China: अमेरिकी टैरिफ और अस्थिर वैश्विक मांग से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों के लिए चीन का यह प्रतिबंध मांग बढ़ाने का सुनहरा मौका साबित हो सकता है।
चीन ने अचानक जापान के समुद्री खाद्य पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला जापान के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है, लेकिन भारत के लिए यह खबर राहत और फायदे का मौका लेकर आई है। माना जा रहा है कि चीन का यह कदम भारतीय निर्यातकों को नया बाजार देगा और अमेरिका के भारी टैरिफ से पैदा हुई मुश्किलें भी कुछ हद तक कम करेगा।
भारत के लिए नया अवसर
जापानी सी-फूड पर लगे इस बैन ने भारतीय निर्यातकों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊँचे टैरिफ की वजह से भारतीय झींगा और मछली का निर्यात पहले से ही दबाव में था। अब चीन का बाजार भारत के लिए बड़ा विकल्प बन सकता है।
शेयर बाजार में उछाल
चीन के इस फैसले का असर तुरंत भारतीय कंपनियों के शेयरों पर दिखा। तेलंगाना की अवंती फीड्स के शेयर लगभग 10% बढ़कर बंद हुए, जो दो महीनों में सबसे तेज उछाल था। कोस्टल कॉर्पोरेशन के शेयर भी 5% चढ़ गए। कंपनी पहले ही चीन में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना चुकी है ताकि अमेरिकी व्यापार बाधाओं से बचा जा सके।
जापान पर असर
यह प्रतिबंध जापान के समुद्री खाद्य उद्योग के लिए बड़ा झटका है। फुकुशिमा संकट के बाद जापान ने हाल ही में चीन को निर्यात फिर से शुरू किया था। हालांकि जापान के कुल निर्यात में सी-फूड का हिस्सा सिर्फ 1% है, लेकिन चीन उसके समुद्री खाद्य का 20-25% हिस्सा खरीदता रहा है। ऐसे में यह बाजार जापान के लिए बेहद अहम था। नए प्रतिबंध से जापानी निर्यातकों को और नुकसान होने की आशंका है।
भारतीय निर्यातकों को राहत
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सी-फूड बाजार रहा है, लेकिन हाल ही में रूस से तेल खरीद जारी रखने पर अमेरिका ने भारत पर 50% तक का शुल्क लगा दिया। इससे भारतीय झींगा और मछली महंगी हो गई और अक्टूबर में अमेरिका को निर्यात में 9% की गिरावट दर्ज की गई।
अब चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों में भारत का निर्यात बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने लगभग 7.4 अरब डॉलर का समुद्री भोजन निर्यात किया, जिसमें फ्रोजन झींगा और फ्रोजन मछली का योगदान 40% से अधिक रहा।
सरकार का समर्थन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में भारत का सी-फूड निर्यात 17.81 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और चीन भारत के प्रमुख खरीदार रहे।
वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता को देखते हुए केंद्र सरकार ने हाल ही में कपड़ा, आभूषण और समुद्री भोजन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए 4.5 लाख करोड़ रुपये का सहायता पैकेज मंजूर किया है, जिसमें झींगा पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कुल मिला कर कहा जा सकता है कि
अमेरिकी टैरिफ और अस्थिर वैश्विक मांग से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों के लिए चीन का यह प्रतिबंध मांग बढ़ाने का सुनहरा मौका साबित हो सकता है। जापान को नुकसान जरूर होगा, लेकिन भारत के लिए यह कदम राहत और नए बाजार का रास्ता खोल रहा है।



