Chhote Sahibjade: लंदन के भारतवंशी अपने देश को नहीं भूले हैं – एक एन्ड्योरेन्स चैलेन्ज को स्वीकार कर भूपिन्दर संधू ने यहां धर्म के लिये प्राणों का उत्सर्ग करने वाले छोटे साहिबज़ादों को श्रद्धा-सुमन अर्पित किये..
लंदन: सेंट जेम्स पार्क की शांत पगडंडियाँ इस हफ्ते एक अनोखी श्रद्धांजलि की गवाह बनीं। माइंडफुलनेस कोच और मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता भुपिन्दर संधू ने लगातार 26 घंटे तक बिना रुके पैदल चलकर छोटे साहिबज़ादों की याद में साहस और विश्वास का संदेश दिया।
श्रद्धांजलि का महत्व
यह Endurance Challenge अर्थात सहनशक्ति की चुनौती का अभियान 10 डाउनिंग स्ट्रीट की छाया में आयोजित हुआ, जिसने लंदन के सबसे परिचित पार्क को बलिदान, दृढ़ता और आस्था का जीवंत स्मारक बना दिया। संधू ने यह वॉक गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे पुत्रों साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह जी (9 वर्ष) और साहिबज़ादा फतेह सिंह जी (6 वर्ष) को समर्पित की। दोनों ने अपने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय शहादत को चुना था और सिख इतिहास में अमर हो गए।
इतिहास और आस्था से जुड़ी वॉक
26 घंटे तक लगातार चलते हुए एडवोकेट संधू ने हर कदम को साहन्य (सहन शक्ति) और सुमिरन (स्मरण) का प्रतीक बनाया। उन्होंने कहा – “सच्चा साहस उम्र या ताक़त से नहीं, बल्कि अपने विश्वास की दृढ़ता से मापा जाता है। लगातार 26 घंटे चलना उनके बलिदान और आशा को सम्मान देने का विनम्र तरीका था।”
इस दौरान कई लोग उनके पास आए और इस वॉक के महत्व के बारे में पूछते रहे। एक व्यक्तिगत प्रयास धीरे-धीरे सामूहिक सीख और प्रभावोत्पादकता का अवसर बन गया। ऑनलाइन समर्थकों ने भी उनकी यात्रा को ट्रैक किया और इसके पीछे की गहरी भावना को सराहा।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का मंच
भुपिंदर संधू की यह वॉक उनके उद्देश्यपूर्ण अभियानों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले वे लंदन से एडिनबर्ग, लंदन से कार्डिफ़ (दो बार) और लंदन से ब्राइटन तक पैदल यात्रा कर चुके हैं। हर लंबी दूरी की यात्रा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भावनात्मक कल्याण पर खुली बातचीत को प्रोत्साहित करने के लिए की गई।
संधू ने हमेशा पैदल चलने को उपचार, संवाद और जुड़ाव का साधन बनाया है। उनके सहन शक्ति वाली चुनौतियों को लोगों और समुदायों को मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने के लिए प्रेरित करते हैं, जहाँ मानसिक क्षमता एवं शारीरिक दृढ़ता एक साथ आती है।
आधुनिक लंदन में साहिबज़ादों की गूँज
इस वॉक ने छोटे साहिबज़ादों की विरासत को किताबों और धार्मिक स्थलों से आगे ले जाकर आधुनिक लंदन की गलियों में जीवंत कर दिया। यह याद दिलाता है कि उन्होंने जिन मूल्यों को अपनाया -साहस, करुणा और अटूट विश्वास – वे आज भी मार्गदर्शक रोशनी बने हुए हैं।
(कल्पेश शाह, लंदन)



