Speak Sanskrit: देव भाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार की दिशा में डॉक्टर मुकेश कुमार ओझा के मार्गदर्शन व सक्रिय प्रयत्न अभियान रूप में निरंतर गतिमान हैं..अब प्रारंभ हुआ बिहार की राजधानी में 45वां सत्र..
पटना १२ जून। विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना की ओर से आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अन्तर्गत आयोजित योगजनक महर्षि पतंजलि स्मृति दस दिवसीय अन्तर्जालीय अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर का गुरुवार को भव्य उद्घाटन किया गया।
विशेष बात ये है कि यह संस्कृत प्रचार-प्रसार अभियान के अन्तर्गत आयोजित निरन्तर 45वां शिविर है, जिसमें देश-विदेश के संस्कृत विद्वानों की सहभागिता रही।
शिविर का विधिवत उद्घाटन अभियान के प्रधान संरक्षक एवम् उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह सचिव डॉ अनिल कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस पर संस्कृत सम्भाषण शिविर का आयोजन अति आवश्यक है क्योंकि योग के कारण ही शरीर एवं मन स्वस्थ रहता है। चित्तवृत्तियों को रोकना एवम् आत्मा को परमात्मा से मिलाने की क्रिया योग है। मुख्यातिथि प्रोफेसर डॉ रागिनी वर्मा ने कहा कि योगसूत्र योगदर्शन का मूल ग्रन्थ है , जिसके रचयिता महर्षि पतंजलि थे।
अपने अध्यक्षीय भाषण में आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा ने भारत के सभी लोगों से योगसूत्र को अध्ययन करने की अपील की तथा संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर में उपस्थित होने को कहा।
इस अवसर पर अभियान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उग्र नारायण झा , विशिष्टातिथि डॉ अनिल कुमार चौबे , डॉ महेश केवट एवं नीरा कुमारी सहित डॉ रागनी कुमारी, डॉ विश्वजीत रुद्रपाल, श्री देवेश प्रकाश, दयानी शारदेय , वन्दना पटेरिया, डॉ डिम्पल ने भी संस्कृत भाषा, व्याकरण एवं दर्शन में महर्षि पतंजलि के योगदानों का विस्तार से प्रकाश डाला।
वैदिक मंगलाचरण उग्र नारायण झा,आगत अतिथियों का स्वागत प्रो रागिनी वर्मा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ महेश केवट एवं ऐक्य मन्त्र डॉ रागनी कुमारी ने प्रस्तुत किया।



