17th Day of War: अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान युद्ध का सत्रहवाँ दिन -अब तक की स्थिति क्या रही, जानिये यहाँ..
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को आज सत्रह दिन पूरे हो चुके हैं। इस संघर्ष ने न केवल मध्य पूर्व की राजनीति को हिला दिया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गहरा असर डाला है। तेल और गैस की कीमतें लगातार ऊँचाई पर बनी हुई हैं, जबकि स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ (Hormuz जलडमरूमध्य) पूरी तरह से ठप पड़ा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ पर संकट
स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। युद्ध शुरू होने के बाद से यहाँ जहाज़ों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों को युद्धपोत भेजने चाहिए ताकि इस मार्ग को सुरक्षित किया जा सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नाटो सहयोगी मदद नहीं करते तो गठबंधन का भविष्य “बहुत बुरा” हो सकता है।
अब तक ऑस्ट्रेलिया और जापान ने साफ कर दिया है कि वे जहाज़ नहीं भेजेंगे। जर्मनी ने भी कहा है कि नाटो की कोई भूमिका नहीं दिखती। ब्रिटेन ने सहयोग का संकेत दिया है लेकिन विवरण साझा नहीं किया।
ईरान का रुख
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन युद्धविराम की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि ईरान आत्मरक्षा में किसी भी हद तक जाने को तैयार है और युद्ध जारी रहेगा।
जहाज़ों पर खतरा
ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार, पिछले तीन दिनों में कोई नई घटना नहीं हुई है, लेकिन खतरा “गंभीर” बना हुआ है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 20 जहाज़ों पर हमले हो चुके हैं।
लेबनान में जमीनी अभियान
इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में “सीमित” जमीनी अभियान का विस्तार किया है। रक्षा मंत्री इस्राइल कैट्ज़ ने कहा कि यह कदम उत्तरी इज़राइल के नागरिकों की सुरक्षा और खतरों को हटाने के लिए उठाया गया है। लाखों लोग दक्षिणी लेबनान से निकाले जा चुके हैं।
युद्ध की समयरेखा
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और इज़राइल के सैन्य लक्ष्य लगभग समान हैं, हालांकि पूरी तरह एक जैसे नहीं।
अमेरिकी प्रशासन का अनुमान है कि युद्ध कुछ हफ्तों में या उससे पहले समाप्त हो सकता है।
इज़राइल ने संकेत दिया है कि अगले तीन हफ्तों में “हज़ारों” ठिकानों पर हमले किए जाएंगे।
हमलों की ताज़ा स्थिति
सोमवार सुबह तेहरान में काले धुएँ के गुबार देखे गए। इज़राइली सेना ने राजधानी में बुनियादी ढांचे पर हमले शुरू किए हैं।
ईरान का दावा है कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने लगभग 700 मिसाइलें और 3,600 ड्रोन अमेरिका और इज़राइल पर दागे हैं।
क्षेत्रीय हमले
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ईंधन टैंक ड्रोन हमले में जल उठा, जिससे उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं।
अबू धाबी में एक मिसाइल वाहन पर गिरी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई।
बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास कई रॉकेट गिरे, जिनमें पाँच लोग घायल हुए।
इंटरनेट ब्लैकआउट
ईरान में इंटरनेट बंदी और भी गंभीर हो गई है। रविवार को बची-खुची कनेक्टिविटी भी अचानक बंद हो गई।
मौतों का आँकड़ा
सीएनएन के अनुसार, अब तक इस युद्ध में 2,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
ईरान में सबसे ज़्यादा, लगभग 1,300 मौतें हुई हैं।
लेबनान में कम से कम 850 लोग मारे गए।
अन्य पड़ोसी देशों में भी दर्जनों मौतें हुई हैं।
सत्रहवें दिन की स्थिति यह दिखाती है कि युद्ध लगातार फैल रहा है और इसके असर केवल ईरान, इज़राइल या अमेरिका तक सीमित नहीं हैं। स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ का बंद होना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर संकट है। लेबनान, इराक, यूएई जैसे देशों में भी हिंसा फैल रही है। मौतों का बढ़ता आँकड़ा इस संघर्ष की भयावहता को उजागर करता है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब भी असमंजस में है कि इस युद्ध को कैसे रोका जाए। अमेरिका सहयोगियों पर दबाव डाल रहा है, ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है, और इज़राइल अपने सैन्य अभियान को और तेज़ कर रहा है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों को गहरे संकट में डाल सकता है।
(त्रिपाठी पारिजात)



