Suger: भारत के लोगों के लिये बहुत बड़ी खुशखबरी है जो देश के 15 करोड़ लोगों की उम्र बढ़ा देगी.. शुगर की बीमारी की दवा खोज ली है AIIMS के डॉक्टर ने..
अब तक यही माना जाता रहा है कि डायबिटीज़ एक लाइलाज बीमारी है। यानी इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, बल्कि दवा, इंसुलिन, सही खान-पान और लाइफस्टाइल से सिर्फ कंट्रोल किया जाता है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज़ के मरीजों को जिंदगी भर दवा पर निर्भर रहना पड़ता है।
AIIMS के डॉक्टर का बड़ा दावा
दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों ने दावा किया है कि टाइप-2 डायबिटीज़ को जड़ से खत्म किया जा सकता है। उनका कहना है कि एक खास तरह की सर्जरी से मरीजों को न दवा की जरूरत रहेगी और न ही इंसुलिन की।
किस तरह की सर्जरी है यह
डॉक्टरों के मुताबिक यह सर्जरी पाचन तंत्र में बदलाव करती है। इसमें पेट के साइज को छोटा किया जाता है और खाने के रास्ते (फूड पाइप) को आंत से इस तरह जोड़ा जाता है कि शरीर के हार्मोन बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं। इससे शरीर खुद ही शुगर को कंट्रोल करने लगता है।
कितने समय में दिखता है असर
डॉक्टरों का दावा है कि सर्जरी के 24 घंटे के अंदर ही ब्लड शुगर नॉर्मल हो सकता है। सर्जरी के करीब 2–3 महीने बाद मरीजों को शुगर की दवा और इंसुलिन की जरूरत पूरी तरह खत्म हो सकती है।
अब तक कितने मरीजों का इलाज हुआ
AIIMS के सर्जन डॉ. मंजूनाथ के अनुसार अब तक 35 मरीजों ने यह सर्जरी कराई है और सभी को डायबिटीज़ से राहत मिली है। इनमें कई ऐसे मरीज थे जो 10 से 15 साल से डायबिटीज़ से पीड़ित थे और रोज़ कई दवाएं या इंसुलिन लेते थे।
केस स्टडी से क्या पता चलता है
एक केस में 65 साल के एक सांसद शामिल थे, जिनका HbA1c 11.7 था और शुगर बहुत ज्यादा अनकंट्रोल थी। सर्जरी के बाद करीब 5 महीनों से उन्हें किसी भी शुगर की दवा की जरूरत नहीं पड़ी।
दूसरे केस में एक महिला को हार्ट ब्लॉकेज के साथ डायबिटीज़ थी। पहले उनकी डायबिटीज़ की सर्जरी की गई और इसके बाद उनका शुगर कंट्रोल में आ गया, जिससे हार्ट सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ी।
किन मरीजों के लिए यह सर्जरी फायदेमंद है
डॉक्टरों के अनुसार यह सर्जरी उन लोगों के लिए है जो कम से कम 2 साल से टाइप-2 डायबिटीज़ से पीड़ित हैं, जिनका HbA1c 7.5 से ज्यादा है और जो 3 या उससे ज्यादा दवाएं लेने के बावजूद शुगर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं।
जो लोग बहुत लंबे समय से डायबिटीज़ के मरीज हैं या जिनका HbA1c 6.5 से कम है, उन्हें इस सर्जरी की जरूरत नहीं होती।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खबर
भारत को “डायबिटीज़ कैपिटल” कहा जाता है क्योंकि यहां टाइप-2 डायबिटीज़ के करोड़ों मरीज हैं। गलत खान-पान, कम एक्सरसाइज़, मोटापा, तनाव और जेनेटिक कारण इसकी बड़ी वजह हैं। ऐसे में अगर यह सर्जरी सुरक्षित और असरदार साबित होती है, तो यह लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है।
AIIMS के डॉक्टरों का यह दावा डायबिटीज़ के इलाज में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि यह सर्जरी हर मरीज के लिए नहीं है और इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं कराया जा सकता। फिर भी, टाइप-2 डायबिटीज़ से जूझ रहे मरीजों के लिए यह खबर एक नई उम्मीद जरूर देती है।
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. News Hindu Global इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.



