America Iran War: होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का बड़ा फैसला: वैश्विक तेल सप्लाई पर संकट, अमेरिका-इजरायल टकराव के बीच बढ़ी दुनिया की चिंता..
जिस आशंका को लेकर लंबे समय से दुनिया भर में चिंता जताई जा रही थी, आखिरकार वही स्थिति सामने आ गई है। ईरान ने ऐसा कदम उठा लिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचैनी और अस्थिरता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है।
ईरान के इस फैसले ने साफ संकेत दे दिया है कि अब यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक असर डाल सकता है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बयान जारी करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब बंद है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निशाना बनाया जाएगा और आग के हवाले कर दिया जाएगा।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी ने सरकारी मीडिया में स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उनका कहना था कि यदि किसी भी देश का जहाज इस क्षेत्र से गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और ईरान की नियमित नौसेना उसे नष्ट करने में पीछे नहीं हटेंगी।
यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और वैश्विक व्यापार के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यही रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। भले ही यह भौगोलिक रूप से ईरान और ओमान से घिरा हुआ है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग का दर्जा प्राप्त है, जहां से दुनिया भर के जहाजों की आवाजाही होती है।
दरअसल, ईरान ने शनिवार को ही संकेत दे दिए थे कि वह इस अहम निर्यात मार्ग को बंद करने जा रहा है। अब उसने औपचारिक रूप से यह घोषणा कर दी है और साथ ही सख्त चेतावनी भी जारी कर दी है। इस फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल मच गई है। आशंका जताई जा रही है कि दुनिया की लगभग पांचवीं हिस्सेदारी वाले तेल सप्लाई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका प्रभाव भारत सहित कई देशों के ऊर्जा बाजार पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
ऊर्जा बाजार पहले से ही इस खतरे की आशंका से डगमगाए हुए थे। अब जब ईरान ने आधिकारिक रूप से इस मार्ग को बंद करने की बात कही है, तो तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालांकि अभी तक किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की ओर से यह पुष्टि नहीं हुई है कि जलडमरूमध्य पूरी तरह सील कर दिया गया है, लेकिन हालात को देखते हुए बाजार में घबराहट साफ दिखाई दे रही है। टैंकरों की आवाजाही में कमी आई है और इलाके में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप व हमलों की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भौगोलिक रूप से बेहद संकरा मार्ग है। अपने सबसे पतले हिस्से में इसकी चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर यानी लगभग 21 मील है। इसमें दोनों दिशाओं में जहाजों के लिए केवल दो-दो मील चौड़ी लेन निर्धारित हैं। इतनी कम चौड़ाई के बावजूद यह मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा वहन करता है।
आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। बीते वर्ष प्रतिदिन 20 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल, कंडेनसेट और अन्य ईंधन इसी जलमार्ग से निर्यात किया गया। समुद्र के रास्ते होने वाले कुल वैश्विक तेल परिवहन का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा भी इसी मार्ग पर निर्भर है। इसके अलावा, कतर अपनी लगभग पूरी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचाता है।
सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस कॉरिडोर पर काफी हद तक निर्भर हैं। इन देशों से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल एशियाई बाजारों की जरूरतें पूरी करता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से एशिया की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जलमार्ग पर थोड़ी सी भी रुकावट आती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। यदि यह स्थिति कुछ दिनों के बजाय कई हफ्तों तक बनी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। साथ ही यूरोप में गैस की कीमतें भी 2022 के ऊर्जा संकट जैसे स्तर तक पहुंच सकती हैं।
यह जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल निर्यात मार्ग माना जाता है। यह खाड़ी के बड़े तेल उत्पादक देशों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है। हालिया घटनाक्रम तब तेज हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। इन हमलों का उद्देश्य ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना बताया गया। इस संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई।
इसके जवाब में ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। तेहरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई मिसाइलें दागीं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान को भी निशाना बनाया गया। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के फैसले के साथ ईरान ने उन पुरानी चेतावनियों को अमल में ला दिया है, जिनमें कहा जाता रहा था कि किसी भी हमले की स्थिति में वह इस अहम जलमार्ग को अवरुद्ध कर देगा।
तेल बाजार इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। तेहरान और उसके पुराने प्रतिद्वंद्वी अमेरिका तथा इजरायल के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। आशंका है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है, तो न केवल तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होगी, बल्कि पूरा क्षेत्र अस्थिरता की चपेट में आ सकता है।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठाया गया यह कदम केवल एक क्षेत्रीय फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
(त्रिपाठी पारिजात)



