Acharya Anil Vats presents का यह लेख जानकारी देता है कि क्या ऐसा है 108 के अंक में जो माला की गुरिया बन कर जाप को सुफल बनाता है..
हिंदू धर्म में मंत्र जाप का बहुत महत्व है। सदियों से इसके लिए 108 मोतियों वाली माला का उपयोग होता आ रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ 108 मोतियों वाली माला ही क्यों चुनी जाती है और इसके क्या खास नियम होते हैं? चलिए, इसके पीछे का रहस्य और कारण समझते हैं।
सनातन धर्म में मंत्रों को बहुत शक्तिशाली माना जाता है। इन मंत्रों की ध्वनि तरंगें ब्रह्मांड की ऊर्जा को अपनी ओर खींच सकती हैं। मंत्र जाप ईश्वर की भक्ति का एक आसान और असरदार तरीका है। ऐसा माना जाता है कि अगर रोज़ मंत्र जाप किया जाए, तो हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और हमारे आसपास का माहौल भी शुद्ध हो जाता है।
मंत्रों में इतनी शक्ति होती है कि ये कठिन परिस्थितियों को भी हमारे पक्ष में बदल सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे—मंत्र जाप का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही नियम और विधि से किया जाए। अगर लापरवाही हो, तो इसका असर कम हो सकता है। आइए, जानते हैं इन नियमों और सही तरीकों के बारे में।
108 की संख्या का महत्व
108 की संख्या हिंदू धर्म, ज्योतिष, योग और विज्ञान में खास मानी जाती है। इसके कई कारण हैं—
ज्योतिष: 12 राशियाँ और 9 ग्रह होते हैं। 12 × 9 = 108।
योग: मानव शरीर में 108 मुख्य नाड़ियाँ होती हैं। इनमें से सुषुम्ना नाम की नाड़ी मोक्ष का मार्ग मानी जाती है।
विज्ञान: वैज्ञानिक मानते हैं कि सूर्य का व्यास, पृथ्वी के व्यास का लगभग 108 गुना है।
आध्यात्मिक कारण: इंसान दिनभर में लगभग 21,600 बार सांस लेता है। इनमें से 10,800 सांसें दैवीय ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती हैं। इसलिए 108 बार जाप करने से उस ऊर्जा का अनुभव होता है।
108 मोतियों की माला के नियम
माला का चुनाव: मंत्र के अनुसार माला चुनें—रुद्राक्ष, तुलसी, स्फटिक आदि।
माला पकड़ने का तरीका: माला को मध्यमा उंगली पर रखें और अंगूठे से मोती आगे बढ़ाएँ। तर्जनी उंगली का इस्तेमाल न करें।
सुमेरु का महत्व: माला के अंत में एक बड़ा मोती होता है जिसे सुमेरु कहते हैं। इसे पार नहीं करना चाहिए, बल्कि माला को उल्टा घुमाकर जाप जारी रखें।
माला की स्थिति: जाप करते समय माला नाभि से नीचे या नाक से ऊपर नहीं होनी चाहिए। इसे हृदय के पास रखें।
एकाग्रता: जाप के दौरान मन शांत और एकाग्र होना चाहिए।
मंत्र जाप के दौरान ज़रूरी नियम
हमेशा जमीन पर बैठकर, एक शुद्ध आसन पर जाप करें।
जिस माला से जाप शुरू करें, उसे उसी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करें।
जाप के बाद माला को साफ कपड़े में लपेटकर रखें। इसे खुले में या कील पर न टाँगें।
तर्जनी उंगली का इस्तेमाल न करें—इसे अहंकार का प्रतीक माना गया है।
छींक या जम्हाई आने पर माला को गोमुखी में रखें, और तांबे के पात्र में जल व तुलसी का प्रयोग करें ताकि वायु दोष का असर कम हो।
जाप पूरा होने पर थोड़ा जल जमीन पर डालें और उसी जल से माथा व आँखें धोएँ, इससे जाप का फल पूर्ण होता है।
हर देवी-देवता के मंत्र के लिए अलग माला इस्तेमाल करें—
भगवान शिव के लिए: रुद्राक्ष माला
माता लक्ष्मी के लिए: कमलगट्टा माला
गुरु मंत्र के लिए: स्फटिक माला
माला का महत्व मंत्र जाप में
हर मंत्र में एक विशेष ऊर्जा होती है। इस ऊर्जा को जागृत करने के लिए माला का उपयोग किया जाता है। माला से जाप करने का फायदा यह है कि मंत्र गिनती में गलती नहीं होती। एक माला में 108 दाने होते हैं, जो पूर्णता का प्रतीक हैं। यह संख्या विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बहुत शुभ मानी जाती है।
देवी-देवताओं की पूजा में अलग-अलग प्रकार की मालाओं का उपयोग होता है—जैसे रुद्राक्ष, स्फटिक या कमलगट्टे की माला।
(प्रस्तुति -आचार्य अनिल वत्सओ)