Sunday, August 2, 2026
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Facebook से दोस्ती – WhatsApp पर भरोसा – फिर 1.6 Cr की ठगी! Gold Mine Investment Scam का चौंकाने वाला खुलासा

Facebook से हुई दोस्ती, WhatsApp पर बढ़ा भरोसा और फिर 1.64 करोड़ रुपये साफ! Gold Mine Investment Scam ने उड़ाए होश

Facebook के माध्यम से हुआ Gold Mine Investment Scam- फ्रेन्ड रिक्वेस्ट से शुरू हुआ खेल, फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए 1.64 करोड़ का लगाया चूना 

Facebook पर हुई दोस्ती, WhatsApp पर बढ़ा भरोसा और फिर Gold Mine Investment के नाम पर 1.64 करोड़ रुपये की साइबर ठगी। सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने उत्तराखंड से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। जानिए कैसे चलता था पूरा अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क।

ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को ठगने वाले साइबर अपराधी हर दिन नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। कभी शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का लालच दिया जाता है, कभी क्रिप्टोकरेंसी से रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया जाता है। अब गुजरात से सामने आया एक मामला यह बताता है कि ठग किस तरह सोशल मीडिया, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और नकली कंपनियों का इस्तेमाल करके लोगों की जीवनभर की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। इस बार शिकार बने एक व्यक्ति से करीब 1.64 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई।

इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने किया है। जांच के दौरान पुलिस ने उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह केवल एक स्थानीय ठगी का मामला नहीं है। पुलिस को ऐसे कई डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा था और इसमें विदेशी सर्वर तथा कई राज्यों में फैला बैंक खातों का नेटवर्क इस्तेमाल किया गया।

Facebook Friend Request से बिछाया गया पूरा जाल

पुलिस जांच के अनुसार इस साइबर ठगी की शुरुआत दिसंबर 2024 में हुई। पीड़ित के फेसबुक अकाउंट पर “अंजलि मोदी” नाम की एक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। प्रोफाइल पूरी तरह वास्तविक लग रही थी। तस्वीरें, पोस्ट और अन्य जानकारी देखकर किसी को भी संदेह होना मुश्किल था।

दोस्ती स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच नियमित बातचीत शुरू हो गई। धीरे-धीरे चैट का सिलसिला बढ़ता गया और कुछ ही समय में बातचीत फेसबुक से निकलकर WhatsApp पर पहुंच गई। लगातार बातचीत के जरिए ठगों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया। जब उन्हें लगा कि सामने वाला पूरी तरह विश्वास करने लगा है, तब उन्होंने अपने असली मकसद की ओर कदम बढ़ाया।

सोने की खदान में निवेश का सपना दिखाकर फंसाया

कुछ दिनों बाद पीड़ित को एक आकर्षक निवेश योजना के बारे में बताया गया। दावा किया गया कि “GRGC – Gold Rush Global Capital” नाम की एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी गोल्ड माइन यानी सोने की खदानों में निवेश कराती है। कहा गया कि यहां लगाया गया पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और निवेशकों को हर दिन शानदार मुनाफा मिलता है।

ठगों ने अपनी बात को भरोसेमंद बनाने के लिए कई तरह के दस्तावेज, ई-मेल और ऑनलाइन जानकारी भी साझा की। उन्होंने पीड़ित को एक ट्रेडिंग एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा, जिसमें निवेश की गई रकम और उसका बढ़ता हुआ रिटर्न दिखाई देता था। ऐप में हर दिन मुनाफा बढ़ता हुआ नजर आता था, जिससे पीड़ित को विश्वास हो गया कि उसका निवेश तेजी से बढ़ रहा है।

पहले छोटा फायदा दिया, फिर शुरू हुई बड़ी ठगी

साइबर अपराधियों की यही सबसे बड़ी चाल होती है। शुरुआत में वे थोड़ा पैसा वापस करके भरोसा मजबूत करते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। शुरुआती निवेश पर पीड़ित को अच्छा रिटर्न दिखाया गया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ गया।

धीरे-धीरे उसने निवेश की राशि बढ़ानी शुरू कर दी। उसे लगा कि यह निवेश योजना वास्तव में लाभदायक है और जितना अधिक पैसा लगाएगा, उतना ज्यादा मुनाफा मिलेगा। यही वह मोड़ था जहां से करोड़ों रुपये की ठगी का सिलसिला शुरू हो गया।

हर बार नया बहाना, हर बार नई रकम की मांग

जब पीड़ित ने अपनी जमा राशि और कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की तो उसे सफलता नहीं मिली। हर बार कोई नया कारण बताकर भुगतान टाल दिया गया।

कभी कहा गया कि पहले टैक्स जमा करना होगा। फिर मार्जिन मनी के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी गई। इसके बाद क्रेडिट स्कोर चार्ज, ऑडिट फीस और विड्रॉल चार्ज जैसे नए-नए भुगतान करने के लिए कहा जाने लगा। हर बार यह भरोसा दिलाया गया कि यह अंतिम भुगतान है और इसके बाद पूरी रकम तुरंत खाते में भेज दी जाएगी।

इसी झांसे में आकर पीड़ित अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1,63,98,012.70 रुपये ट्रांसफर करता चला गया। आखिरकार जब न निवेश वापस मिला और न ही किसी ने जवाब दिया, तब उसे एहसास हुआ कि वह बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार बन चुका है।

