Thursday, February 26, 2026
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Love Jihad: नेशनल राइफल शूटर तारा शाहदेव ने बताया -‘किस्मत ने साथ दिया – मैं भाग निकली!’

Love Jihad: माँ की मौत के बाद फँसाया, रणजीत निकला रकीबुल: नेशनल शूटर तारा ने सुनाई ‘लव जिहाद’ की आपबीती, बोली- कुत्तों से कटवाकर बीफ खिलाने की हुई कोशिश..

Love Jihad: माँ की मौत के बाद फँसाया, रणजीत निकला रकीबुल: नेशनल शूटर तारा ने सुनाई ‘लव जिहाद’ की आपबीती, बोली- कुत्तों से कटवाकर बीफ खिलाने की हुई कोशिश..

‘लव जिहाद’ आतंकवाद से कम नहीं है। परिवार द्वारा तय की गई शादी में लड़की कैसे ‘लव जिहाद’ का शिकार हो जाती है, ये नेशनल शूटर रहीं तारा शाहदेव से जानिए। 12वीं पास तारा को 9 साल बाद न्याय मिली है, धोखा देने वाला पति और उसकी माँ सलाखों के पीछे हैं। उन्होंने अपनी झकझोरने वाली आपबीती फिल्म ‘द केरला स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड’के मंच पर बताई।

फिल्म को प्रोपेगेंडा कहने वालों के मुँह पर तमाचा जड़ते हुए फिल्म मेकर ने ऐसी 55 महिलाओं को मंच दिया, जिन्होंने अपनी सच्चाई दुनिया को बताई। हकीकत से रूबरू कराने के लिए दिल्ली में सोमवार (27 फरवरी 2026) को एक विशेष संवाद का कार्यक्रम रखा गया था। चाहे दिल्ली की हो या केरल की, भोपाल की हो या फरीदाबाद की, हर महिला के साथ अलग अलग ढंग से जिन साजिशों को अन्जाम दिया गया – उन सभी का मकसद एक ही था – लव जिहाद।

लोगों की आँखे नम हो गईं

जब इन महिलाओं में एक तारा शाहदेव ने बताया कि उसने किस तरह से 40 दिनों तक दरिंदगी झेली और 9 साल तक न्याय का इंतजार किया, तो सुनने वाले अपने आंसू नहीं रोक पाये। तारा ने कहा कि वो चाहती हैं कि हिन्दू बेटियाँ सतर्क रहें और परिवार हर हाल में अपनी बेटी का साथ न छोड़े। अगर परिवार ने उसे ठुकराया तो बेबस, बेसहारा लव जिहाद की शिकार महिलाओं के सामने खुदकुशी के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।

तारा की दर्द भरी दास्ताँ

तारा बताती है कि वह नेशनल शूटर रही हैं। 2014 में एक इंसान से मिली थी तो पुलिस अधिकारी था। शादी का रिश्ता एक मुस्लिम जज लेकर आया था। मम्मी की डेथ हो चुकी थी और पापा काफी बीमार थे। खुद को संभालना मुश्किल हो रहा था। इस परिस्थिति का फायदा उठाते हुए उसे फँसाया गया। तारा कहती हैं कि उनलोगों ने जानबूझकर ऐसा वक्त चुना, जब इमोशनली वीक थी वो। जज ने पिता के सामने कहा कि लड़का की माँ है सिर्फ जो माँ का प्यार देगी। पापा और भैया ने लड़के के बारे में पता भी लगाया और उन्हें सबकुछ ठीक लगा। ऐसे में 7 जुलाई 2014 को उसकी रांची के रेडिशन ब्लू होटल में पुलिस अधिकारी रंजीत कुमार कोहली के साथ शादी कर दी गई।

‘डबल आइडेंटिटी’ का दूसरे दिन चला पता

तारा कहती हैं कि पापा और भैया से सबने कहा कि लड़के के बारे में पहले पता क्यों नहीं किया। लेकिन उन्होंने पता किया था। तारा के मुताबिक, शादी में हिन्दू पहचान के साथ वे लोग थे। उनके दोस्त अधिकारी रेंज के लोग थे। यहाँ तक कि सगाई में उसे लड़के के घर भी ले जाया गया। वहाँ उन्होंने भगवान की फोटो दीवार पर टँगी देखी थी। बिल्कुल आम हिन्दू घरों की तरह लगा था। सबकुछ सही चल रहा था।

यही सच्चाई है!

7 जुलाई को शादी हुई और वह ससुराल पहुँची। अगले दिन सुबह जब आँख खुली तो देखा तो वह घर मक्का-मदीना का फोटो, अल्लाह लिखी तस्वीरों से अटा पड़ा था। जब लड़के की माँ से उसने पूछा तो उन्होंने धक्का देकर कहा कि यही सच्चाई है।

पिता और भाई को बताना चाहा। जिस जज ने शादी करवाई थी, उसने कहा कि पापा- भैया को बुलाएँगे तो घबरा जाएँगे, क्योंकि कल ही शादी हुई है।

जज ने कहा कि जिस व्यक्ति से शादी हुई थी उसका नाम रकीबुल हसन है, रणजीत सिंह कोहली नहीं। तारा कहती है कि उसे कहा गया कि अब जो कहा जा रहा है, वह करो वरना पापा और भैया की फँसा देंगे और जीवन भर के लिए जेल में डलवा देंगे। तारा ने कभी भी ‘लव जिहाद’ शब्द नहीं सुना था, इसलिए उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

