Bihar: जाति, धर्म व समुदाय का ध्यान रखते हुए बिहार में बनाई गई है नई सरकार जिसमें बीजेपी बड़े भाई की भूमिका निभा रही है..
बिहार में एनडीए की सरकार फिर बन चुकी है और नीतीश कुमार ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। गांधी मैदान में हुए समारोह में कुल 27 मंत्रियों ने शपथ ली। यह कैबिनेट सिर्फ राजनीतिक संतुलन नहीं, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर बनाई गई है। किस वर्ग से कितने मंत्री बनाए गए—आइये इसका पूरा विश्लेषण समझते हैं.
एनडीए सरकार की ताकत और मंत्रियों की संख्या
नीतीश कुमार के अलावा कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली। जेडीयू से 8 मंत्री, बीजेपी से 15 (दो उपमुख्यमंत्री सहित), एलजेपी (आर) से 2, और आरएलएम व हम से एक-एक मंत्री बनाए गए।
यानी कैबिनेट में बीजेपी ने खुद को बड़े भाई की भूमिका में रखा है।
अगड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व—कितने मंत्री बने?
नीतीश सरकार में 8 मंत्री अगड़ी जाति से बनाए गए हैं। इन 8 में 2 भूमिहार, 4 राजपूत, 1 ब्राह्मण और 1 कायस्थ शामिल हैं।
बीजेपी ने अगड़ी जाति से 5 मंत्री बनाए—राजपूत, भूमिहार और ब्राह्मण समाज को संतुलित हिस्सेदारी मिली। जेडीयू ने दो अगड़ी जाति के चेहरे शामिल किए—विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और लेशी सिंह (राजपूत)। एलजेपी (आर) ने भी राजपूत समाज से एक मंत्री शामिल किया।
ओबीसी–ईबीसी–वैश्य समुदाय का सबसे बड़ा हिस्सा
नीतीश की इस कैबिनेट में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व ओबीसी, ईबीसी और वैश्य जातियों को दिया गया है। कुल 13 मंत्री इस समूह से हैं। बीजेपी से 8 मंत्री, जेडीयू से 4 और आरएलएम से 1 मंत्री इस वर्ग से आते हैं।
इसमें कई प्रमुख जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया—कुर्मी, कोइरी, यादव, धानुक, कहार, मल्लाह और वैश्य समुदाय।
सम्राट चौधरी (कोइरी) को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।
बीजेपी ने यादव समुदाय से रामकृपाल यादव को मंत्री बनाया है।
वैश्य समाज से दिलीप जायसवाल और अरुण शंकर प्रसाद को जगह मिली है।
जेडीयू ने यादव, कुर्मी और निषाद समुदाय से अपने मंत्री चुने हैं।
दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व—कुल 5 मंत्री
नीतीश सरकार में दलित समुदाय से 5 मंत्री बनाए गए हैं। इसमें दुसाध, मुसहर, पासी और रविदासी समुदाय के नेता शामिल हैं। बीजेपी ने दो दलित चेहरे दिए—लखेंद्र पासवान और सुनील कुमार।
जेडीयू ने अशोक चौधरी को शामिल किया। एलजेपी (आर) से संजय पासवान और हम के संतोष सुमन भी मंत्री बने।
कैबिनेट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व
मुस्लिम समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। जेडीयू ने अपने कोटे से ज़मा खान को मंत्री बनाया है।
हर समुदाय को संदेश
नीतीश कुमार और एनडीए ने अपनी नई कैबिनेट में यह साफ संदेश दिया है कि बिहार के हर सामाजिक और जातीय वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलेगा। अगड़ी जातियों से लेकर पिछड़ी, अति-पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक—सबको मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी गई है। यह कैबिनेट सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि बिहार के जातीय संतुलन का एक बड़ा गणित भी दिखाती है।



