Wednesday, May 27, 2026
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Iran Vs Israel: मोज्तबा ने कहा – ‘इजराइल तो कैन्सर है’ – जवाब मिला: आपके बाप ने भी यही कहा था !

Iran Vs Israel: इजराइल पर मोजतबा खामेनेई के बयान से बढ़ा तनाव - बदले में इजराइली मंत्री ने दिया दिलतोड़ जवाब ! ..

Iran Vs Israel: इजराइल पर मोजतबा खामेनेई के बयान से बढ़ा तनाव – बदले में इजराइली मंत्री ने दिया दिलतोड़ जवाब ! ..

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के इजराइल विरोधी बयान के बाद इजराइली विदेश मंत्री गिदोन साआर ने तीखा जवाब दिया। अमेरिका-ईरान तनाव, ड्रोन हमले और खाड़ी क्षेत्र को लेकर बढ़ी बयानबाजी से पश्चिम एशिया में नया तनाव पैदा हो गया है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और इजराइल के बीच बयानबाजी का नया दौर शुरू हो गया है। ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने इजराइल को लेकर बेहद तीखा बयान दिया, जिसके बाद इजराइल की ओर से भी तुरंत जवाब आया। दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया पर चल रही यह जुबानी जंग अब अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है।

मामला तब शुरू हुआ जब मोजतबा खामेनेई ने अपने सोशल मीडिया संदेश में इजराइल को “कैंसर का ट्यूमर” बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल का अस्तित्व अपने अंतिम दौर की तरफ बढ़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ भी तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया।

अपने संदेश में खामेनेई ने लिखा कि “ज़ायोनी शासन कमजोर हो रहा है और इजराइल नाम का कैंसर अब अपने अंत के करीब पहुंच रहा है।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि “अमेरिका मुर्दाबाद” और “इजराइल मुर्दाबाद” जैसे नारे दुनिया के दबे-कुचले लोगों की आवाज बनेंगे।

इन बयानों के कुछ ही घंटों बाद इजराइल के विदेश मंत्री Gideon Sa’ar ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलटवार किया। उन्होंने बिना सीधे नाम लिए तंज भरे अंदाज में लिखा कि यह बयान उन्हें काफी परिचित लग रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें याद है कि इसी उपनाम वाले एक अन्य व्यक्ति ने भी पहले ऐसे ही बयान दिए थे।

साआर का यह बयान सीधे तौर पर खामेनेई के पिता और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता की ओर इशारा माना जा रहा है, जिन्होंने भी कई बार इजराइल के खिलाफ इसी तरह के बयान दिए थे। इजराइली मंत्री ने अपने संदेश के अंत में यह भी पूछा, “वैसे, आप कहां हैं?” इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है।

पुराने बयान का फिर हुआ जिक्र

मोजतबा खामेनेई ने अपने हालिया संदेश में लगभग दस साल पुराने एक बयान को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि इजराइल आने वाले 25 वर्षों तक टिक नहीं पाएगा। यह बयान पहले भी ईरानी नेतृत्व की तरफ से कई बार सामने आ चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की तरफ से इस तरह के बयान ऐसे समय में आए हैं जब क्षेत्र में अमेरिका और इजराइल की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से तेज हुआ है, जिसका असर पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे रहा है।

खाड़ी देशों को लेकर भी बड़ा बयान

मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिका के लिए पहले जैसे सुरक्षित सहयोगी नहीं रहेंगे। उनके मुताबिक भविष्य में यह इलाका अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाएगा।

ईरानी नेतृत्व का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार मजबूत कर रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस बयान के जरिए अमेरिका समर्थित देशों को भी चेतावनी देना चाहता है।

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव

हालांकि कुछ समय पहले संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने दावा किया कि उसने दक्षिणी ईरान के पास अपनी सुरक्षा में कार्रवाई करते हुए कुछ नौकाओं को निशाना बनाया।

इसके जवाब में Islamic Revolutionary Guard Corps यानी आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने अमेरिका के एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि इन दावों को लेकर दोनों देशों की तरफ से अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है।

सोशल मीडिया बना नया युद्धक्षेत्र

ईरान और इजराइल के बीच यह टकराव अब सिर्फ सैन्य या राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों देशों के नेता और अधिकारी सोशल मीडिया के जरिए भी एक-दूसरे पर लगातार हमला बोल रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। पहले से ही गाजा, लेबनान, सीरिया और खाड़ी क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। ऐसे में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती जुबानी जंग भविष्य में बड़े टकराव का संकेत भी मानी जा रही है।

दुनिया की नजर पश्चिम एशिया पर

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय फिलहाल पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहीं, तो पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह तनाव केवल शब्दों तक सीमित रहेगा या आगे किसी बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।

(त्रिपाठी पारिजात)

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