Cockroach Janata Party: पार्टी टूटने और सत्ता हमेशा के लिये हाथ से निकल जाने का डर सता रहा है केजरीवाल को – इसलिये CJP नाम से एक पेज बना कर प्रोपोगंडा शुरू कर दिया..
केजरीवाल अब भी वही गलती कर रहा है जो 14 साल से लगातार करता आ रहा था। प्रोपोगंडा फैलाकर आप मनमोहन सिंह की सरकार गिरा सकते थे मगर नरेंद्र मोदी की नहीं।
हर 2-4 साल मे एक बार कोई ऐसी ही सोशल मीडिया की क्रांति होती है, मेटा एड्स रन करके ये अपने फॉलोवर्स बढ़ा लेते है। बेरोजगारों की एक छोटी टुकड़ी लाइक कमेंट करने के काम पर लगा देते है लेकिन जैसे ही जमीनी असर की बात आती है उसमे कोई परिवर्तन नहीं होता। चुनाव मे युवा बीजेपी के साथ ही खड़ा मिलता है।
सरकार युवाओं को इतना विश्वास दिलाने मे सफल हुई है कि भारत का नवाचार नेपाल या श्रीलंका जैसा नहीं है। यहाँ पाकिस्तान या बांग्लादेश की तर्ज पर दंगे होना असंभव के बहुत करीब है। लेकिन प्रयास तो करने चाहिए वही केजरीवाल कर रहा है, केजरीवाल विशेष रूप से इसलिये क्योंकि ये CJP का जो नया गुब्बारा फुला है उसके सीधे लिंक्स केजरीवाल से ही है।
आंदोलन से बनी पार्टी है, फिर से आंदोलन का ही विकल्प तलाश करेंगी, इसके अलावा कांग्रेस भी है लेकिन कांग्रेस एक क्लासलेस पार्टी है। यदि ये कांग्रेस कर रही होती तो राहुल गाँधी ने अब तक एक सेल्फ गोल तो दागा होता। अभी NEET को लेकर गुस्सा है तो कही ना कही केजरीवाल ही है जिसमे इसे भुनाने की क्षमता है।
लेकिन प्रोपोगंडा फैलाना ही था तो थोड़ा स्टेप मे फैलाते, पहले धर्मेंद्र प्रधान को निशाना बनाते और उससे जुड़े लोगो को घेरते लेकिन वही 2011 वाला ढर्रा अपनाया और पूरी सरकार को घेर लिया।
जो लोग 2005 या उसके बाद जन्मे हैं, वे ध्यान दें कि मनमोहन सरकार के गिरने मे अन्ना आंदोलन की 25% से ज्यादा भूमिका नहीं थी। मनमोहन सरकार गिराने मे मुख्य भूमिका खुद मनमोहन सरकार की थी, पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिन्दे, करूणानिधि का खानदान और खुद सोनिया गाँधी इसके जिम्मेदार थे।
आज तो वैश्विक मंदी है लेकिन उन दिनों मध्य पूर्व मे एक रस्सी बम भी फट जाता तो भारत का स्टॉक मार्केट गिर जाता था। चीन की घुसपैठ की खबरें चोरी डकैती की खबरों की तरह रोज आया करती थी, पाकिस्तान ने 2008 मे तो भारत को आतंक की प्रयोगशाला बना रखा था।
दूसरे बड़े घटक थे नरेंद्र मोदी, जिस समय भारत अँधेरे मे डूब रहा था उस समय गुजरात वाइब्रेन्ट हो रहा था। गुजरात ने उस दौर मे कई देशो की विकास दर को मात दे रखी थी, सोशल मीडिया नया नया था तो हिन्दू चेतना का विकास शुरू हो गया था जो पूरी तरह बीजेपी के पक्ष मे गयी।
फिर कही आता है अन्ना आंदोलन, लेकिन केजरीवाल को लग रहा है कि एक आंदोलन करके आप सत्ता पलट सकते है जो कि बकवास है। भारत के युवा ने कभी मनमोहन सिंह के खिलाफ भी पथराव नहीं किया तो नरेंद्र मोदी के खिलाफ कहाँ से दंगे फसाद कर लेगा।
CJP का भी कोई भविष्य नहीं है, आप देखेंगे 4 महीने अभी हर प्लेटफॉर्म पर इनके बोट हर जगह कमेंट्स करेंगे, कुछ पेज पर तो आपको भी आश्चर्य होगा, लेकिन इस अस्थायी हंगामे के बाद फिर हताश होकर बैठ जाएंगे। तकनीक की विशेषता ही यही है कि आप प्रोपोगंडा तो फैला सकते हो लेकिन आंदोलन नहीं।
बाकी नीट वाला प्रकरण गंभीर तो है, धर्मेंद्र प्रधान के विषय मे सरकार को कुछ सोचना तो होगा।
ये एक ऐसा मंत्रालय है जो लगातार नकारात्मक कारणों से सुर्खियों मे है, मनमोहन सरकार की लंका लगाने मे के राजा और कनिमोझी का ही हाथ था। हालांकि अभी अप्रूवल रेटिंग अच्छी है मगर फिर भी सावधानी जरूरी है।
(परख सक्सेना)



