Tuesday, April 21, 2026
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Iran War: वार्ता है बहाना -ईरान की जमीन है निशाना – ये है रूस का बताना

Iran War: वार्ता या बहाना? रूस का दावा – अमेरिका और इजरायल ईरान पर ग्राउंड इनवेजन की तैयारी में..

Iran War: वार्ता या बहाना? रूस का दावा – अमेरिका और इजरायल ईरान पर ग्राउंड इनवेजन की तैयारी में..

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बीच रूस ने एक बड़ा दावा किया है। रूस का कहना है कि यह बातचीत असल में एक कूटनीतिक आवरण (कवर) है और इसके पीछे अमेरिका तथा इजरायल का असली मकसद ईरान पर ग्राउंड इनवेजन की तैयारी करना है।

रूस की सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायल इस वार्ता का इस्तेमाल केवल समय हासिल करने के लिए कर रहे हैं, ताकि वे जमीन पर अपनी सैन्य ताकत को मजबूत कर सकें। यही वजह है कि पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ी है।

अमेरिकी सेना का भारी जमावड़ा

रूसी रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय मिडिल ईस्ट में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इनमें शामिल हैं:

11वीं एक्सपेडिशनरी कॉर्प्स के करीब 2,500 मरीन।

82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1,200 से ज्यादा सैनिक।

डेल्टा फोर्स और 75वीं रेंजर रेजिमेंट जैसी एलीट यूनिट्स।

इसके अलावा, अमेरिका ने पिछले दो दिनों में भी अतिरिक्त सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजा है।

 हवा और समुद्र में भी ताकत का प्रदर्शन

अमेरिका ने सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि हवा और समुद्र में भी अपनी ताकत बढ़ा दी है।

करीब 500 एयरक्राफ्ट, जिनमें 250 से ज्यादा टैक्टिकल फाइटर जेट्स शामिल हैं, अलग-अलग एयरबेस पर तैनात हैं।

20 से ज्यादा अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद हैं।

यूएसएस बॉक्सर की अगुवाई में 2,500 मरीन के साथ एक एम्फीबियस अटैक ग्रुप और यूएसएस जॉर्ज डब्ल्यू बुश एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अरब सागर की तरफ बढ़ रहे हैं।

रूस का कहना है कि इनकी तैनाती का समय बेहद अहम है, क्योंकि यह उस वक्त हो रहा है जब अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर खत्म होने वाला है।

ग्राउंड इनवेजन कैसा हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका सच में ग्राउंड ऑपरेशन करता है, तो यह पारंपरिक युद्ध जैसा नहीं होगा। आधुनिक युद्ध की रणनीति बदल चुकी है। अब सीधे टैंक और सैनिक भेजने के बजाय स्मार्ट वॉरफेयर पर जोर है।

इसमें छोटे-छोटे लेकिन बेहद सटीक हमले किए जाते हैं, जैसे:

किसी अहम रडार सिस्टम को बंद कर देना।

किसी पोर्ट की बिजली ठप कर देना।

कमांड नेटवर्क को हैक करना।

ईरान के लिए खार्ग आइलैंड जैसे रणनीतिक ठिकाने बेहद अहम हैं। अगर इन “चोक पॉइंट्स” पर हमला होता है, तो बिना बड़े युद्ध के ही ईरान को झुकने पर मजबूर किया जा सकता है।

 ट्रंप का ट्रैक रिकॉर्ड

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रिकॉर्ड भी इस शक को मजबूत करता है। इससे पहले भी ट्रंप ने बातचीत के दौरान अचानक हमले किए हैं। उन्होंने खुद कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान के पास तब तक तैनात रहेगी, जब तक तेहरान उनकी शर्तें नहीं मान लेता। इसका मतलब साफ है कि बातचीत के साथ-साथ दबाव की रणनीति भी जारी है।

 रूस की चिंता

रूस और ईरान के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो इसका असर सीधे रूस पर भी पड़ेगा। यही वजह है कि मॉस्को लगातार सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देता रहा है और कूटनीति पर जोर देता है।

रूस को डर है कि अगर यह संघर्ष बढ़ता है, तो पूरा मिडिल ईस्ट एक बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है। इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर बल्कि ग्लोबल ऑयल मार्केट और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।

 आगे क्या?

फिलहाल हालात बेहद नाजुक हैं। एक तरफ बातचीत जारी है, दूसरी तरफ हथियारों का जमावड़ा बढ़ रहा है। यह तय करना मुश्किल है कि अमेरिका सच में शांति चाहता है या फिर यह सिर्फ एक रणनीतिक चाल है। लेकिन इतना साफ है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे। अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है।

रूस का दावा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। जहां अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशें हो रही हैं, वहीं अमेरिका और इजरायल की सैन्य गतिविधियां युद्ध की तैयारी का संकेत दे रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या बातचीत से समाधान निकलता है या हालात युद्ध की ओर बढ़ते हैं।

(त्रिपाठी पारिजात)

 

 

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