चीन ने पाकिस्तान को कुल 8 नई हंगोर क्लास AIP पनडुब्बियां देने का फैसला किया है, जो अत्याधुनिक तकनीक से बनी हैं और लंबे समय तक पानी के नीचे रहकर ऑपरेशन कर सकती हैं। माना जा रहा है कि वर्ष 2028 तक सभी पनडुब्बियां पाकिस्तान की नौसेना का हिस्सा बन जाएंगी। इन पनडुब्बियों की खासियत यह है कि ये स्टील्थ क्षमता वाली हैं, यानी पानी के अंदर रहते हुए इनका पता लगाना कठिन होता है।
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान की नौसेना आकार में छोटी है, जबकि भारत के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर, कुल 19 पनडुब्बियां (जिनमें से दो परमाणु क्षमता वाली हैं) और 13 शक्तिशाली डेस्ट्रॉयर मौजूद हैं। इसी वजह से भारतीय नौसेना कुल शक्ति के मामले में पाकिस्तान की तुलना में लगभग पाँच गुना अधिक सक्षम और पूरी तरह तैयार मानी जाती है।
चीन पाकिस्तान के लिए जो 8 हंगोर क्लास सबमरीन बना रहा है, वे तकनीकी रूप से बेहद उन्नत हैं। एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी AIP तकनीक से लैस होने के कारण ये पनडुब्बियां लंबे समय तक समुद्र की सतह पर आए बिना ऑपरेट कर सकती हैं। इनका पहला यूनिट पाकिस्तान को वर्ष 2026 में मिलने की संभावना है, जिसके बाद 2028 तक बाकी सभी पनडुब्बियां भी नौसेना में शामिल हो जाएंगी। लगभग 5 अरब डॉलर की इस बड़ी डील से पाकिस्तान की समुद्री क्षमता मजबूत तो होगी, लेकिन भारत की नौसैन्य शक्ति इससे कहीं अधिक विस्तृत और बहुआयामी है।
पाकिस्तान को मिल रही हंगोर क्लास पनडुब्बियां कितनी प्रभावी हैं?
ये सबमरीन चीन की टाइप 039A युआन क्लास का निर्यात संस्करण हैं। कुल 8 पनडुब्बियों में से 4 चीन में और बाकी 4 पाकिस्तान में बनाई जा रही हैं। इनका वजन लगभग 2800 टन है और लंबाई करीब 77 मीटर होती है। यह सतह पर लगभग 18 नॉट और पानी के अंदर करीब 20 नॉट की रफ्तार से चल सकती हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा उनका AIP सिस्टम है, जिसके कारण वे लगभग 2 से 3 सप्ताह तक समुद्र की सतह पर आए बिना लगातार पानी के अंदर संचालित रह सकती हैं, और इनसे काफी कम आवाज़ उत्पन्न होती है, जिससे इनका पता लगाना कठिन होता है।
इन पनडुब्बियों में 6 टॉरपीडो ट्यूब लगाए गए हैं, जिनसे एंटी-शिप मिसाइलें, टॉरपीडो और संभवतः बाबर-3 क्रूज़ मिसाइल भी दागी जा सकती है, जिसमें परमाणु क्षमता भी शामिल हो सकती है। इनका संचालन लगभग 38 से 45 सदस्यों के दल द्वारा किया जाएगा। पाकिस्तान की मौजूदा पुरानी पनडुब्बियों की तुलना में यह काफी सक्षम हैं, जिससे समुद्र में भारत के जहाजों के लिए थोड़ी अधिक चुनौती बढ़ सकती है।
2025 में पाकिस्तान नौसेना की वास्तविक क्षमता क्या है?
