Tuesday, September 1, 2026
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Nirbhaya 2.0: 23 दिन में 9 चालान -56 हजार का जुर्माना फिर भी बेखौफ दौड़ती रही बस -गैंगरेप केस में खुलासा

Nirbhaya 2.0: नियमों की धज्जियां उड़ाती रही बस: 23 दिन में 9 चालान, ₹56 हजार का बकाया फाइन; अब गैंगरेप केस में उठा बड़ा सवाल

Nirbhaya 2.0: 23 दिन में 9 चालान, ₹56 हजार जुर्माना फिर भी बेखौफ दौड़ती रही बस, नाबालिग गैंगरेप केस में चौंकाने वाला खुलासा

दिल्ली-नोएडा नाबालिग गैंगरेप केस में जब्त बस के ट्रैफिक रिकॉर्ड से बड़ा खुलासा हुआ है। 23 दिनों में 9 चालान और जुलाई में ₹56 हजार का जुर्माना दर्ज हुआ, लेकिन भुगतान नहीं किया गया था।

दिल्ली-नोएडा क्षेत्र में नाबालिग के साथ कथित गैंगरेप के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उससे जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जो व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं। पुलिस ने जिस बस को इस मामले की जांच के सिलसिले में जब्त किया है, उसके ट्रैफिक रिकॉर्ड से पता चला है कि वाहन लगातार यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहा था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महज 23 दिनों के भीतर इस बस के खिलाफ 9 चालान दर्ज किए गए थे। इनमें ज्यादातर मामले ओवरस्पीडिंग से जुड़े थे और अकेले जुलाई में 56 हजार रुपये के चालान दर्ज हुए, जिनका भुगतान नहीं किया गया था।

23 दिन में लगातार टूटे ट्रैफिक नियम

पुलिस द्वारा जारी किए गए ऑनलाइन ट्रैफिक रिकॉर्ड में बस नंबर UP 83 ET 3789 के खिलाफ कई कार्रवाई दर्ज होने की बात सामने आई है। यह बस फिरोजाबाद RTO में 28 अप्रैल 2026 को पंजीकृत हुई थी और इसके बाद कुछ ही महीनों में इसके नाम पर यातायात नियमों के उल्लंघन का सिलसिला दिखाई देता है।

उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, वाहन से करीब 11 महीनों के भीतर कुल 11 बार ट्रैफिक नियम तोड़े जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, हाल के कुछ हफ्तों का रिकॉर्ड सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है क्योंकि इस अवधि में लगातार चालान कटे और उनमें कई मामले तेज रफ्तार से वाहन चलाने के थे।

मई से शुरू हुआ चालानों का सिलसिला

रिकॉर्ड के मुताबिक, 12 मई को यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहन की तेज रफ्तार को लेकर कार्रवाई हुई थी। माइलस्टोन 72 के आसपास ओवरस्पीडिंग के दो मामलों में 4-4 हजार रुपये का जुर्माना दर्ज किया गया।

इसके बाद 23 जून को नोएडा के सेक्टर-168 इलाके में भी बस के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस बार आरोप था कि वाहन चालक ने इंडिकेटर का इस्तेमाल किए बिना लेन बदली थी। इसके बाद जुलाई में चालानों की संख्या तेजी से बढ़ती दिखाई दी।

जुलाई में बार-बार ओवरस्पीडिंग

जुलाई का रिकॉर्ड इस मामले में सबसे अहम नजर आ रहा है। महीने की शुरुआत में ही यमुना एक्सप्रेसवे पर माइलस्टोन 72 के पास ओवरस्पीडिंग का चालान दर्ज हुआ और इस पर 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

3 जुलाई को एत्मादपुर के गढ़ी रामी इलाके में नेशनल हाईवे पर तेज गति से वाहन चलाने को लेकर फिर कार्रवाई हुई। इसके अगले ही दिन और फिर 5 जुलाई को यमुना एक्सप्रेसवे पर लगातार दो दिनों तक ओवरस्पीडिंग के मामले दर्ज किए गए और प्रत्येक पर 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

6 जुलाई को भी इसी क्षेत्र में बस के खिलाफ तेज रफ्तार का एक और चालान दर्ज हुआ। यानी कुछ ही दिनों के भीतर एक ही तरह के नियम उल्लंघन बार-बार सामने आते रहे।

हमीरपुर में 26 हजार का भारी चालान

इस रिकॉर्ड में 8 जुलाई की एंट्री भी खास तौर पर सामने आती है। हमीरपुर में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर बस पर 26 हजार रुपये का भारी जुर्माना दर्ज किया गया।

