Wednesday, March 4, 2026
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BCCI के पास विश्वकप विजेताओं को देने के लिये 1 लाख नहीं थे तब लता जी काम आईं

BCCI के पास उस समय देश के विश्वकप विजेता खिलाड़ियों को किया गया वादा पूरा करने के पैसे नहीं थे - तब सुरकोकिला लता मंगेशकर ने बचाई 1983 की वर्ल्ड कप टीम की इज़्ज़त..

BCCI के पास उस समय देश के विश्वकप विजेता खिलाड़ियों को किया गया वादा पूरा करने के पैसे नहीं थे – तब सुरकोकिला लता मंगेशकर ने बचाई 1983 की वर्ल्ड कप टीम की इज़्ज़त..

आज भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड माना जाता है। IPL से लेकर ब्रॉडकास्ट राइट्स और स्पॉन्सरशिप तक, BCCI के पास हजारों करोड़ की कमाई है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यही बोर्ड अपने वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ियों को 1 लाख रुपये का वादा पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहा था।

यह कहानी है 1983 के उस ऐतिहासिक विश्व कप की, जिसने भारतीय क्रिकेट की तक़दीर बदल दी।

जब जीत के बाद भी बोर्ड खाली था

25 जून 1983 को कपिल देव की कप्तानी में भारत ने दो बार की विश्व विजेता वेस्टइंडीज़ को हराकर इतिहास रच दिया। यह सिर्फ एक मैच नहीं था, यह भारतीय क्रिकेट का पुनर्जन्म था।

इस ऐतिहासिक जीत के बाद तत्कालीन BCCI अध्यक्ष एन.के.पी. साल्वे ने प्रत्येक खिलाड़ी को 1 लाख रुपये का बोनस देने की घोषणा कर दी। लेकिन घोषणा के पीछे एक कड़वी सच्चाई छुपी थी—BCCI के पास इतना पैसा था ही नहीं।

उस दौर में खिलाड़ियों को जो सुविधाएँ मिलती थीं, वे आज के दौर की कल्पना से भी बाहर हैं।

मैच फीस – सिर्फ ₹1500

डेली अलाउंस – ₹200

वह भी सिर्फ तीन दिनों का (मैच से पहले, मैच वाले दिन और अगले दिन)

यानि एक इंटरनेशनल मैच खेलने पर कुल मिलाकर खिलाड़ी को केवल ₹2100 मिलते थे।

ऐसी स्थिति में हर खिलाड़ी को 1 लाख रुपये देने का ऐलान बोर्ड के लिए एक बहुत बड़ा वित्तीय संकट बन गया।

संकट में आगे आए राज सिंह डूंगरपुर

एन.के.पी. साल्वे के सबसे भरोसेमंद सहयोगी राज सिंह डूंगरपुर थे – डूंगरपुर रियासत के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले और स्वयं एक फर्स्ट क्लास क्रिकेटर।

साल्वे ने उन्हें इस मुश्किल काम की जिम्मेदारी दी—किसी भी तरह खिलाड़ियों के लिए बोनस की रकम का इंतज़ाम करना था। डूंगरपुर ने अपने एक मित्र से संपर्क किया, जिनका संबंध भारत की स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर से था।

जब लता जी बनीं टीम इंडिया की रक्षक

लता मंगेशकर क्रिकेट की बड़ी प्रशंसक थीं। उन्हें पूरी स्थिति बताई गई और टीम इंडिया के लिए एक लाइव कॉन्सर्ट करने का अनुरोध किया गया। लता जी ने बिना किसी हिचक के तुरंत हामी भर दी।

दिल्ली में एक विशाल संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुछ लोगों के अनुसार यह जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुआ, जबकि कुछ इसे इंदिरा गांधी स्टेडियम बताते हैं। जगह को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन परिणाम ऐतिहासिक था।

यह कॉन्सर्ट करीब दो घंटे चला और इस दौरान टीम इंडिया के खिलाड़ी भी एक गीत में लता जी के साथ कोरस में शामिल हुए।

21 लाख की कमाई और खिलाड़ियों का सम्मान

इस एकमात्र कॉन्सर्ट से लगभग ₹21 लाख की राशि एकत्र हुई जिसमें से ₹15 लाख BCCI को दिए गए। ₹14 लाख खिलाड़ियों में बाँटे गए। ₹1 लाख तत्कालीन टीम मैनेजर पी.आर. मान सिंह को मिले।शेष ₹6 लाख स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सौंपे गए।

यानी, लता मंगेशकर के कारण ही BCCI अपना वादा निभा सका और विश्व विजेता खिलाड़ियों को उनका सम्मान मिल पाया।

BCCI ने किया आजीवन सम्मान लता जी का

BCCI ने लता जी के इस उपकार को कभी नहीं भुलाया। 2007 में जब भारत ने पहली बार टी20 वर्ल्ड कप जीता, तो मुंबई में टीम की ओपन बस परेड के दौरान पेडर रोड स्थित लता जी के घर के सामने कुछ क्षणों के लिए जुलूस रोका गया। पूरी टीम ने वहां रुककर उन्हें सम्मान दिया और लता जी ने भी खिलाड़ियों का अभिनंदन किया।

इसके अलावा, BCCI ने देशभर में होने वाले हर टीम इंडिया मैच में लता मंगेशकर के लिए दो VIP टिकट आजीवन आरक्षित कर दिए—ताकि वह बिना कोई शुल्क दिए कभी भी भारत का मैच देख सकें। यह व्यवस्था उनके निधन तक जारी रही।

(अज्ञात वीर)

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