Bangladesh में हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले महामारी की तरह फैले, लेकिन यूनुस सरकार सोती रही — रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा..
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन “एचआरसीबीएम” ने एक बयान जारी कर बताया है कि देश भर में कई मामलों में महिलाओं और लड़कियों के शव इस हालत में मिले हैं कि उनके सिर तक गायब थे और उनकी पहचान कर पाना मुश्किल हो गया था।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे हैं अत्याचार
बांग्लादेश इन दिनों यौन हिंसा के एक भयानक दौर से गुजर रहा है। खासतौर पर हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में यह समस्या एक महामारी की तरह फैल गई है। बांग्लादेश अल्पसंख्यक मानवाधिकार कांग्रेस (एचआरसीबीएम) ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी।
रिपोर्ट के मुताबिक आंकड़े चौंकाने वाले हैं
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन “ऐन ओ सलीश केंद्र (एएसके)” की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए एचआरसीबीएम ने बताया कि साल 2025 की सिर्फ पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) के दौरान आधिकारिक तौर पर बलात्कार के 342 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 87% मामलों में पीड़िताएं 18 साल से कम उम्र की लड़कियां थीं।
इनमें से 40 पीड़ित तो छह साल तक की उम्र के छोटे बच्चे थे। वहीं, सामूहिक बलात्कार के मामलों में भी बहुत तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिनमें ज्यादातर पीड़ित नाबालिग हैं। मानवाधिकार संस्था के मुताबिक, ये आंकड़े तो सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा हैं — असल में मामले हजारों में हैं, जो डर, चुप्पी और सरकार की निष्क्रियता की वजह से दर्ज नहीं हो पा रहे।
डर की वजह से मामले दर्ज नहीं होते
बांग्लादेश में बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के ज्यादातर मामले सामाजिक कलंक, बदले की कार्रवाई के डर और न्याय प्रणाली में अविश्वास के चलते दर्ज नहीं करवाए जाते।
अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के मामले में तो यह चुप्पी और भी गहरी है। परिवारों का आरोप है कि पुलिस और निचली अदालतों में धार्मिक पूर्वाग्रह की वजह से उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। इस वजह से अपराधी सजा से बच जाते हैं और मामले दबे रह जाते हैं।
पीड़िताओं के साथ क्रूरता की हद
एचआरसीबीएम के बयान में कहा गया, “कई मामलों में तो देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं और लड़कियों के शव इस तरह मिले हैं कि उनके सिर तक काट दिए गए थे, जिससे उनकी पहचान करना नामुमकिन हो गया। यह अपराधियों की बर्बरता और निर्ममता को दिखाता है।”
हिंदू नेता को झूठे मामलों में फंसाया गया
मानवाधिकार संस्था ने यूनुस सरकार के दौरान हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए बताया कि एक प्रमुख हिंदू नेता और बांग्लादेश सम्मिलितो सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास नवंबर से जेल में बंद हैं, बिना किसी ठोस आरोप के।
उनकी जमानत की अर्ज़ी बांग्लादेश की सर्वोच्च अदालत में लंबित है, लेकिन महीनों से उस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इस दौरान उन पर कई झूठे मामले डाल दिए गए, जिनमें हत्या के झूठे आरोप भी शामिल हैं। एचआरसीबीएम ने सवाल उठाया है — क्या उनका असली “अपराध” सिर्फ इतना था कि वे सच बोलते थे और बांग्लादेश के हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों की आवाज़ उठाते थे?
(प्रस्तुति- त्रिपाठी पारिजात)