आगे बढ़ सकें। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

प्रत्यायन व्यवस्था को मजबूत करना

प्रत्यायन यानी मान्यता की प्रक्रिया शिक्षा की गुणवत्ता तय करने में बहुत महत्वपूर्ण होती है। अब तक यह प्रक्रिया अक्सर कठिन, लंबी और अस्पष्ट मानी जाती रही है।

नया विधेयक एक ऐसी प्रत्यायन प्रणाली लाने की बात करता है, जिसमें केवल आंकड़ों पर नहीं, बल्कि शिक्षण गुणवत्ता, शोध कार्य, छात्रों के सीखने के स्तर और समाज से जुड़ाव जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

स्तर आधारित प्रत्यायन प्रणाली से संस्थानों को अपनी विशेषताओं और मजबूती को सामने रखने का मौका मिलेगा। इससे न सिर्फ देश के भीतर शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि भारतीय संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी।

यह नई व्यवस्था संस्थानों को लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करेगी और उनमें आत्म-मूल्यांकन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करेगी।

उच्च शिक्षा में नए युग की शुरुआत

कुल मिलाकर, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम है। यह विधेयक स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने, नियमन को प्रभावी करने और प्रत्यायन व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है।

यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की प्रतिबद्धता दिखाती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि शिक्षा सभी तक पहुंचे और लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।

आने वाले समय में यह विधेयक शिक्षकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और नवाचार करने वालों की एक नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही, यह भारत को वैश्विक उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

यह विधेयक भारतीय शिक्षा में एक ऐसे नए दौर की शुरुआत का संकेत है, जहां गुणवत्ता, प्रासंगिकता और समावेशिता मिलकर एक मजबूत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था तैयार करेंगी।

-प्रस्तुति:  डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदी (समूह निदेशक एवं प्रोफेसर, ऑक्सफोर्ड एवं इंदौर इंटरनेशनल कॉलेज समूह, इंदौर (म.प्र.) & राज्य सरकार द्वारा नामित सदस्य – अवंतिका विश्वविद्यालय, उज्जैन)

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