Babri Masjid: बाबरी मस्जिद बनाने की चाहत वाला हुमायूं कबीर फिर विवादों में -बयान पर टीएमसी ने 6 साल के लिए किया निष्कासन..
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है और उसका नाम अक्सर विवादों से जुड़ता रहा है। हाल के दिनों में उसने मुर्शिदाबाद जिले में नई बाबरी मस्जिद की नींव रखने की बात कहकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उसको छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया।
हुमायूं कबीर का सार्वजनिक जीवन 1993 में कांग्रेस से शुरू हुआ था। शुरुआत में उन्होंने पंचायत स्तर के चुनाव लड़े। आगे चलकर 2011 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर वे विधायक बने। हालांकि विधायक बनने के केवल एक साल बाद ही उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और 2012 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। टीएमसी में रहते हुए उन्हें मंत्री पद भी मिला, लेकिन उपचुनाव में हार के बाद उनका मंत्री पद छिन गया।
कबीर की राजनीतिक छवि बार-बार पार्टी बदलने वाले नेता की बन गई। वर्ष 2015 में उसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पार्टी में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। इसके बाद टीएमसी ने उसको निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद वो समाजवादी पार्टी में शामिल हुआ, फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वो फिर कांग्रेस में लौटा और 2018 में भारतीय जनता पार्टी में चला गया । 2020 में उसने एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस जॉइन कर ली। बार-बार राजनीतिक पाला बदलने के कारण वो हमेशा चर्चा और विवाद में बना रहा।
इस बार उसने मुर्शिदाबाद के रेंजी नगर इलाके में नई बाबरी मस्जिद की नींव रखने की घोषणा की, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बयान को पार्टी अनुशासन के खिलाफ बताते हुए उसको तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया। बाबरी मस्जिद का मुद्दा देशभर में पहले से ही बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन दी गई थी, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल मस्जिद के नए डिजाइन पर काम चल रहा है, जिसमें पांच मीनारें और पारंपरिक गुंबद शामिल किए गए हैं। इसके अलावा मस्जिद परिसर में अस्पताल, सामुदायिक रसोई, सांस्कृतिक केंद्र और संग्रहालय बनाने की योजना भी है।
हुमायूं कबीर का ताजा बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए विवाद की वजह बन गया है। यह मामला तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती साबित हो सकता है। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर सकते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना अब राज्य सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है, जबकि हुमायूं कबीर इस पूरे विवाद के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश में जुटा नजर आ रहा है।



