Saturday, August 15, 2026
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Iran Vs America: ट्रंप ने कहा -‘अल्ला हू अकबर’ – फिर दुनिया को बताया – Wall of Steal ने रोक दिया ईरान को और का नया ईरान वार – “Praise be to Allah” लिखकर साधा निशाना, क्या है ‘वॉल ऑफ स्टील’ वाला दावा?

Iran Vs America: होर्मुज पर अमेरिका का कब्जा? ट्रंप के 'वॉल ऑफ स्टील' दावे से फिर बढ़ा ईरान-अमेरिका तनाव

Iran Vs America: ट्रंप का नया ईरान वार – “Praise be to Allah” लिखकर साधा निशाना, क्या है ‘लोहे की दीवाल ‘ वाला दावा?

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर “Praise be to Allah” लिखते हुए ईरान पर निशाना साधा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा किया। जानिए क्या है ‘वॉल ऑफ स्टील’ और ईरान ने क्या जवाब दिया।

ट्रंप के नए पोस्ट ने फिर बढ़ाई हलचल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भले ही इस समय खुले सैन्य संघर्ष में न बदला हो, लेकिन दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज बनी हुई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक नया सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है।

ट्रंप ने अपने पोस्ट के आखिर में “Praise be to Allah!” लिखा। इस वाक्य ने लोगों का ध्यान खींचा, क्योंकि पश्चिमी नेताओं द्वारा इस तरह की धार्मिक अभिव्यक्ति का इस्तेमाल कम देखने को मिलता है। इसके साथ उन्होंने ईरान पर कई बड़े दावे भी किए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा “वॉल ऑफ स्टील” को लेकर हो रही है।

ट्रंप ने क्या दावा किया?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मजबूत नियंत्रण स्थापित कर लिया है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की तैनाती को “वॉल ऑफ स्टील” यानी फौलादी दीवार जैसा सुरक्षा घेरा बताया।

उनके मुताबिक अमेरिका ने इस रणनीतिक समुद्री इलाके में इतनी मजबूत सैन्य मौजूदगी बना ली है कि ईरान के लिए इसे चुनौती देना आसान नहीं होगा। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इसे ट्रंप का सार्वजनिक दावा माना जा रहा है।

आखिर क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।

Iran Parliament Approves Closure Of Strait Of Hormuz After US Strikes On Nuclear Sites; How Will It Affect India?

दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक और अन्य खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है।

यही वजह है कि इस इलाके में किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

‘वॉल ऑफ स्टील’ आखिर है क्या?

ट्रंप ने जिस “वॉल ऑफ स्टील” का जिक्र किया, वह कोई आधिकारिक सैन्य परियोजना नहीं बल्कि उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया एक प्रतीकात्मक शब्द है।

इससे उनका मतलब फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिकी नौसेना की मजबूत तैनाती से है। इसमें विमानवाहक युद्धपोत, विध्वंसक जहाज, मिसाइल रक्षा प्रणाली और अन्य नौसैनिक संसाधनों की मौजूदगी शामिल बताई गई है।

File:US Navy 070817-N-6524M-005 The nuclear-powered aircraft carrier USS Enterprise (CVN 65) transit through the Persian Gulf during flight operations.jpg - Wikimedia Commons

ट्रंप का कहना है कि इसी सैन्य घेराबंदी के कारण अमेरिका इस समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है। हालांकि, इस पूरे इलाके पर अमेरिका के “पूरी तरह कब्जा” होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

ईरान की ताकत पर भी साधा निशाना

अपने बयान में ट्रंप ने ईरान की सैन्य स्थिति को लेकर भी कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और पहले की सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान की नौसेना और वायुसेना काफी कमजोर हो चुकी हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC पर भी गंभीर असर पड़ा है। ट्रंप के अनुसार ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है और वहां हालात लगातार खराब हो रहे हैं।

इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें ट्रंप के राजनीतिक बयान के रूप में देखा जा रहा है।

महंगाई और आर्थिक संकट को लेकर क्या कहा?

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में महंगाई 300 प्रतिशत तक पहुंच गई है और देश आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो चुका है।

हालांकि, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं के सार्वजनिक आंकड़ों में महंगाई के स्तर को लेकर अलग-अलग अनुमान देखने को मिलते हैं। इसलिए ट्रंप द्वारा बताए गए आंकड़े को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि ईरान अब मध्य पूर्व में पहले जैसी ताकत नहीं रहा और वह केवल प्रचार के जरिए अपनी छवि बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

सीजफायर को लेकर भी बढ़ा विवाद

ट्रंप के इस बयान के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच 60 दिनों के संघर्षविराम को आगे बढ़ाने पर बातचीत हुई है। लेकिन ईरान ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

ईरान का साफ इनकार

रॉयटर्स से बातचीत में ईरान के एक सरकारी सूत्र ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी नए संघर्षविराम पर कोई बातचीत नहीं हुई।

ईरानी पक्ष का कहना है कि जब उनकी नजर में कोई प्रभावी संघर्षविराम शुरू ही नहीं हुआ था, तो उसे आगे बढ़ाने का सवाल ही नहीं उठता। ईरान का यह भी आरोप है कि पहले हुए अस्थायी समझौते का अमेरिका ने कुछ ही समय बाद उल्लंघन किया था।

यही वजह है कि तेहरान किसी नए संघर्षविराम संबंधी दावे को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा।

दुनिया की नजरें क्यों टिकी हैं होर्मुज पर?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ अमेरिका और ईरान का मुद्दा नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अगर इस समुद्री रास्ते में लंबे समय तक बाधा आती है तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल, डीजल, गैस और परिवहन लागत पर भी पड़ सकता है।

भारत जैसे देश, जो अपनी बड़ी तेल जरूरतें आयात के जरिए पूरी करते हैं, उनके लिए भी यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी को अपनी ताकत के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि ईरान अमेरिकी दावों को चुनौती देता नजर आ रहा है।

हालात भले ही इस समय पूर्ण युद्ध जैसे नहीं दिख रहे हों, लेकिन कूटनीतिक टकराव और रणनीतिक बयान लगातार तनाव बढ़ा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश बातचीत का रास्ता चुनते हैं या फिर यह बयानबाजी और तीखी होती है।

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात

डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट ने एक बार फिर मध्य पूर्व के तनाव को सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने “Praise be to Allah” लिखते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण और “वॉल ऑफ स्टील” जैसी मजबूत नौसैनिक मौजूदगी का दावा किया है।

दूसरी तरफ ईरान ने संघर्षविराम बढ़ाने संबंधी खबरों से साफ इनकार किया है। ऐसे में यह साफ है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है और दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर टिकी रहेंगी।

(त्रिपाठी पारिजात)

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