Speak Sanskrit: योगजनक महर्षि पतंजलि संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर के साथ विश्व योग दिवस समारोह सम्पन्न
पटना २२जून। विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना की ओर से आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अन्तर्गत आयोजित योगजनक महर्षि पतंजलि स्मृतौ अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर्जालीय संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर के साथ विश्व योग दिवस समारोह रविवार को संस्कृतमय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
यह संस्था द्वारा आयोजित लगातार 45 वां संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर था, जिसमें देश-विदेश से के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों के प्राचार्य , आचार्य,सह आचार्य एवं प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहा योग से ही नीरोग रहा जा सकता है एवं शारीरिक और मानसिक तनाव दूर हो सकता है। महर्षि पतंजलि रचित योगसूत्र का अध्ययन अति आवश्यक है।
अपने उद्घाटन भाषण में आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के प्रधान संरक्षक एवं पूर्वगृह सचिव डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि योग दैनिक जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अष्टांगयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता प्रो रागिनी वर्मा ने नियमित योग की आवश्यकता बताई।
महर्षि पतंजलि योगदर्शन पर विस्तार से चर्चा की। विशिष्ट अतिथि बी डी महाविद्यालय के पालि विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एचके सिंह ने कहा कि योग जीवन शैली सुधारने का असरदार माध्यम है।मानव विकास के लिए योग कुंजिका है।
इस अवसर पर अभियान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उग्र नारायण झा एवं डॉ लीना चौहान, डॉ नीरा कुमारी, डॉ विश्वजीत रुद्रपाल, डॉ डिम्पल, दयानी शारदेय, वन्दना पटेरिया, उमा हेनोते ने भी योगजनक महर्षि पतंजलि के योगदानों पर विस्तार से चर्चा की तथा संस्कृत भाषा में विचार व्यक्त करने के लिए शिविर में उपस्थित होने की सलाह दी।
उग्र नारायण झा ने वैदिक मंगलाचरण,आगत अतिथियों का स्वागत प्रो रागिनी वर्मा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ लीना चौहान, एवम् ऐक्य मन्त्र डॉ नीरा कुमारी ने प्रस्तुत किया। आगामी संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर ग्यारह जुलाई से महागुरु गोरक्षनाथ जी के स्मृति में संचालित किया जाएगा।



