Sunday, July 5, 2026
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Children Porn: बच्चों के अश्लील वीडियो ₹99 में! इंस्टाग्राम विज्ञापन पर सरकारी कार्यवाही -7 दिनों का अल्टीमेटम -जानिये सारा मामला

Children porn: Children Porn: इन्स्टा पर अश्लील विज्ञापनों से मचा बवाल, बच्चों की सुरक्षा को लेकर Meta को सरकार का 7 दिन का नोटिस

Children Porn: इन्स्टा पर अश्लील विज्ञापनों से मचा बवाल, बच्चों की सुरक्षा को लेकर Meta को सरकार का 7 दिन का नोटिस

इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध कंटेंट का प्रचार करने वाले विज्ञापनों के सामने आने के बाद भारत सरकार ने Meta को 7 दिन के भीतर जवाब देने का नोटिस जारी किया है। जानिए पूरा मामला, सरकार की आपत्तियां, Meta का जवाब और भारतीय कानून क्या कहता है।

आपत्तिजनक विज्ञापन के बाद सरकार सख्त, मेटा 7 दिन में दे जवाब

सोशल मीडिया पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि Instagram पर ऐसे विज्ञापन दिखाई दिए, जिनमें कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध डिजिटल कंटेंट तक पहुंच का दावा किया जा रहा था। इस मामले के सामने आते ही केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है और Meta को तत्काल नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और उनसे जुड़ा कोई भी आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत हटाया जाए। सरकार ने साफ कर दिया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े किसी भी प्रकार के कंटेंट के प्रति किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सरकार ने केवल विज्ञापन हटाने को नहीं कहा, एल्गोरिदम पर भी उठाए सवाल

सरकार की चिंता सिर्फ आपत्तिजनक विज्ञापनों तक सीमित नहीं है। मंत्रालय ने Meta से यह भी पूछा है कि आखिर Instagram का एल्गोरिदम ऐसे विज्ञापनों को यूजर्स तक पहुंचाने में कैसे सफल हुआ।

सरकार चाहती है कि कंपनी अपने रिकमेंडेशन सिस्टम और विज्ञापन तंत्र की गहन समीक्षा करे। साथ ही ऐसे तकनीकी बदलाव किए जाएं, जिससे भविष्य में इस तरह की सामग्री का प्रचार या प्रसार पूरी तरह रोका जा सके।

इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

बीबीसी की जांच के बाद बढ़ा मामला

यह विवाद उस समय सामने आया, जब बीबीसी की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि Instagram पर कुछ पेड विज्ञापन दिखाई दिए, जो कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को Telegram चैनलों की ओर भेजा जाता था, जहां बेहद कम रकम लेकर प्रतिबंधित सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था।

इसी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद भारत सरकार ने Meta के अधिकारियों को तलब किया और पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा।

Meta को क्या-क्या करना होगा?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह सबसे पहले ऐसे सभी विज्ञापन और संबंधित कंटेंट को प्लेटफॉर्म से तत्काल हटाए।

इसके अलावा Meta को सात दिनों के भीतर यह भी बताना होगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए वह कौन-कौन से तकनीकी, प्रशासनिक और निगरानी संबंधी कदम उठाएगी।

सरकार यह भी जानना चाहती है कि कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में आखिर ऐसी कौन-सी कमी रह गई, जिसकी वजह से इस तरह के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दिए।

एल्गोरिदमिक प्रमोशन पर भी सरकार की नजर

मंत्रालय ने Meta से यह भी पूछा है कि कहीं Instagram का एल्गोरिदम अनजाने में ऐसे कंटेंट या विज्ञापनों की पहुंच बढ़ाने में तो भूमिका नहीं निभा रहा था।

सरकार ने कंपनी से अपेक्षा की है कि वह अपने एल्गोरिदम की समीक्षा करे और ऐसे बदलाव लागू करे, जिससे किसी भी प्रकार का अवैध या बच्चों के शोषण से जुड़ा कंटेंट यूजर्स तक पहुंचने से पहले ही रोका जा सके।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल कंटेंट हटाना पर्याप्त नहीं है। ऐसे मामलों में रिकमेंडेशन सिस्टम, विज्ञापन जांच प्रक्रिया और ऑटोमेटेड मॉडरेशन तकनीकों को भी लगातार मजबूत करना जरूरी है।

Meta ने क्या कहा?

Meta ने अपने बयान में कहा कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े किसी भी प्रकार के कंटेंट के प्रति कंपनी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है।

कंपनी का कहना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और विशेषज्ञ टीमों की मदद से लगातार ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने का काम करती है।

Meta ने यह भी स्वीकार किया कि अपराधी समय-समय पर नए तरीके अपनाते रहते हैं। इसी वजह से कंपनी अपनी सुरक्षा तकनीकों को लगातार अपडेट करती है और जरूरत पड़ने पर अन्य तकनीकी कंपनियों तथा जांच एजेंसियों के साथ भी जरूरी जानकारी साझा करती है।

भारतीय कानून क्या कहता है?

भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक कंटेंट का निर्माण, प्रकाशन, प्रसारण, प्रचार या वितरण गंभीर अपराध माना जाता है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67(B) के तहत इस तरह की गतिविधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, बच्चों के यौन शोषण को दर्शाने वाली किसी भी तस्वीर, वीडियो या अन्य डिजिटल सामग्री को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आपराधिक कार्रवाई कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही भी तय की जाती है।

पहले भी हुई है कार्रवाई

केंद्र सरकार पहले भी बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध कंटेंट होस्ट करने वाली कई वेबसाइटों को ब्लॉक कर चुकी है। यह कार्रवाई इंटरपोल से प्राप्त सूचनाओं और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। भारत में इस संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) नामित नोडल एजेंसी की भूमिका निभाती है।

इस सप्ताह दूसरी बार जांच के घेरे में आया Meta

दिलचस्प बात यह है कि इसी सप्ताह Meta को दूसरा सरकारी नोटिस भी मिला है।

कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचर’ को लेकर भी कंपनी से जवाब मांगा था।

सरकार को आशंका है कि यदि यह फीचर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किया गया, तो ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध और किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग करने वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।

इसी वजह से सरकार ने Meta से कहा है कि जब तक इस मुद्दे पर उसकी चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को लागू न किया जाए। सूत्रों के अनुसार, WhatsApp फिलहाल इस फीचर की लॉन्चिंग टाल सकता है।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

Instagram से जुड़ा यह पूरा मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कितने तैयार हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियम बनाना काफी नहीं है। AI आधारित निगरानी, मजबूत कंटेंट मॉडरेशन, तेज शिकायत निवारण प्रणाली और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय भी उतना ही जरूरी है।

सरकार की ताजा कार्रवाई इस बात का संकेत है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अब सोशल मीडिया कंपनियों से पहले की तुलना में कहीं अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की अपेक्षा की जा रही है।

(त्रिपाठी पारिजात)

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