Wednesday, February 4, 2026
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Parakh Saxena writes: बीजेपी को सवर्णों की उतनी ही आवश्यकता है जितनी सवर्णों को बीजेपी की

Parakh Saxena writes:  बंगाल, यूपी और लोकसभा चुनावों की चुनौती है बीजेपी के सामने ऐसे में सवर्णों से पंगा पड़ेगा महंगा उसे..मोदी शाह को स्थिति सम्हालनी होगी वरना सम्हाली न जायेगी..

Parakh Saxena writes: चौथा और सबसे मजबूत विकल्प है कि सवर्ण अपनी पार्टी बनाये जो हिंदुत्व को समर्पित हो और जातीय समानता को भी, साथ ही वह पार्टी आरक्षण को ही खत्म करने का संकल्प ले..पर तब तक बीजेपी चलने दीजिये..

बीजेपी का सबसे बड़ा वोट बैंक हिन्दू है और उन हिन्दुओ मे भी सवर्ण तो लगभग 70% के रेट से वोट डालते है और आज ये सवर्ण नाराज है। नाराजगी जायज भी है, सवर्ण हाशिये पर बैठे है क्योंकि कितना ही पढो सरकारी नौकरी मे स्थिति बेहाल है।

इसलिए सवर्णो ने या शायद कुछ सवर्णों ने अब मन बना लिया है कि बीजेपी को सत्ता से हटाना है। समुद्र मे एक लकड़ी के सहारे तैर रहे है और अब लकड़ी को घमंड दिखा रहे है कि स्पीड बढ़ा वरना छोड़ देंगे। ठीक है इसे डिकोड करते है…

हम बीजेपी को वोट नहीं देंगे, दूसरा विकल्प राहुल गाँधी जो पहले ही बोल चुका है कि आरक्षण 80% कर दूंगा, आशा है आप इतने अज्ञानी तो नहीं हुए है कि किसान से भागकर कसाई के पास जायेंगे। अखिलेश यादव समेत सभी विपक्षीयो का यही स्टैंड है, ऐसे मे आपके पास दूसरा विकल्प है कि वोट ही मत दीजिये।

बीजेपी हारेगी तो ये ही राहुल गाँधी वाली थ्योरी फिर सामने आ जाएगी, राहुल गाँधी तो सच मे आपका खून चूस भी लेगा क्योंकि पहली बात तो ये है कि ये उसकी खानदानी आदत है और दूसरी बात ये कि आपका अपना मानना है कि कांग्रेस अपने वोट बैंक का पूरा ध्यान रखती है।

तीसरा विकल्प है आप मुसलमानो के साथ हाथ मिला ले, पढ़े लिखें और समझदार सवर्ण सहमत नहीं होंगे मगर कई अनपढ़ और बुद्धू भी है, वे मानते है कि ओवैसी एक विकल्प हो सकता है। वो ओवैसी जिसका जय भीम का नारा है और उसकी पूरी राजनीति इस पर है कि बस सवर्ण कट जाए फिर तो पूरा हिन्द उसका होगा।

चौथा और सबसे मजबूत विकल्प है कि सवर्ण अपनी पार्टी बनाये जो हिंदुत्व को समर्पित हो और जातीय समानता को भी, साथ ही वह पार्टी आरक्षण को ही खत्म करने का संकल्प ले। ज़ब तक वह पार्टी खड़ी नहीं होती, बीजेपी चलने दीजिये।

चौथा विकल्प थोड़ा कठिन है लेकिन सबसे उपयुक्त है, ज़ब श्यामा प्रसाद मुखर्जी लखनऊ मे गुरु गोलवलकर जी से मिलने आये थे तब किसने सोचा था कि इस मीटिंग से देश को अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री मिलेंगे, बीजेपी कभी किराये के दफ्तर से चलती थी आज वो दुनिया की सबसे अमीर पार्टी है।

बीजेपी कर सकती है तो आप भी कर सकते है, बीजेपी के पास RSS है, जिसके पास हर गली का डेटा है उसे पता है जेन जी कैसे सोचता है, अल्फा जनरेशन कैसे सोचेगी और बीटा कैसे? यदि आपके पास ऐसे लोग है तो मैदान मे उतरिये और चुनौती दीजिये उस भारतीय जनता पार्टी को, जिसे आप फिलहाल सोफे पर बैठकर गिराने का ख्वाब देख रहे है।

यदि ये भी नहीं कर सकते तो इस अत्याचार को सहन कीजिये क्योंकि दुनिया मे आजतक कोई भी राजनैतिक निवारण बिना जागृति के नहीं हुआ है। यदि आप सवर्ण है तो बीजेपी के अलावा आपके पास कोई नहीं है, दूसरे जितने है उनके तो आप प्राइमरी टारगेट है।

मेरे ख्याल मे सवर्णों को चौथे विकल्प पर ही जाना चाहिए, हालांकि मेरा निजी समर्थन फिर भी नहीं रहेगा क्योंकि खुद एक सवर्ण होने के नाते मै चाहता हूँ कि सवर्ण नौकरी पैदा करने वाले बने। सवर्णों मे ईलान मस्क, टिम कुक, सत्या नाडेला, आदित्य बिरला और गौतम अडानी जैसे लोग पैदा हों जो किसी सूबे को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी से चलायें।

एक सवर्ण होने के नाते ये जानता हूँ कि हमसे अवसर छीन सकते है लेकिन हमारा हुनर नहीं, मै स्वयं कायस्थ जाति से हूँ सुभाषचंद्र बोस ने अंग्रेजो की सरकारी नौकरी को अपने जूते पर रखा था और एक क्रांति की थी जिसकी बदौलत हम आज़ाद है। मुंशी प्रेमचंद जी ने सरकारी नौकरी नहीं की अपितु वर्तमान हिंदी साहित्य का उत्थान किया।

इसलिये सरकारी नौकरी अच्छी चीज हो सकती है लेकिन एक सरकारी नौकर कभी समाज मे सकारात्मक परिवर्तन नहीं ला सकता, आप कमेंट मे दो-चार नाम दे भी दे मगर वे अपवाद है। समाज का उत्थान सिर्फ धर्म, विज्ञान और व्यापार से हो सकता है और इसमें कोई आरक्षण नहीं है। ये सवर्णों की पिच है और हम इस पर जीतेंगे।

आरक्षण से नौकरियां मिल सकती हो लेकिन पद योग्यता से मिलते है, नरेंद्र मोदी के वित्तीय सलाहकार संजीव सान्याल सरकारी नौकर नहीं थे अपितु इन्वेस्टमेंट बैंकर थे। सवर्णों का रोडमैप भी यही होना चाहिए।

इसके अलावा कई सवर्णो को कहते सुना कि हम ओवैसी को ही ले आएंगे.. ब्ला ब्ला.. उनमे से एक तो किसी जेहादी की फेक आईडी निकली लेकिन कुछ को मै जानता भी हूँ। ऐसे सवर्णों से अनुरोध है, आज ही हिन्दू धर्म छोड़कर निकल लो आपसे अच्छे वे दलित हैं जिन्होने अन्याय सहकर भी अपना धर्म नहीं त्यागा।

आपसे अच्छे वे आदिवासी हैं जिनके पास ईसाई मिशनरी चावल के बोरे लेकर आते हैं बच्चे को भूखा रखते हैं मगर अपना धर्म नहीं छोड़ते, एक सवर्ण होने के ही नाते उन दलितों और हरिजनों को नमन करूँगा । आप उन गिने चुने ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों से ऊपर है जिन्होंने एक परीक्षा का रिजल्ट सुनकर अपनी श्रद्धा उस ओवैसी की तरफ मोड दी जिसने भगवान राम के विषय मे अपशब्द कहे थे।

मोदी सरकार से लगातार विरोध रहेगा, जो सवर्ण आपको सिंहासन पर बैठाये हुए है उसके साथ ये अन्याय गलत है। लेकिन एक सवर्ण के नाते तीन बाते है – पहली, हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, दूसरी कि हम हिन्दू पहले है सवर्ण बाद मे और तीसरी ये कि मुगलों के राज मे भी हमारी तिजोरी हमेशा भरी रहती थी क्योंकि हम बिना सरकारी नौकरी के वर्चस्व रखना जानते है।

समाज मे अल्बर्ट आइंस्टीन, वराहमिहिर, निकोला टेस्ला और रामानुजम पैदा करो, वो ही कौम दुनिया पर राज करेंगी जिसके पास पंडित और वैज्ञानिक होंगे ना कि मास्टर साहब और अफसर साहब।

(परख सक्सेना)

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