Thursday, July 9, 2026
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Poetry by Manmeet Soni: नए “समय” के जोकरों के नाम

Poetry by Manmeet Soni:  कमीनेपन के घटिया जोकरों पर भी कलम चला दी युवा कवि मनमीत ने..और चलाई भी तो क्या गजब चलाई..आनन्द लीजिये आप भी..

Poetry by Manmeet Soni:  कमीनेपन के घटिया जोकरों पर भी कलम चला दी युवा कवि मनमीत ने..और चलाई भी तो क्या गजब चलाई..आनन्द लीजिये आप भी..

 

वे दावा करते हैं
नए समय के नए चुटकुले और नई हँसी उनके पास है
वे
बाप को कहते हैं
मेरे बाप के पास लिंग के अलावा क्या था
वे
माँ को कहते हैं
मेरी माँ के पास योनि के सिवा क्या था
फिर वे दोनों को मिला देते हैं
फिर वे बताते हैं कि आज से पहले यह जोकराना बात किसी ने नहीं की, इसलिए आप सब हंसिये :
फिर सब हँसते हैं
और वे रोते हैं
जो सुबह पहले ही मेरी तरह
मम्मी पापा की तस्वीर देखते हैं
उसे चूमते हैं
भगवान से दुआ करते हैं :
इन्हें कुछ हो नहीं जाए भगवान!

इन जोकरों की नहीं
उनकी शिनाख्त ज़रूरी है
जो इन्हें देख रहे हैं
जो करोड़ों में देख रहे हैं
जो इन्हें देख कर हँस रहे हैं
उन्हें इस बात का गर्व है कि वे नए समय के नए चुटकुलों पर नई हँसी हँस रहे हैं!

कहाँ से आ गए ये कमीने
इतने नीच
इतने पतित
कि इन्हें छू भी नहीं सकती रामचरित मानस की कोई चौपाई
कि ये सीता माँ के लिए भी कह देंगे :
“रोमांस का मन तो किया होगा
रावण जैसा कूल ड्यूड देखकर”
ये हनुमान को मंकी कह सकते हैं
ये गणेश को एलीफैंट कह सकते हैं
ये कबीर को ब्लडी इलिटरेट कह सकते हैं
ये मजनू को चूतिया कह सकते हैं जो लैला के प्यार में मर गया
प्यार
करुणा
वफ़ा
ईमानदारी
ज़मीर
ये सब पर हँस सकते हैं
इतिहास पर थूक सकते हैं
मिथकों पर पेशाब कर सकते हैं
प्रतीकों को भग्न कर सकते हैं
ये अलाउद्दीन और औरंगजेब से भी खतरनाक हैं
क्योंकि अलाउद्दीन और औरंगजेब को कम से कम पता तो था
कि वे क्या कर रहे हैं?

सेक्स
सेक्स
सेक्स
यही है इनका अभीष्ट और प्रिय
लेकिन ये सेक्स के बारे में भी तो कुछ नहीं जानते
ये लिंग स्तन योनि जानते हैं
इनसे अधिक जानता है आठवीं कक्षा का सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला योगेश :
कि आज सुनीता इसलिए नहीं आई
कि उसका पेट दुःख रहा था
कि आज उसकी तबियत ख़राब होगी
कि मैं उसको मेरी फेयर कॉपी दे आऊंगा शाम को!

इन जोकरों ने
जोकरों का नाम बदनाम कर दिया
जोकर तो राजकपूर था
जोकर तो चार्ली चपलिन था
जोकर तो क़ादर खान था
अरे जोकर तो हमारा सदाबहार गोविंदा था कमीनो
जो करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, नीलम, सुष्मिता सेन को पटाने की कोशिश करता था
तो हँस पड़ती थी मेरी मम्मी
और पापा को कहना पड़ता था :
पिक्चर देखने दे यार!

हरामज़ादो!
क्या तुम माँ की कोख से नहीं
सूअर की टट्टी से पैदा हुए हो?
क्या तुम्हारी परवरिश
किसी शराब के ठेके पर हुई है?
क्या तुमने जिन लड़कियों को चूमा
उत्तेजित भर हुए
उसकी ख़ुशबू ने चूमने की तमीज़ नहीं सिखाई?

गंदी नाली के कीड़ो!
मेरे फोन में
रीलों के सहारे मत आया करो
मैं नहीं देखना चाहता तुम्हारा चेहरा
मैं
तुम में और बलात्कारियों में कोई फ़र्क़ नहीं करता
वे शरीर का बलात्कार करते हैं
तुम आत्मा का बलात्कार करते हो…

पिशाचो!
पानी के बजाय
पेशाब पीना बंद करो
गू के बजाय
ताती ताती चपातियाँ खाओ
वीर्य में नाक डुबाने के बजाए
कटे हुए तरबूज़ पर गड़ाओ अपने दाँत
शिवलिंग को देखो ध्यान से
इसमें तुम्हारी चिकित्सा छुपी है

हंसो
लेकिन हँसी में मत उड़ाओ दुनिया को
चुटकुले सुनाओ
लेकिन चुटकुले को चुटकुला मत समझो
जो चाहे करो
लेकिन यह सोच कर करो
कि तुम्हें हर समय एक बच्चा देख रहा है
जो चाहे बोलो
लेकिन उनकी भी सुनो
जिन्होंने बोलने के लिए मंत्र रचे हैं

ऐ नए समय के जोकरो!
तुम्हें देख कर ऐसा क्यों लगता है
ट्रम्प नहीं
नेतन्याहु नहीं
पुतिन नहीं
किम जोंग नहीं
असली खतरा तो तुमसे है
मैं
एक साधारण सा कवि
इस नीचता और कमीनगी के 440 किलो यूरेनियम को कहाँ ठिकाने लगाऊं?
ऐसा क्या करूँ
कि तुम्हें भाषा पर भरोसा हो जाए
चुप्पी पर भाषा से भी ज़्यादा
और
संकेतों पर
तुम्हारी आस्था का विकास हो!
(मनमीत सोनी)
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