Wednesday, February 4, 2026
Google search engine
Homeअजब ग़ज़बGlobal Warming: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने दी ग्लोबल वार्निंग - रिसर्च से बताया...

Global Warming: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने दी ग्लोबल वार्निंग – रिसर्च से बताया कि आधी दुनिया हो सकती है खत्म

Global Warming:  2050 तक खतरनाक गर्मी की चपेट में आएंगे 3.8 अरब लोग: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च ने दुनिया को चेताया..

Global Warming:  2050 तक खतरनाक गर्मी की चपेट में आएंगे 3.8 अरब लोग: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च ने दुनिया को चेताया..

क्लाइमेट चेंज का खतरा अब काबू से बाहर होता दिख रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च के मुताबिक अगर दुनिया का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो साल 2050 तक लगभग 3.8 अरब लोग भीषण गर्मी का सामना करेंगे। यह संख्या आज की तुलना में दोगुनी होगी।

भारत और पड़ोसी देशों पर सबसे बड़ा खतरा

रिसर्च में बताया गया है कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे देशों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ेगा। इन देशों में करोड़ों लोग रहते हैं जिनके पास गर्मी से बचने के साधन बहुत कम हैं। एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं आम जनता तक नहीं पहुंची हैं। जब तापमान 45–50 डिग्री के पार जाएगा, तो मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।

नाइजीरिया, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों में भी कूलिंग की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होगी बल्कि अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचाएगी। गरीब तबका इस दबाव को सबसे ज्यादा झेलेगा।

ठंडे देशों का भ्रम टूटा

अक्सर माना जाता है कि कनाडा, रूस और फिनलैंड जैसे ठंडे देश ग्लोबल वार्मिंग से सुरक्षित हैं। लेकिन रिसर्च ने साफ किया है कि इन देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर ठंड को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वहां के घर और इमारतें गर्मी को अंदर रखने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। ऐसे में अचानक तापमान बढ़ने पर यह लोगों के लिए जानलेवा साबित होगा।

ब्रिटेन जैसे देशों में भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट और पुराने घर बिना वेंटिलेशन के बने हैं। अगर वहां गर्मी बढ़ी, तो हेल्थ सिस्टम पूरी तरह चरमरा सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कोई भी देश इस खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

ऊर्जा की खपत और कूलिंग का दबाव

जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, दुनिया भर में कूलिंग सिस्टम की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी। आने वाले समय में एयर कंडीशनर और पंखों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ेगा। इससे बिजली की खपत का पैटर्न बदल जाएगा।

अब तक दुनिया में हीटिंग यानी घरों को गर्म रखने के लिए ज्यादा बिजली खर्च होती थी। लेकिन इस सदी के अंत तक कूलिंग का बिल हीटिंग से कहीं ज्यादा होगा। अगर बिजली उत्पादन के लिए कोयला और गैस का इस्तेमाल बढ़ा, तो ग्लोबल वार्मिंग और तेज़ी से बढ़ेगी। यह एक खतरनाक चक्र होगा जिससे निकलना मुश्किल होगा।

एक्सट्रीम हीट: ‘साइलेंट किलर’

वैज्ञानिकों ने एक्सट्रीम हीट को ‘साइलेंट किलर’ कहा है क्योंकि यह धीरे-धीरे इंसान को मारती है। जब शरीर का तापमान कंट्रोल से बाहर होता है, तो ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इससे चक्कर आना, सिरदर्द और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।

रिसर्च की लीड ऑथर राधिका खोसला के मुताबिक 1.5 डिग्री से ऊपर जाना शिक्षा, स्वास्थ्य और माइग्रेशन पर बुरा असर डालेगा। खेती पर भी संकट आएगा जिससे फूड सिक्योरिटी खतरे में पड़ सकती है।

समाधान: नेट जीरो और अडैप्टेशन

वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हमें अडैप्टेशन स्ट्रेटजी पर काम करना होगा। इसका मतलब है कि हमें अपने घर, ऑफिस और सड़कों को गर्मी सहने लायक बनाना होगा। नेट जीरो टारगेट हासिल करना ही इस तबाही को रोकने का एकमात्र रास्ता है।

(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments