Medical Mafia: AI ने बचाए लाखों रुपये: 1.6 करोड़ का अस्पताल का ठगने वाला बिल घटकर हो गया सिर्फ़ 27 लाख..
एक परिवार का ₹1.6 करोड़ का हॉस्पिटल बिल घटकर सिर्फ़ ₹27 लाख रह गया। यह न तो किसी वकील की वजह से हुआ, न ही किसी बड़े संपर्क से, बल्कि सिर्फ़ एक AI चैटबोट की मदद से।
पीड़ित परिवार ने पूरा मेडिकल बिल AI सिस्टम में अपलोड किया और उसे हर पंक्ति को ऑडिट करने को कहा AI ने तुरंत पकड़ लिया कि बिल में डुप्लीकेट बिलिंग, इल्लीगल को़ड स्टैकिंग और ऐसे प्रोसीजर्स भी शामिल थे जिनके लिए अस्पतालों को कानूनी तौर पर चार्ज करने की अनुमति नहीं है।
इसके बाद AI ने एक लीगली स्ट्रक्चर्ड डिस्प्यूट लेटर तैयार किया जिसमें इक्जैक्ट कंप्लायन्स वायोलेशन्स का हवाला दिया गया। अस्पताल के पास इसका कोई जवाब नहीं था और तब उनको बिल सीधा 80% से ज्यादा घटाना पड़ा।
ये है हेल्थकेयर में AI की असली ताक़त
यह घटना दिखाती है कि AI की असली शक्ति हेल्थकेयर में कहाँ है –
मेडिकल बिलों के ऑडिट में
अस्पताल के कोम्प्लायन्स चेक्स में
और इन्श्योरेन्स विवाद के ऑटोमेशन में
रोगी की सुरक्षा संकट में है
याद रखें, यदि आपको या आपके परिवार से किसी को अस्पताल जाना पड़ा जाता है और वहाँ एडमिट होना पड़ता है तो दोनो ही स्थितियों में आपके प्राणों की और आपके पैसे की सुरक्षा संकट में पड़ सकती है। यह कोई चंट चालाक चतुराई वाला धोखा नहीं है, न ही ये सिर्फ़ मौजमस्ती के लिए बनाया गया कोई चैटबॉट है, यह दरअसल है असली फिनान्शियल इंपैक्ट, जहाँ लोगों की ज़िंदगी और पैसों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
आपके काम की सबसे बड़ी बात
AI अब उपभोक्ताओं के हित के लिये चुपचाप उनका सबसे बड़ा हथियार बन रहा है जो ठगी से बचायेगा –
अस्पष्ट, अपारदर्शी या रहस्यमयी अस्पताल बिलिंग सिस्टम्स में
बढ़े और बहुत ज्यादा बढ़े मेडिकल भुगतानों में
‘स्थिति जटिल है’ कह कर डराने में
इन सबके खिलाफ़ AI सबसे मज़बूत हथियार साबित हो रहा है।
असली सवाल
अब सवाल यह नहीं है कि “Can AI do this?”
वास्तविक प्रश्न आज ये है कि -“Why isn’t everyone using it already?”
ये हेल्थकेयर से जुड़ी सच्ची कहानी AI के उपयोगी भविष्य की दिशा में संकेत करती है – जहाँ तकनीक सिर्फ़ सुविधा नहीं, बल्कि लाखों रुपये बचाने और रोगियों के अधिकारों की रक्षा करने का सबसे बड़ा साधन बन रही है।
(प्रस्तुति -नाल्ली सुरेन्द्र राव)



