Iran-US War: ट्रंप के बड़े ऐलान के बाद फिर भड़की जंग! होर्मुज से बहरीन तक बढ़ा तनाव, क्या मिडिल ईस्ट में शुरू होने जा रहा है नया महायुद्ध?
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए हैं। जानिए ट्रंप के बयान, ईरानी जवाब, बहरीन, कुवैत, कतर और पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ रहे असर की पूरी कहानी।
ईरान और अमेरिका के बीच फिर बढ़ा तनाव, युद्ध जैसे हालात
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। कुछ दिन पहले तक जिस अस्थायी संघर्ष विराम और समझौते की चर्चा हो रही थी, अब वह लगभग खत्म होता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान और उसके तुरंत बाद हुई सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में नए संकट की आशंका पैदा कर दी है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि दुनिया की नजरें एक बार फिर ईरान और अमेरिका पर टिक गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन महत्वपूर्ण व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद हुई। अमेरिका ने आरोप लगाया कि इन जहाजों को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डालने की कोशिश की गई। वॉशिंगटन ने इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती माना और जवाबी सैन्य कार्रवाई का फैसला किया।
अमेरिका ने किया बड़ा सैन्य हमला
अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार, जहाज रोधी मिसाइल सिस्टम और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की कई छोटी नौकाओं को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक हाल के दिनों में जिन जहाजों को निशाना बनाया गया, उनमें अलग-अलग देशों के तेल टैंकर भी शामिल थे। इसी वजह से जवाबी कार्रवाई को जरूरी बताया गया।
तेल कारोबार को दी गई राहत भी वापस ली
सिर्फ सैन्य कार्रवाई ही नहीं, अमेरिका ने आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा कदम उठाया। जून में हुए एक समझौता ज्ञापन के तहत ईरान को सीमित स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन, बिक्री और निर्यात करने की जो विशेष छूट दी गई थी, उसे भी समय से पहले समाप्त कर दिया गया।
यह छूट अगस्त तक जारी रहने वाली थी, लेकिन वॉशिंगटन ने अचानक इसे रद्द कर दिया। माना जा रहा है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, क्योंकि तेल निर्यात उसकी आय का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है।
ट्रंप का बड़ा बयान
तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब समाप्त हो चुका है।
ट्रंप के इस बयान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले हो रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई दे रही है।
ईरान ने भी दिखाई आक्रामकता
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरानी सेना ने साफ कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का करारा जवाब दिया जाएगा।
ईरान के सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले किए गए समझौतों और संघर्ष विराम की भावना का उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन इन घोषणाओं ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता और बढ़ा दी है।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा
IRGC ने दावा किया कि बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाया गया। इसके अलावा ईरान ने यह भी कहा कि उसने बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ ड्रोन हमला किया।
इन दावों के बाद बहरीन में कई बार एयर रेड सायरन बजाए गए। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की। उधर कुवैत ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने दो बैलिस्टिक मिसाइलों और 13 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ।
(त्रिपाठी पारिजात)