पाकिस्तान के पास इस समय लगभग 120 से 130 जहाज हैं, लेकिन इनमें कोई भी एयरक्राफ्ट कैरियर या डेस्ट्रॉयर शामिल नहीं है। फिलहाल पाकिस्तान की नौसेना में करीब 8 से 9 पनडुब्बियां मौजूद हैं, जिनमें पुरानी अगोस्ता क्लास और कुछ छोटी मिजेट सबमरीन शामिल हैं। हंगोर क्लास पनडुब्बियों के आने के बाद यह संख्या लगभग 16 या 17 तक पहुँच जाएगी। इनके पास 10 से 12 फ्रिगेट और 4 से 6 कॉर्वेट भी हैं, जबकि कई छोटी मिसाइल और पेट्रोल बोट भी उनकी नौसेना का हिस्सा हैं।
पाकिस्तानी नौसेना की गतिविधियाँ ज्यादातर अपने तट के आसपास ही सीमित रहती हैं, क्योंकि उसके पास लंबी दूरी पर शक्ति प्रक्षेपण (पावर प्रोजेक्शन) की क्षमता कम है।
2025 में भारतीय नौसेना की शक्ति कितनी व्यापक है?
भारतीय नौसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी नौसेना मानी जाती है। इसके पास 150 से भी अधिक युद्धपोत मौजूद हैं, और 50 से अधिक जहाज और पनडुब्बियां निर्माणाधीन हैं। भारत के दो शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर—INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य—सैकड़ों किलोमीटर दूर तक मारक क्षमता प्रदान करते हैं। भारत के बेड़े में कुल 19 पनडुब्बियां हैं, जिनमें दो परमाणु पनडुब्बियां (अरिहंत क्लास) शामिल हैं, जो परमाणु मिसाइल दागने में सक्षम हैं। इसके अलावा रूस से लीज पर ली गई एक परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बी (अकुला क्लास) भी भारत के पास मौजूद है।
भारत की पारंपरिक पनडुब्बियों की संख्या भी 16 से अधिक है, जिनमें फ्रांस द्वारा डिज़ाइन की गई कलवरी क्लास, रूस की किलो क्लास और जर्मनी की शिशुमार क्लास शामिल हैं। कलवरी क्लास में जल्द ही AIP तकनीक और ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम जोड़े जाने की भी योजना है।
भारत के पास 13 आधुनिक डेस्ट्रॉयर हैं जिनमें कोलकाता क्लास और विशाखापट्टनम क्लास जैसे जहाज शामिल हैं, जो ब्रह्मोस और बैरक जैसी मिसाइलों से लैस हैं। इसके अतिरिक्त भारत के पास 14–17 फ्रिगेट, 20 से अधिक कॉर्वेट और कई अन्य सहायक जहाजों का विशाल बेड़ा है।
भारत की समुद्री निगरानी क्षमता भी दुनिया में बेहतरीन मानी जाती है, क्योंकि हमारे पास P-8I जैसे समुद्री गश्ती विमान और MH-60R हेलीकॉप्टर उपलब्ध हैं।
क्या भारत इन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है?
पाकिस्तान को मिलने वाली AIP पनडुब्बियां आधुनिक जरूर हैं, लेकिन भारत के पास परमाणु पनडुब्बियां हैं जो महीनों तक पानी के नीचे रह सकती हैं। भारत के एयरक्राफ्ट कैरियर लाखों वर्ग किलोमीटर के समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण रखने की क्षमता देते हैं। भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता—P-8I विमान, उन्नत सोनार सिस्टम और आधुनिक हथियारों के कारण—बहुत मजबूत मानी जाती है।
भारत भविष्य के लिए भी तैयारी कर रहा है। प्रोजेक्ट-75I के तहत 6 नई AIP आधारित पनडुब्बियां बनने वाली हैं और कई नई परमाणु हमला पनडुब्बियां भी विकसित की जा रही हैं।
आखिर में साफ है कि भारतीय नौसेना का आकार, ताकत और तकनीकी क्षमता पाकिस्तान से कहीं अधिक है। पाकिस्तान तटीय क्षेत्रों में कुछ चुनौती अवश्य पैदा कर सकता है, लेकिन खुले समुद्र में भारत का प्रभुत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान की क्षमता बढ़ाती हैं, पर भारतीय नौसेना की समग्र शक्ति इतनी अधिक है कि भारत इन चुनौतियों का सामना आसानी से कर सकता है। नई तकनीक और आधुनिक जहाजों को लगातार शामिल करके भारत अपनी समुद्री स्थिति को और भी मजबूत बना रहा है।
(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)



