America Vs ISIS: ISIS के 70 ठिकानों पर ‘ऑपरेशन हॉकआई’ से तबाही, ट्रंप की चेतावनी—अगली बार जवाब और भी सख्त होगा..
सीरिया में तीन अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों की हत्या के बाद अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अब तक की सबसे आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की कि अमेरिका ने ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ISIS के आतंकियों, उनके ठिकानों, हथियारों के जखीरे और पूरे आतंकी नेटवर्क को जड़ से समाप्त करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि उन अमेरिकियों की हत्या का सीधा जवाब है, जिन्हें ISIS ने निशाना बनाया।
कार्रवाई की पृष्ठभूमि क्या है?
यह सैन्य अभियान 13 दिसंबर 2025 को सीरिया के पलमायरा क्षेत्र के निकट हुए घातक हमले के बाद शुरू किया गया। इस हमले में अमेरिका के आयोवा नेशनल गार्ड के दो जवान और एक अमेरिकी नागरिक की जान चली गई थी। मारे गए सैनिकों में डेस मोइन्स के सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-तोवार (25) और मार्शलटाउन के सार्जेंट विलियम नथानियल हॉवर्ड (29) शामिल थे।
इसके साथ ही अयाद मंसूर सकत, जो अमेरिकी सेना के लिए दुभाषिए (इंटरप्रेटर) के रूप में कार्यरत थे, भी इस हमले में मारे गए। इस आतंकी हमले में तीन अन्य अमेरिकी सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। ट्रंप प्रशासन ने इस पूरे हमले के लिए सीधे तौर पर ISIS को जिम्मेदार ठहराया है।
हमला किस तरह अंजाम दिया गया?
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई व्यापक और बहुस्तरीय सैन्य ऑपरेशन के रूप में की गई। सीरिया के मध्य हिस्सों में स्थित ISIS से जुड़े लगभग 70 ठिकानों को सटीक निशाना बनाया गया। इस अभियान में अमेरिका ने अपनी सबसे उन्नत और घातक सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल किया।
हमले के दौरान F-15 ईगल फाइटर जेट, A-10 थंडरबोल्ट ग्राउंड-अटैक एयरक्राफ्ट, AH-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, जॉर्डन से उड़ान भरने वाले F-16 लड़ाकू विमान, और HIMARS रॉकेट सिस्टम को तैनात किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी सैन्य हमले किए जा सकते हैं।
क्या है ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’?
ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक अमेरिका द्वारा संचालित एक विशेष, लक्षित और दीर्घकालिक सैन्य अभियान है, जिसका मकसद सीरिया में मौजूद ISIS के शेष ठिकानों, स्लीपर सेल और आतंकी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इस अभियान के तहत ISIS के लड़ाकों, उनके हथियार भंडार, कमांड सेंटर और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर सीधे और निर्णायक हमले किए जा रहे हैं।
उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी आतंकी संगठन दुनिया में कहीं भी अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, अमेरिका उसे खोजकर समाप्त करेगा।
ट्रंप का सख्त संदेश और सीरिया का समर्थन
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन सैन्य कार्रवाइयों का खुलकर समर्थन करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ’ पर लिखा कि अमेरिकी हमले ISIS के मजबूत और रणनीतिक ठिकानों पर किए गए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा इस अभियान के पूर्ण समर्थन में हैं और वह स्वयं भी इस हमले को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं।
ट्रंप ने आतंकियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी ने अमेरिका या उसके नागरिकों को फिर से धमकाने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो जवाब पहले से कहीं अधिक कठोर और निर्णायक होगा।
ध्यान देने वाली बात ये है कि बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद अमेरिका और सीरिया के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। हाल के महीनों में अमेरिका ने सीरिया पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए, जबकि राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने वॉशिंगटन का ऐतिहासिक दौरा भी किया। इसके अलावा, सीरिया अब अमेरिका के नेतृत्व वाले ISIS-विरोधी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बन चुका है।
हालांकि ISIS को वर्ष 2019 में सैन्य रूप से पराजित घोषित कर दिया गया था, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार आज भी सीरिया और इराक में इसके 5,000 से 7,000 लड़ाके सक्रिय हैं। ऐसे में ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक को ISIS के खिलाफ अमेरिका की अब तक की सबसे कड़ी और स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
(प्रस्तुति- त्रिपाठी पारिजात)