1930 हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस

अपने साथ हुई ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल डेटा, डिजिटल ट्रांजैक्शन, आईपी लॉग और तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच की। कई दिनों तक चली पड़ताल के बाद जांच टीम उत्तराखंड के काशीपुर पहुंची और वहां से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद इज़हार, मोहम्मद सुमैर और मोहम्मद उवेश के रूप में हुई है।

सिर्फ 8,500 रुपये के लिए दे दिया पूरा बैंक अकाउंट

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि मोहम्मद इज़हार ने मात्र 8,500 रुपये के कमीशन के बदले अपना एचडीएफसी बैंक खाता साइबर गिरोह को इस्तेमाल करने के लिए सौंप दिया।

पुलिस के मुताबिक उसने सिर्फ बैंक खाता ही नहीं दिया, बल्कि उससे जुड़ी पूरी ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा भी अपराधियों को उपलब्ध करा दी। इसमें डेबिट कार्ड, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी और अन्य जरूरी दस्तावेज भी शामिल थे। बाद में इसी खाते का इस्तेमाल करोड़ों रुपये की ठगी की रकम इधर-उधर भेजने के लिए किया गया।

दूसरा आरोपी जुटाता था बैंक खाते

पूछताछ में यह भी पता चला कि मोहम्मद सुमैर की भूमिका सिर्फ अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं थी। वह साइबर गिरोह के लिए नए बैंक खाते भी तलाशता था।

बताया गया कि प्रत्येक बैंक खाते के बदले उसे करीब 6,500 रुपये का कमीशन मिलता था। वह ऐसे लोगों को ढूंढता था जो कुछ हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता और उससे जुड़ी बैंकिंग सुविधाएं दूसरे लोगों को सौंपने के लिए तैयार हो जाते थे। पुलिस का मानना है कि ऐसे लोग पूरे साइबर नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं।

तीसरा आरोपी छह और खाते लेकर आया

तीसरे आरोपी मोहम्मद उवेश की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। जांच के अनुसार उसने अपने खाते के अलावा छह अन्य लोगों के बैंक खाते भी इस गिरोह तक पहुंचाए।

पुलिस के मुताबिक हर खाते के बदले उसे करीब 20 हजार रुपये तक मिलते थे। इनमें से लगभग 5 हजार रुपये वह अपने पास रखता था, जबकि बाकी रकम खाताधारकों को दे दी जाती थी। इस तरह किराए पर बैंक खाते उपलब्ध कराकर साइबर गिरोह को मजबूत वित्तीय नेटवर्क तैयार किया जा रहा था।

एक ही बैंक खाते से जुड़े मिले कई राज्यों के मामले

सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने जब आरोपियों के इस्तेमाल किए गए एचडीएफसी बैंक खाते की जांच राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

उसी बैंक खाते के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से पहले ही तीन गंभीर शिकायतें दर्ज थीं। इसका मतलब साफ था कि यह बैंक खाता पहले भी साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो चुका था। जांच में यह भी सामने आया कि कम समय के भीतर इस खाते से 11.37 लाख रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन हुए थे।

इनमें से लगभग 9.95 लाख रुपये उत्तराखंड के काशीपुर स्थित अलग-अलग एटीएम से नकद निकाले गए। अब पुलिस इन सभी ट्रांजैक्शन की कड़ियां जोड़कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।

विदेश से जुड़ा मिला साइबर नेटवर्क

जांच के दौरान पुलिस को ऐसे डिजिटल सुराग भी मिले हैं जो इस मामले को और गंभीर बना देते हैं। अधिकारियों के अनुसार जिस वेबसाइट के जरिए लोगों को निवेश कराया जा रहा था, उसका सर्वर सिंगापुर में मौजूद था।

यही वजह है कि पुलिस इस मामले को केवल एक राज्य या कुछ आरोपियों तक सीमित नहीं मान रही। आशंका है कि इस नेटवर्क ने देश के कई राज्यों में इसी तरह लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए निशाना बनाया होगा। अब जांच एजेंसियां विदेशी कनेक्शन और तकनीकी नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।

मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश जारी

फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान गिरोह के मुख्य संचालकों, फर्जी वेबसाइट तैयार करने वालों, विदेशी संपर्कों और करोड़ों रुपये के लेन-देन को संभालने वाले अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।

साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने गोल्ड माइन निवेश, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और नकली मुनाफे का लालच देकर अब तक देशभर में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। यदि जांच में और पीड़ित सामने आते हैं तो यह मामला देश के बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल हो सकता है।

साइबर विशेषज्ञों की सलाह – लालच से पहले करें जांच

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति की सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच जरूर करें। केवल ऑनलाइन बातचीत के आधार पर किसी निवेश योजना पर भरोसा करना भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कोई कंपनी कम समय में असामान्य मुनाफे का दावा करे, बार-बार अतिरिक्त भुगतान मांगे या पैसे निकालने के लिए नए-नए शुल्क लगाने लगे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच करना और केवल अधिकृत वित्तीय संस्थानों के जरिए ही निवेश करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। थोड़ी सी सावधानी आपकी वर्षों की मेहनत की कमाई को साइबर ठगों से बचा सकती है।

(अर्चना शैरी)

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