Tarun Tejpal: गोवा के होटल की लिफ्ट में आखिर क्या हुआ था? 13 साल पुराने चर्चित केस की पूरी कहानी जितनी दिलचस्प उतनी डरावनी..
गोवा के चर्चित तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद जानिए 2013 की उस रात क्या हुआ था। CCTV फुटेज, पीड़िता के आरोप, पुलिस जांच, अदालत की कार्रवाई और पूरे केस की विस्तृत टाइमलाइन पर डालिये दृष्टि।
करीब 13 साल पहले गोवा के एक पांच सितारा होटल में हुई एक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। देश की चर्चित पत्रिका तहलका के संस्थापक संपादक रहे तरुण तेजपाल पर उनकी ही महिला सहकर्मी ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।
इसको बाद ये मामला इतना बड़ा बन गया कि पत्रकारिता, कानून और राजनीति, तीनों क्षेत्रों में इसकी लंबे समय तक चर्चा होती रही। अब बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को इस मामले में दोषी ठहराया है। इसी फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।
यह मामला केवल एक आपराधिक मुकदमे तक सीमित नहीं रहा। इसने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सत्ता और प्रभाव के दुरुपयोग तथा न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी कई अहम सवाल खड़े किए। ऐसे में लोग फिर जानना चाहते हैं कि आखिर नवंबर 2013 की उन दो रातों में क्या हुआ था और यह मामला अदालत तक कैसे पहुंचा।
गोवा के बंबोलिम स्थित एक लग्जरी होटल में नवंबर 2013 के दौरान ThinkFest नाम से एक प्रतिष्ठित साहित्य और विचार महोत्सव आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का आयोजन तहलका पत्रिका ने किया था। देश और विदेश की कई प्रसिद्ध हस्तियां इसमें शामिल हुई थीं। इसी कार्यक्रम के दौरान पत्रिका में काम करने वाली एक युवा महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी तरुण तेजपाल ने होटल की लिफ्ट के भीतर उनके साथ जबरदस्ती की और उनका यौन उत्पीड़न किया।
पीड़िता ने बताया कि रात में होटल में ठहरे हुए हॉलीवुड अभिनेता राबर्ड डिनेरो को उनके सूट तक छोड़ने़ पहले वो और तेजपाल साथ आये। उसके बाद वे दोनो चल कर लिफ्ट की तरफ आये। इस दौरान तरण ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा जिससे उसे अनकंफर्टेबल फील हुआ। फिर लिफ्ट के भीतर आने के बाद तरुण ने आधे रास्ते में ही लिफ्ट रोकने की कोशिश की ताकि वो उसके साथ फिजिकल हो सके।
इस महिला पत्रकार ने बताया कि लिफ्ट के भीतर तरुण ने जबर्दस्ती करके उसके कपड़े खोल डाले और फिर उसने उसका यौन शोषण किया। इसके बाद जब आगे लिफ्ट रुकी तो वह अपने कपड़े सम्हालते हुए बाहर भागी जो सीसीटीवी में कैद हो गया।
इसके बाद तरुण भागता हुआ उसके पीछे आय़ा और उसने पीड़िता को धमकी दी कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो अच्छा नहीं होगा।
महिला पत्रकार के अनुसार यह घटना केवल एक दिन नहीं हुई थी। उनका आरोप था कि 7 नवंबर और 8 नवंबर 2013 को दो अलग-अलग मौकों पर होटल की लिफ्ट के भीतर उनके साथ गलत व्यवहार किया गया। उस समय वह कार्यक्रम से जुड़ी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां निभा रही थीं।
घटना के कुछ दिन बाद महिला पत्रकार ने उस समय तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को एक विस्तृत ई-मेल भेजा। इस ई-मेल में उन्होंने पूरी घटना का क्रमवार विवरण दिया और आरोप लगाया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद और प्रभाव का गलत इस्तेमाल किया। बाद में यह ई-मेल सार्वजनिक हो गया और मामला तेजी से पूरे देश में फैल गया।
शिकायत सामने आने के बाद इस केस ने मीडिया की सुर्खियां बटोर लीं। महिला पत्रकार का कहना था कि उनके साथ ऐसा व्यवहार ऐसे व्यक्ति ने किया, जिस पर वह अपने पेशेवर जीवन में भरोसा करती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल व्यक्तिगत घटना नहीं थी बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा का सवाल भी था।
इस मामले में पुलिस जांच के दौरान होटल की सीसीटीवी फुटेज भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आई। जांच एजेंसियों के अनुसार फुटेज में कई ऐसी गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं, जिन्हें जांच के दौरान महत्वपूर्ण माना गया। मीडिया की रिपोर्ट्स बताती हैं कि पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फुटेज में तरुण तेजपाल और महिला पत्रकार एक साथ होटल की लॉबी में दिखाई देते हैं। दोनों वहां से हॉलीवुड अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो को उनके कमरे तक छोड़ने जाते हुए भी नजर आते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार रात करीब 9 बजे दोनों को एक लिफ्ट की ओर जाते हुए देखा गया। फुटेज में तरुण तेजपाल महिला पत्रकार के कंधे पर हाथ रखे दिखाई देते हैं और दोनों लिफ्ट के भीतर प्रवेश करते हैं। बाद की रिकॉर्डिंग में रात करीब साढ़े 10 बजे उन्हें फिर उसी लिफ्ट के पास देखा गया, जहां कथित तौर पर महिला पत्रकार को अंदर खींचते हुए दिखने की बात पुलिस अधिकारियों ने कही।
