Iran-US War: वॉशिंगटन ने अचानक यह विशेष छूट वापस ले ली है। अमेरिका का कहना है कि हाल की घटनाओं ने इस समझौते की बुनियाद ही खत्म कर दी है..मिडिल ईस्ट में हड़कम्प मचा है और अब उन्होंने भी कर ली युद्ध की तैयारी है..
17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी समझौते के बाद उम्मीद की जा रही थी कि कुछ समय के लिए मध्य पूर्व में शांति बनी रहेगी। इसी समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को सीमित स्तर पर कच्चे तेल के उत्पादन, बिक्री और आपूर्ति की छूट भी दी थी। यह राहत 21 अगस्त तक जारी रहने वाली थी।
लेकिन अब वॉशिंगटन ने अचानक यह विशेष छूट वापस ले ली है। अमेरिका का कहना है कि हाल की घटनाओं ने इस समझौते की बुनियाद ही खत्म कर दी है। दूसरी ओर ईरान इसे समझौते का खुला उल्लंघन बता रहा है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।
ट्रंप ने कहा – समझौता अब खत्म
तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उनके अनुसार ईरान के साथ हुआ समझौता अब प्रभावी नहीं रहा।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और अब यह समझौता समाप्त माना जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया, जब दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले जारी हैं।
ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों ने संयम नहीं बरता तो स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बना संघर्ष का केंद्र
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है।
अमेरिका का आरोप है कि इस मार्ग से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया। इनमें कतर और सऊदी अरब से जुड़े तेल टैंकर भी शामिल बताए जा रहे हैं।
वॉशिंगटन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसने जवाबी सैन्य कार्रवाई की। इसी के तहत ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए गए।
अमेरिका का दावा – 80 से ज्यादा ठिकानों पर कार्रवाई
अमेरिकी सेना के अनुसार उसकी जवाबी कार्रवाई बेहद व्यापक रही। अधिकारियों ने बताया कि 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इन लक्ष्यों में वायु रक्षा प्रणाली, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार, जहाज रोधी मिसाइल सिस्टम और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की 60 से ज्यादा छोटी सैन्य नौकाएं शामिल थीं।
अमेरिका का दावा है कि इस कार्रवाई से समुद्री व्यापार को नुकसान पहुंचाने की ईरान की क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया।
IRGC ने कहा कि उसने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी सेना के अनुसार इस अभियान में अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया।
हालांकि अमेरिका और संबंधित देशों की ओर से इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बहरीन में कई बार बजे एयर रेड सायरन
तनाव बढ़ने के साथ ही बहरीन में पूरे दिन कई बार एयर रेड सायरन बजाए गए।
गृह मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और तुरंत अपने सबसे नजदीकी सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
सरकार ने यह भी कहा कि सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कुवैत ने ड्रोन और मिसाइलें मार गिराने का दावा किया
कुवैत ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली दो बैलिस्टिक मिसाइलों और 13 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक सभी संभावित खतरों को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
घटना के बाद पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा मजबूत कर दी गई है।
ईरान का दावा – अमेरिकी ड्रोन भी गिराया
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बुशेहर प्रांत के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया।
तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई अमेरिकी हवाई गतिविधियों के जवाब में की गई।
हालांकि अमेरिका ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
बंदरगाह शहरों में सुनाई दिए धमाके
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दक्षिणी ईरान के कई हिस्सों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
सीरिक, बंदर अब्बास, बुशेहर और केश्म द्वीप के आसपास लोगों ने विस्फोटों की जानकारी दी।
हालांकि इन घटनाओं में कितना नुकसान हुआ है और कितने लोग प्रभावित हुए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री की इजरायल यात्रा टली
इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की प्रस्तावित इजरायल यात्रा भी स्थगित कर दी गई है।
यह उनके रक्षा मंत्री बनने के बाद पहली आधिकारिक इजरायल यात्रा होने वाली थी।
सूत्रों का कहना है कि मौजूदा सैन्य हालात और बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
इजरायली मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि ईरान के खिलाफ अगली सैन्य कार्रवाई की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।
यूरोप ने एयरलाइंस को जारी की चेतावनी
यूरोपीय संघ की विमानन सुरक्षा एजेंसी ने एयरलाइंस को सलाह दी है कि वे 31 अगस्त तक ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र से बचें।
इसके अलावा बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इजरायल और सऊदी अरब के ऊपर उड़ान भरते समय भी अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर नागरिक विमानों पर भी पड़ सकता है।
ओमान और कतर ने जताई चिंता
मध्य पूर्व के कई देशों ने लगातार बढ़ते सैन्य तनाव पर चिंता व्यक्त की है।
ओमान ने बहरीन, कुवैत और व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
कतर ने भी कहा कि इस तरह के हमले पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं और सभी देशों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
लेबनान में भी बढ़ी हलचल
तनाव सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है।
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार इजरायली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं।
हालांकि इन हमलों में किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।
दुनिया की नजर अब अगले कदम पर
मध्य पूर्व में तेजी से बदलते घटनाक्रम ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है, तो दूसरी ओर ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानकर लगातार जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है।
दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य गतिविधियां जिस रफ्तार से बढ़ रही हैं, उसने पूरी दुनिया को एक बार फिर बड़े युद्ध की आशंका के बीच ला खड़ा किया है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर मध्य पूर्व का यह संघर्ष और भी व्यापक रूप लेता है।
(त्रिपाठी पारिजात)