‘भाई को झूठे रेप केस में फँसा देंगे’

पति के साथ-साथ शादी कराने वाला जज भी धमकी दे रहा था। उसने कहा, “तुम्हारे भाई को झूठे रेप केस में फँसा देंगे। पापा को आर्म्स केस में फँसा देंगे। आज निकाह कर लो वरना मुश्किल में पड़ जाओगी।”

डीएसपी पति भी लगातार जज के साथ धमकियाँ दे रहा था। इससे परेशान होकर तारा ने कहा कि आप चाहते क्या हो। धोखा देने वाले रकीबूल हसन ने कहा कि जब कहा जाएगा तो तीन बार ‘कबूल है’ बोल देना। तारा कहती है कि दूसरे दिन उसका निकाह होने जा रहा था। इसमें काजी समेत बड़े- बड़े लोग आए थे।

कबूल है कबूल है कबूल है !

उसे कहा गया कि कबूल है तीन बार बोलो। शाहा परवीन हो आज से और निकाहनामे पर साइन कर दो। इसके बाद तारा ने ‘कबूल है’ तो कह दिया, लेकिन नए नाम के साथ निकाहनामे पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया। उसे तरह-तरह की धमकियाँ दी जाने लगी। उसे कहा गया कि अगर बात नहीं मानी तो बेच दी जाओगी। तुम न तो पहली हो और न ही आखिरी हो। तुम्हारे जैसे कई आई और बहुत सी इस रास्ते पर चल रही हैं।

तारा कहती हैं कि वह अपने घरवालों से बात करना चाहती थीं, लेकिन फोन छीन लिया गया। जब भी फोन आता तो झूठ बोल देते कि नई शादी हुई है, घूमने गए हैं। पापा-भाई को कुछ न हो, इसलिए तारा सब कुछ बर्दाश्त करती रही।

40 दिन बाद भागने में सफल रही तारा

40 दिन बाद उसे घर से भागने का मौका मिला। दरअसल उस पर हमेशा पहरा रहता था। घर के नीचे पुलिस वाले होते थे और घर पर हसन की अम्मी की नजर होती थी। उसका लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना हो रहा था। उसे कुत्ते से कटवाया गया। यहाँ तक कि एक दिन जज के घर पर उसे बीफ खिलाने की कोशिश की गई।

तारा कहती हैं कि हसन और उसके साथी आतंकवादी लोग हैं। घर पर सेटेलाइट फोन थे। कई सिम्स थे। ये आम लोग नहीं है। तारा के मुताबिक, ये आम लोग नहीं है बल्कि साजिश कर आम हिन्दू लड़कियों को फँसा कर धर्म परिवर्तन कराते हैं। कई लड़कियाँ थी जिसे झाँसा देते थे कि उनका 12वीं के बाद अच्छे कॉलेज में एडमिशन करवा देंगे। ऐसी लड़कियाँ आती थी। ये लोग लड़कियों की कमजोरी का फायदा उठाना बखूबी जानते हैं।

फरार होने में नौकरानी ने मदद की

घर पर कोर्ट से पेपर आते थे। जज और पुलिस अधिकारी के रहते इन्हें कानून का डर नहीं था। फ्लैट के नीचे पुलिस तैनात रहती थी। तारा को नौकरानी ने हिम्मत दी। फरार होने वाले दिन भी हसन ने उसे बहुत पीटा था और फ्लाइट पकड़ने घर से निकला था। उसने हिम्मत कर नौकरानी से फोन किया और भैया को 8 बजे आने के लिए कहा। साथ में पुलिस भी लाने को कहा। पिता-भाई को पुलिस के साथ आने में 9.15 हो गए। इसके बाद वे पहुँचे।

पुलिस के घर पर पहुँचते ही जज साहब भी आ गए और दूसरे लोग भी आ गए। उनलोगों ने पति-पत्नी का ‘मामूली झगड़ा’ बताया। लेकिन, एक महिला पुलिस ने उसकी हालत देख कर कहा कि उसे हर हाल में अपने साथ लेकर जाएगी। दरअसल तारा ने पुलिस से कहा कि अगर उसे इस हालत में यहाँ छोड़ा गया, तो वह खुदकुशी कर लेगी।

तारा बताती हैं कि महिला पुलिस ने कहा कि मैं इसे अकेला नहीं छोड़ूँगी। इसे पुलिस लॉकअप में रखूँगी। तारा को सदर अस्पताल से एम्स रेफर कर दिया। इस तरह से उसे दरिंदगी से मुक्ति मिली।

तारा ने मीडिया का भी शुक्रिया कहा जिसने उसकी स्टोरी बताई और उसके साथ क्या हुआ, ये दुनिया को पता चला। इस दौरान सरकारी तंत्र हसन के साथ खड़ा दिखा, लेकिन 9 साल की लड़ाई रंग लाई और हसन को हरियाणा बॉर्डर पर गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कारनामों का पता चलने के बाद उसे आजीवन कारावास की सजा मिली।

पूरी घटना को याद करते वक्त तारा की आवाज कई बार भर्रा गई, लेकिन उनका संदेश स्पष्ट था ‘यह कल्पना नहीं, जीती-जागती सच्चाई है।’

(अज्ञात वीर)

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