इसके बाद भी वाहन के खिलाफ कार्रवाई रुकती नहीं दिखी। 11 जुलाई को यमुना एक्सप्रेसवे पर फिर ओवरस्पीडिंग का चालान दर्ज हुआ। 15 जुलाई को दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के आसपास तेज रफ्तार को लेकर कार्रवाई हुई और 23 जुलाई को एक बार फिर ओवरस्पीडिंग का मामला रिकॉर्ड में आया।

इस तरह जुलाई के दौरान लगातार सामने आए चालानों ने वाहन के ट्रैफिक व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

₹56 हजार के चालान, लेकिन भुगतान नहीं

इस पूरे रिकॉर्ड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जुर्माने के भुगतान से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुलाई महीने में इस बस पर कुल 56 हजार रुपये के चालान दर्ज हुए, लेकिन इनमें से किसी का भी भुगतान नहीं किया गया था।

बताया गया है कि मई और जून में दर्ज शुरुआती तीन चालानों का भुगतान किया गया था। मगर जुलाई में लगातार सामने आए उल्लंघनों के बाद दर्ज जुर्मानों का भुगतान लंबित रहा।

यही वजह है कि अब पुलिस और जांच एजेंसियों की नजर सिर्फ बस से जुड़े कथित अपराध पर नहीं, बल्कि उसके पुराने ट्रैफिक रिकॉर्ड पर भी है। लगातार चालान होने के बावजूद वाहन का संचालन किस तरह जारी रहा, यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन सकता है।

क्या समय रहते कार्रवाई होती तो रोकी जा सकती थी घटना?

इस मामले में अब एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर किसी व्यावसायिक वाहन के खिलाफ लगातार चालान दर्ज हो रहे थे, खासकर तेज रफ्तार से जुड़े मामले बार-बार सामने आ रहे थे, तो संबंधित विभागों की ओर से आगे क्या कार्रवाई की गई।

सिर्फ चालान काटना और जुर्माना दर्ज करना पर्याप्त है या लगातार नियम तोड़ने वाले वाहनों और चालकों के खिलाफ अतिरिक्त निगरानी या दूसरी कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए, यह सवाल भी चर्चा में है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि पुराने ट्रैफिक उल्लंघनों का मौजूदा आपराधिक मामले से कोई सीधा संबंध था।

कई थाना क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली बस

इस मामले में जांच का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। जिस बस में कथित वारदात हुई, उसे दिल्ली और नोएडा के बीच चलने वाली बस के तौर पर देखा जा रहा है और उसका रूट कई थाना क्षेत्रों से होकर गुजरता था।

ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल भी है कि नियमित रूप से चलने वाले इस वाहन की निगरानी किस स्तर पर होती थी। क्या रूट पर मौजूद पुलिस और ट्रैफिक व्यवस्था के स्तर पर इसकी गतिविधियों पर पर्याप्त नजर थी, और क्या लगातार नियम तोड़ने वाले वाहन के संबंध में कोई अलर्ट या कार्रवाई हुई थी। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

जांच में अब ट्रैफिक रिकॉर्ड भी अहम

नाबालिग से जुड़े इस गंभीर आपराधिक मामले में पुलिस पहले से ही बस, चालक और अन्य संदिग्ध लोगों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। अब वाहन का डिजिटल ट्रैफिक रिकॉर्ड भी जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है।

हालांकि, चालान का रिकॉर्ड अपने आप में किसी व्यक्ति को मौजूदा अपराध का दोषी साबित नहीं करता। यह केवल यह दिखाता है कि वाहन के खिलाफ पहले भी यातायात नियमों के उल्लंघन की कार्रवाई हुई थी।

मामले में आगे की जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि वारदात वाले दिन बस कहां-कहां गई, उसमें कौन-कौन लोग मौजूद थे और पूरे घटनाक्रम के दौरान वाहन की गतिविधियां क्या थीं। साथ ही, उपलब्ध CCTV फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

फिलहाल इस मामले का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यही है कि जिस बस को गंभीर आपराधिक मामले की जांच में जब्त किया गया है, उसके खिलाफ वारदात से पहले भी लगातार ट्रैफिक नियम तोड़ने के रिकॉर्ड मौजूद थे। 23 दिनों में 9 चालान और जुलाई में 56 हजार रुपये का बकाया जुर्माना अब इस पूरे मामले में वाहन की निगरानी और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

(त्रिपाठी पारिजात)

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