Pakistan Occupied Kashmir: क्या है पूरा मामला पाकिस्तानी ऑक्यूपाइड कश्मीर और पाकिस्तानी सेना के बीच – क्या हंगामा चल रहा है आज की तारीख में पीओके में?
पहले समझें – JAAC क्या है?
ज्वाइन्ट आवामी ऐक्शन कमेटी (जैक/ JAAC) पीओके की एक बड़ी सिविल सोसाइटी संगठन है जो पिछले दो सालों से लगातार आम लोगों की समस्याओं के लिए आवाज उठाती रही है – बढ़ती महंगाई, बिजली की किल्लत, बेरोजगारी, भारी यूटीलिटी बिल्स, और पाकिस्तानी प्रशासन की मनमानी। सीधे शब्दों में कहें तो यह वो संगठन है जो पीओके के लोगों की बात करता था।
असली झगड़ा शुरू कहाँ से हुआ?
विवाद की शुरुआत हुई एक फैसले से – पाकिस्तान ने पीओके की 45 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए रिजर्व कर दीं जो पाकिस्तान के बाकी हिस्सों में रहते हैं। ज्वाइन्ट आवामी ऐक्शन कमेटी (जैक) और स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पीओके के असली निवासियों की राजनीतिक आवाज कमजोर हो जाती है।
फिर क्या हुआ? – घटनाओं का क्रम
5 जून 2026:
पीओके पुलिस ने ज्वाइन्ट आवामी ऐक्शन कमेटी (जैक) के कार्यकर्ता शाहजेब हबीब को गोली मार दी। बाद में उनकी मौत हो गई। ह्यूमन राइट्स फाउन्डेशन के अनुसार हादसे के समय कोई ऐसी स्थिति नहीं थी जिसमें पुलिस को गोली चलाने की जरूरत पड़ती।
6 जून 2026
पाकिस्तान सरकार ने ज्वाइन्ट आवामी ऐक्शन कमेटी (जैक) पर पूरी तरह बैन लगा दिया – वो भी आतंकवाद विरोधी कानून के तहत। एक जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठन को आतंकी घोषित करना कई लोगों को नागवार गुजरा।
7 जून 2026 – खून-खराबा
रावलाकोट में शाहजेब हबीब का शव जब अस्पताल के मुर्दाघर में लाया गया, तो बाहर जमा समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इसमें कम से कम 7 प्रदर्शनकारी और 4 पुलिसकर्मी मारे गए।
8-9 जून 2026
हिंसा और बढ़ी – 8 और 9 जून को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हजार से ज्यादा लोगों को गोली मार दी, जिनमें एक महिलायें भी शामिल हैं। कुल मृतकों का आंकड़ा अलग-अलग रिपोर्ट्स में अलग है – कुछ रिपोर्ट्स 30 से ज्यादा मौतें बता रही हैं, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए।
JAAC ने क्या करने की कोशिश की?
ज्वाइन्ट आवामी ऐक्शन कमेटी (जैक) ने 9 जून के लिए एक 300 किलोमीटर का लॉन्ग मार्च निकालने का ऐलान किया था – भिम्बर से मुजफ्फराबाद तक। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे रोकने की पूरी कोशिश की। सेना तैनात कर दी गई, मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया, जैक का मुख्यालय सील कर दिया गया, और कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या रही?
एमनेस्टी इन्टरनेशनल ने पाकिस्तान से तुरंत स्थिति को शांत करने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार बल प्रयोग सीमित रखने की मांग की।
इन्टरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउन्डेशन ने कहा कि एक शांतिपूर्ण आंदोलन को “आतंकी संगठन” घोषित करना गैरकानूनी है और यह संगठन बनाने की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
भारत ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान भटकाने का आरोप लगा। इसके बाद सोशल मीडिया पर “All Eyes on POK” और “Azadi” ट्रेंड करने लगे।
बड़ी तस्वीर क्या है?
यह कोई अचानक भड़का हुआ विवाद नहीं है। 27 जुलाई को पीओके में चुनाव होने हैं, और ऐन उससे पहले इस तरह की कार्रवाई ने पूरे इलाके को बारूद के ढेर में बदल दिया है। जो लोग दशकों से बुनियादी हक मांग रहे थे – बिजली, रोजगार, महंगाई से राहत – उन्हें अब “आतंकवादी” बताया जा रहा है। पाकिस्तानी फौज की बंदूकें जिस दिशा में तनी हैं, वो दुश्मन नहीं – अपने ही लोग हैं।
(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)



