Tuesday, September 22, 2026
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Cockroach Party: हो गई पार्टी काकरोचों की जन्तर-मन्तर पर -अब घर में शुरू हुई है पुलिस के साथ

Cockroach Party: ये लोग तो सड़क पर आ जाएंगे, आ जाएंगे क्या - आ गए सबसे बड़ा नेता मोदी के घर के सामने जमीन पर लोट रहा है चमचे बीच चौराहे नाच रहे हैं पागलों जैसी हरकते कर रहे हैं..

Cockroach Party: और देने वाले उनसे अपना मकसद पूरा कर रहे थे जिनमें था – भारत की तरक्की को रोकने का मकसद भारत को तोड़ने का मकसद सनातन को खत्म करने का मकसद..

वांगचुक ने बिना किसी तिलचट्टे को खबर किए अनशन तोड़ दिया पुलिस के लव लेटर अब दंगाइयों के घर पहुंचने शुरू हो गए बेचारे वीडियो डाल डाल के माफ़ी मांग रहे हैं तो कुल मिला के किरान्ति की असली शुरुआत अब हुई है

अब पता चलेगा कि पुलिस के लव लेटर का क्या मतलब होता है लेकिन क्या ये जो कुछ भी हुआ उसकी वजह Paper leak था ?

वो तो पहले भी होते रहे हैं असल वजह कुछ और थी जिसका नाम FCRA है शुरू से समझते हैं 2004 मे जब कॉंग्रेस की सरकार बनी थी तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे

लेकिन सब जानते हैं कि वो सिर्फ एक मुखौटा थे असली सरकार NAC (National Advisory Committee) चला रही थी जिसकी मुखिया थी उनकी राजमाता और इस NAC के पीछे अधिकांश NGO थे जो विदेशों से चंदा लेते थे बेहिसाब चंद.

और देने वाले उनसे अपना मकसद पूरा कर रहे थे जिनमें था – भारत की तरक्की को रोकने का मकसद भारत को तोड़ने का मकसद सनातन को खत्म करने का मकसद.

लेकिन साल 2010 के बाद इन विदेशी दानदाताओं को ये समझ मे आ गया कि कॉंग्रेस के प्रति जनता मे बेहद नाराजगी है और वो सत्ता मे वापस नहीं आने वाली मोदी की लोकप्रियता चरम पर है तब उन्होंने अपने ही कुछ मोहरों को आगे किय.

आप याद कीजिए हैंडसम सिसोदिया और नटवरलाल NGO वाले हैं कबीर और परिवर्तन इनके NGO हैं और यही क्यूँ इनकी पूरी पार्टी ही NGO की पार्टी है तो मकसद ये था कि कॉंग्रेस से नाराज वोटर सीधा मोदी की तरफ ना चला जा.

उसमे से कुछ उसके मोहरों की तरफ shift हो जाए ताकि मोदी अगर आए भी तो कमजोर सरकार के साथ जैसे अटलजी आए थे.

लेकिन ऐसा हुआ नहीं देश की जनता ने एकतरफा फैसला सुनाया और इनके सारे किए धरे पर पानी फिर गया यहां से इनके पतन की शुरुआत होती है जो 2020 मे FCRA के संशोधन तक पहुंचती है.

FCRA कानून इंदिरा गांधी की सरकार ने Emergency के दौरान बनाया था विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए.

2020 मे सरकार ने इसमे संशोधन करके NGO के प्रशासनिक खर्च यानी उनका खुद का खर्च 50% से घटाकर 20% कर दिया सारी विदेशी फंडिंग अब दिल्ली के एक SBI ब्रांच मे ही आएंगी आधार जरूरी किया.

इस संशोधन के बाद लगभग 6000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए 2019-20 के दौरान भी लगभग 2000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए और सरकार के सामने एक नई समस्या खड़ी हुई कि जिनके लाइसेंस रद्द हुए हैं उनकी संपत्ति का क्या करें ये जो पूरे देश में चर्च सेंट जेवियर सेंट मार्टिन जैसे स्कुल-कॉलेज खोल रखे हैं उनका क्या किया जाए ?

तो अब सरकार एक संशोधन लाना चाहती है कि यदि यदि किसी NGO का लाइसेंस रद्द हो जाए तो विदेशी फंड से बनी सारी संपत्ती सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के पास चली जाएंगी सारा फसाद इसी बात का है अब ना पैसा आ पाएगा और ना यहां जो empire बना रखा है वो बचेगा.

ये लोग तो सड़क पर आ जाएंगे आ जाएंगे क्या आ गए सबसे बड़ा नेता मोदी के घर के सामने जमीन पर लोट रहा है चमचे बीच चौराहे नाच रहे हैं पागलों जैसी हरकते कर रहे हैं क्या बोल रहे हैं उन्हें खुद नहीं पता इतिहास पूछेगा-

” कितने आदमी थे ”

ज़वाब मिलेगा -“सरदार सिर्फ 2 और उन दोनों ने ही पूरे के पूरे विपक्ष को पागल बना के सड़क पर नचा दिया था ”

(विकास गोयल)

 

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