Iran: अमेरिका और इजराइल पर गुर्राने वाला ईरान के खामनेई पर गुर्रा रही है ईरान की जनता..क्या अब ईरान का इतिहास कोई नया इतिहास लिखने वाला है?..
जब देश की सड़कों पर युवा उतर आएं, नारे सत्ता के खिलाफ हों और डर की जगह गुस्सा दिखने लगे, तो एक सवाल अपने आप उठता है—क्या सत्ता की नींव कमजोर हो रही है?
आज यही सवाल पूरी दुनिया ईरान को लेकर पूछ रही है। क्या 36 साल से सत्ता में बैठे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई अब कमजोर पड़ रहे हैं? क्या ईरान एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है?
देशभर में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में 3 दर्जन से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस आंदोलन की अगुवाई ईरान के छात्र और GenZ कर रहे हैं, जो खुले तौर पर खामनेई को सत्ता से हटाने की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच ब्रिटेन के अखबार ‘द टाइम्स’ ने एक खुफिया रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया कि 86 वर्षीय खामनेई अपने बेटे मुजतबा और करीब 20 अन्य लोगों के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं। अगर यह सच है, तो यह ईरानी राजनीति में सबसे बड़ा संकेत होगा कि हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।
खामनेई कोई साधारण नेता नहीं हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ, जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी की सत्ता को उखाड़ फेंका गया था। इसके बाद 1981 में वे ईरान के राष्ट्रपति बने और आठ साल तक इस पद पर रहे। इस दौरान इराक ने ईरान पर हमला किया और आठ साल लंबी विनाशकारी जंग हुई। खामनेई ने इस युद्ध के दौरान रणनीतिक फैसले लिए और सक्रिय भूमिका निभाई।
1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद खामनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया। दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम लीडर बनने के लिए उन्हें धार्मिक पद “अयातुल्ला” होना जरूरी था, जो उस समय वे नहीं थे। इसके बावजूद कानून में संशोधन कर उन्हें सर्वोच्च नेता बना दिया गया। तब से ईरान की असली सत्ता उनके हाथों में है, भले ही देश में एक निर्वाचित राष्ट्रपति मौजूद हो।
खामनेई का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। उन पर विरोध को दबाने, पत्रकारों और लेखकों पर सख्ती, सेंसरशिप, मानवाधिकार उल्लंघन और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगे हैं। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों को बेरहमी से दबाने में भी उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खामनेई हमेशा अमेरिका और पश्चिम के विरोधी रहे हैं। उनके कार्यकाल में ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के आरोप लगे, जिससे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे, जो आज भी ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी हैं। 2013 में रॉयटर्स ने दावा किया कि खामनेई का एक 95 अरब डॉलर का व्यापारिक साम्राज्य भी है, जिसने उनकी विवादित छवि को और बढ़ा दिया।
अब सवाल यह है—क्या इतने लंबे समय से सत्ता में बैठे खामनेई इस युवा आक्रोश को संभाल पाएंगे? क्या GenZ का गुस्सा केवल सड़कों तक सीमित रहेगा, या ईरान की सत्ता की इमारत को हिला देगा?