इसके लगभग दो मिनट बाद लिफ्ट दूसरे तल पर खुलती दिखाई देती है। पुलिस अधिकारियों के हवाले से पीटीआई ने बताया कि महिला पत्रकार लिफ्ट से बाहर निकलने के बाद अपने कपड़े ठीक करती हुई तेजी से सीढ़ियों की ओर जाती नजर आती हैं। यह विवरण जांच का हिस्सा बना और बाद में अदालत में भी इस पर चर्चा हुई।
महिला पत्रकार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि लिफ्ट के भीतर तरुण तेजपाल ने जानबूझकर लिफ्ट को बीच में रोकने की कोशिश की ताकि दरवाजा न खुले और वह बाहर न निकल सकें। उनका कहना था कि बंद जगह का फायदा उठाकर उनके साथ शारीरिक जबरदस्ती की गई। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि ऐसी घटना दो अलग-अलग तारीखों पर दोहराई गई।
जब मामला सार्वजनिक हुआ तो पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। मीडिया, सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने इस पर गंभीर चिंता जताई। बढ़ते दबाव के बीच गोवा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों के बयान दर्ज किए। होटल के रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई। इसके बाद नवंबर 2013 के आखिर में गोवा पुलिस ने तरुण तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने अग्रिम जमानत पाने की कोशिश की, लेकिन अदालत से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली।
करीब छह महीने जेल में रहने के बाद जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली। इस बीच पुलिस ने फरवरी 2014 में लगभग 2800 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की। इसमें जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों को शामिल किया गया।
साल 2017 में अदालत ने तरुण तेजपाल के खिलाफ रेप, गलत तरीके से रोककर रखने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी और कई वर्षों तक दोनों पक्ष अदालत में अपने-अपने तर्क रखते रहे।
मामले के दौरान महिला पत्रकार ने सार्वजनिक रूप से भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा था कि यह लड़ाई केवल उनके लिए नहीं बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए है जो कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा चाहती हैं। उनका कहना था कि किसी भी महिला का शरीर उसके नियोक्ता या वरिष्ठ अधिकारी की संपत्ति नहीं हो सकता।
उन्होंने यह भी कहा था कि कानूनी लड़ाई शुरू करने के बाद उन्हें पेशेवर और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी और पूरे मामले को अंत तक लड़ने का फैसला किया।
इस लंबे कानूनी संघर्ष के बीच मई 2021 में गोवा की एक सेशन कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। निचली अदालत के इस फैसले पर काफी बहस हुई। इसके बाद गोवा सरकार और अभियोजन पक्ष ने इस निर्णय को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी।
अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा की। विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और तरुण तेजपाल को 2013 के इस मामले में दोषी ठहराया। इसके साथ ही यह बहुचर्चित मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।
यह मामला भारत की न्यायिक व्यवस्था में लंबे समय तक चलने वाले चर्चित मुकदमों में गिना जाता है। करीब 13 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया ने यह भी दिखाया कि गंभीर आपराधिक मामलों में अंतिम फैसला आने में लंबा समय लग सकता है। अब हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद पूरे देश की नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित अगली कार्रवाई पर बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है। साथ ही यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि किसी भी गंभीर आरोप की जांच और न्यायिक प्रक्रिया कानून के तय ढांचे के अनुसार ही आगे बढ़ती है, जहां अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले से तय होता है।
(त्रिपाठी पारिजात)



