Greece: ‘वह ऐसे डाक्टर थे, जो मुर्दों में जान डाल देते थे’, होटल मालिक ने मुझे एक बुकलेट पलटते हुए देख कहा..
यूनान घूमने वाले तमाम पर्यटक यूनानी द्वीपों पर समंदर किनारे आराम करने जाते हैं। कुछ लोग महीने भर एक ही द्वीप पर गुजार लेते हैं, कुछ एक द्वीप से दूसरे द्वीप तफ़रीह करते हैं। वहाँ खूब नहाए, खाए, पीए और चल दिए।
मेरी यात्रा इस मामले में नीरस है कि इसमें द्वीप नहीं है, बल्कि जीर्ण-शीर्ण अवशेषों में इतिहास टटोलना है। उन देवी-देवताओं को तलाशना है, जिनकी पूजा यूनान में सदियों पहले बंद हो चुकी। उन मिथकों को, जो अब मिथक भी नहीं रहे। सोचा पहले सचेत कर दूँ, ताकि जिनकी इतिहास में रुचि नहीं, वे इस यात्रा में आगे न बढ़ें।
‘हमारे होटल में पर्यटक हर मौसम में आते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि पुरानी चीजों का कोई ऑफ़-सीजन नहीं होता। ठंड हो, बरसात हो, या गर्मी, ये खंडहर तो रहेंगे ही।’, होटल के मालिक ने चाभी पकड़ाते हुए कहा
मैं अब ऐसी जगह पहुँचा था, जहाँ स्वास्थ्य के देवता रहते थे। वही जिनके हाथ में वह डंडा था, जिसमें साँप लिपटा रहता था। जो पूरी दुनिया में चिकित्सा का चिह्न बन चुका है। इस देवता एस्लेपियस (Asclepius) के पास तो मुझे आना ही था।
‘वह ऐसे डाक्टर थे, जो मुर्दों में जान डाल देते थे’, होटल मालिक ने मुझे एक बुकलेट पलटते हुए देख कहा
‘हा हा! अब यह बात कौन मानेगा? यह ख़ामख़ा मिथक हैं। मुर्दों में जान…’, मैंने कहा
‘मिथक नहीं है, होमर ने लिखा है’, उन्होंने कहा
‘इलियड भी मिथक ही तो है। अगर मुर्दों में जान डाल देते, तो पूरा यूनान अमर हो गया होता’, मैंने तर्क रखा
‘यही तो समस्या हो गयी। उन्होंने जीवन और मृत्यु का चक्र ही खत्म करने की ठान ली, और इस फेर में खुद मारे गए’, उन्होंने कहा
‘कैसे?’
‘देवराज जियस ने आकाश से बिजली फेंक कर उन्हें मार डाला, ताकि कोई भी मनुष्य अमर न हो सके!’, उन्होंने उत्साह से कहा
‘अच्छा, हाँ! यह कहानी तो पढ़ी है। देवराज जियस बिजली कड़का कर बारिश कराते थे। बल्कि हर मान्यता में देवताओं के राजा वर्षा के देव हैं’, मैंने देवराज इंद्र, रोमन देवता जूपिटर या नॉर्स देवता थोर का संदर्भ सोच कर कहा
यूनान में कुल बाहर मुख्य देवी-देवता माने जाते थे, जिन्हें बारह ओलम्पियन कहा जाता था। इनकी देवसभा ओलंपिया पहाड़ पर थी। देवराज जियस और उनकी पुत्री एथीना का जिक्र तो मैं कर चुका हूँ। समुद्र के देवता पोसीडोन और भविष्यवाणी करने वाले अपोलो की भी। इनके अलावा आठ अन्य देवी-देवता भी हैं, जिनकी चर्चा आगे करता रहूँगा। (एश्लेपियस मुख्य देवताओं में नहीं हैं)
‘आज रविवार है। आज किसी भी स्थल पर टिकट नहीं लगता। आप मुफ्त में अंदर जा सकते हैं’, मुझे टिकट काउंटर पर बैठी महिला ने कहा
‘यह तो बहुत अच्छा है। यहाँ अंदर किसी चिकित्सालय के अवशेष हैं?’, मैंने पूछा
‘नहीं, क्यों? (हँस कर) चिकित्सालय क्यों होगा?’, उन्होंने पूछा
‘मुझे लगा कि स्वास्थ्य के देवता थे, तो चिकित्सालय रहा होगा।’, मैंने कहा
‘यहाँ एक बहुत बड़ा थिएटर खुदाई में मिला, जो ईसा पूर्व चौथी सदी का है’
‘म्यूजिक थिएटर? यह देवता संगीत के थे या चिकित्सा के?’, मैंने कहा
‘कहते हैं कि उस जमाने में संगीत से कई रोगों का निदान हो जाता था’, उन्होंने यह कहते हुए मुझे एक बुकलेट पकड़ा दिया ताकि और सवाल न पूछूँ
वाकई भव्य थिएटर था, जिसमें दस हज़ार से अधिक लोग एक साथ बैठ सकते थे। वहाँ सीढ़ियों पर बैठ कर मुझे लगा कि तमाम यूनानी रोगी मेरे इर्द-गिर्द हैं, और सामने देवता एश्लेपियस साँपों से लिपटा डंडा लिए बैठे हैं। सुमधुर संगीत बज रहा है, लोग अमर हुए चले जा रहे हैं, और तभी…
आकाश से वज्रपात होता है!
बाबू मोशाय! हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियाँ हैं, जिनकी डोर ऊपर वाले के हाथ में हैं।
(प्रवीण झा)



